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ट्रैफिक जाम से मिली मुक्ति, रोपवे-इलेक्टिक बसों और पिंक ऑटो की हुई शुरुआत: योगी सरकार के 9 साल का कमाल, UP में बदला परिवहन का हाल

योगी सरकार के 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश 'धीमी रफ़्तार' की पहचान छोड़ आधुनिक शहरी परिवहन का वैश्विक मॉडल बन गया है। 'काम दमदार - डबल इंजन सरकार' के इस विजन ने UP के महानगरों को परिवहन सुविधाओं के मामले में सिंगापुर और जापान जैसे देशों की कतार में खड़ा कर दिया है।

उत्तर प्रदेश, जिसे कभी धीमे परिवहन और ट्रैफिक जाम के लिए जाना जाता था, आज आधुनिक शहरी परिवहन के मामले में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। योगी सरकार के 9 वर्षों के कार्यकाल में ‘नए भारत के नए उत्तर प्रदेश’ का संकल्प धरातल पर उतरता दिख रहा है। राज्य के महानगरों में आज जिस तरह का इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित हुआ है, उसने न केवल आम जनता के सफर को आसान बनाया है, बल्कि प्रदेश को निवेश और रोजगार के ग्लोबल मॉडल के रूप में परिवर्तित कर दिया है।

मेट्रो और नमो भारत: रफ्तार की नई परिभाषा

उत्तर प्रदेश आज देश का ऐसा राज्य है जहाँ सबसे अधिक शहरों में मेट्रो का जाल बिछ चुका है। वर्तमान में मेरठ, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर और आगरा जैसे प्रमुख शहरों में मेट्रो रेल सेवा का सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही, देश की पहली ‘नमो भारत’ रैपिड रेल (दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ) का संचालन शुरू होना परिवहन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम है, जिसे NCR क्षेत्र की ‘लाइफलाइन’ माना जा रहा है।

वाराणसी में देश का पहला अर्बन रोपवे

तकनीकी नवाचार की दिशा में योगी सरकार ने काशी (वाराणसी) को देश का पहला ऐसा शहर बनाया है जहाँ नगरीय परिवहन के लिए रोपवे की सुविधा शुरू होने जा रही है। यह न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा, बल्कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में यातायात को सुगम बनाने का देश में अपनी तरह का पहला मॉडल बनेगा।

इलेक्ट्रिक बसों का जाल और ‘वन यूपी वन कार्ड’

प्रदूषण मुक्त सफर के लिए सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों पर विशेष जोर दिया है। वर्तमान में प्रदेश के 15 शहरों में 743 इलेक्ट्रिक बसें दौड़ रही हैं। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक निगम के बेड़े में 3,000 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने और अनुबंध के आधार पर 5,000 और बसें जोड़ने का है। इसके साथ ही, यात्रियों की सुविधा के लिए ‘वन यूपी वन कार्ड‘ की शुरुआत की गई है, जिससे किराए में 10 प्रतिशत की छूट मिलती है। वहीं, ‘UPRAHI’ ऐप के माध्यम से यात्री बसों की वास्तविक स्थिति और अन्य सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं।

सुरक्षित और स्मार्ट परिवहन: पिंक ऑटो और AI का उपयोग

शहरी परिवहन को सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है। बसों की निगरानी के लिए 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए 7 शहरों में 500 ई-ऑटो चलाने की योजना है, जिनमें से 50 प्रतिशत महिला चालक होंगी। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत शहरों में ऑटोमैटिक इंटेलिजेंस स्पीड और रेड लाइट सेंसिंग की व्यवस्था की गई है, जिससे यातायात नियमों का उल्लंघन कम हो और सड़क सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

लॉजिस्टिक्स और भविष्य की योजनाएँ

योगी सरकार का विजन केवल बसों और ट्रेनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरों को ‘लॉजिस्टिक्स हब‘ के रूप में विकसित करने का है। प्रयागराज और साहिबाबाद में इलेक्ट्रिक डिपो हब तैयार किए जा रहे हैं। प्रदेश के 16 जनपदों में ड्राइवर ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट संचालित हैं ताकि कुशल जनशक्ति तैयार हो सके। लखनऊ में यातायात को सुगम बनाने के लिए ₹7000 करोड़ की लागत से ‘ग्रीन कॉरिडोर’ का विकास किया जा रहा है।

आधुनिक शहरी परिवहन का यह मजबूत ढांचा उत्तर प्रदेश के 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को गति दे रहा है। ‘विजन 2047’ के तहत विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश की नींव इन्हीं पहलों पर टिकी है, जहाँ हर नागरिक को घर, पानी, बिजली के साथ-साथ विश्वस्तरीय परिवहन की सुविधा प्राप्त हो। ‘काम दमदार – डबल इंजन सरकार’ का यह विजन आज यूपी के शहरों को सिंगापुर और जापान जैसी सुविधाओं की होड़ में खड़ा कर रहा है।

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