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सवालों पर कर रहे थे टालमटोल, जाँच में पहले भी नहीं किया सहयोग: मनीष सिसोदिया की गिरफ़्तारी का कारण जानिए, आपराधिक साजिश-धोखाधड़ी का भी मामला

बयान में सीबीआई ने यह भी कहा है कि नई आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं को लेकर सिसोदिया व अन्य 14 लोगों के FIR दर्ज की गई थी। इसमें मुंबई की एक निजी कंपनी के तत्कालीन सीईओ समेत 7 लोगों के खिलाफ 25 दिसंबर, 2022 को चार्जशीट दाखिल की गई।

दिल्ली की शराब नीति को लेकर हुए घोटाला मामले में सीबीआई (CBI) ने मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी से पहले सीबीआई ने करीब 8 घण्टे तक उनसे पूछताछ की। इस गिरफ्तारी को लेकर AAP बीजेपी पर हमलावर है। हालाँकि, सीबीआई ने कहा है कि सिसोदिया जवाब देने में टाल-मटोल कर रहे थे। इसलिए उन्हें गिरफ्तार किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीबीआई ने मनीष सिसोदिया को IPC की धारा 120-B (आपराधिक साजिश रचने के आरोप में) तथा 477-A (धोखाधड़ी करने की कोशिश करने के आरोप में) व भ्रष्टाचार अधिनियम निवारण की धारा-7 के तहत गिरफ्तार किया है।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी को लेकर सीबीआई ने बयान जारी कहा है कि जाँच के दौरान घोटाले को लेकर जुटाए सबूतों को लेकर उनसे पूछताछ की गई। लेकिन, सिसोदिया ने पहले की ही तरह एक बार फिर जवाब देने में टाल-मटोल कर रहे थे।

बयान में सीबीआई ने यह भी कहा है कि नई आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं को लेकर सिसोदिया व अन्य 14 लोगों के FIR दर्ज की गई थी। इसमें मुंबई की एक निजी कंपनी के तत्कालीन सीईओ समेत 7 लोगों के खिलाफ 25 दिसंबर, 2022 को चार्जशीट दाखिल की गई।

जाँच में सहयोग करने के लिए सिसोदिया को 19 फरवरी को नोटिस जारी किया। लेकिन उन्होंने व्यस्तता का हवाला देते हुए एक सप्ताह का समय माँगा। उनके अनुरोध पर फिर नोटिस जारी किया गया। हालाँकि इसके बाद भी वह जवाब देने में टालमटोल करते रहे। इसलिए उनकी गिरफ्तारी हुई। ‘हिंदुस्तान’ ने अपनी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा है कि मनीष सिसोदिया के जवाब जाँच एजेंसी को संतोषजनक नहीं लग रहे थे। जाँच अधिकारी उनसे दिनेश अरोड़ा समेत अन्य आरोपितों से संबंध को लेकर पूछताछ कर रहे थे। लेकिन, सिसोदिया ज्यादातर जवाबों को टालने की कोशिश कर रहे थे।

सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि जाँच अधिकारी यह जानना चाहते थे कि आबकारी नीति लागू होने से पहले ही इसकी प्रतियाँ शराब कारोबारियों तक कैसे पहुँची? लेकिन, सिसोदिया इन तमाम सवालों के जवाब नहीं दे सके। यही नहीं, सिसोदिया की गिरफ्तारी में दिनेश अरोड़ा के बयानों को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दरअसल, अरोड़ा सिसोदिया का सबसे खास आदमियों में से एक था। हालाँकि गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद दिनेश आरोड़ा इस पूरे मामले में सरकारी गवाह बन गया। ऐसे में मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपितों को लेकर उसके द्वारा किए गए खुलासे इस गिरफ्तारी में अहम माने जा रहे हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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