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फिर चीन पहुँच रही चमगादड़ की दर्जनों प्रजातियाँ, साथ ला रही कई तरह के कोरोना वायरस: जलवायु परिवर्तन है कारण

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के 2021 के एक अध्ययन में पता चला है कि दक्षिण-पश्चिमी युन्नान प्रांत, पड़ोसी देश म्यांमार और लाओस में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक वनस्पति का स्वरूप बदलने के बाद यह पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्तमान में महामारी का संकट पैदा हुआ है।

जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में वृद्धि होने से भविष्य में पूर्वी एशिया में कई बीमारियाँ दस्तक दे सकती हैं। विशेषज्ञों ने अमेरिका की रेडियो फ्री न्यूज एजेंसी को बताया, “जलवायु परिवर्तन और जानवरों से फैलाने वाली बीमारियों और जानलेवा घात​क महामारी के बीच ग्लोबल हीटिंग के कारण चमगादड़ की दर्जनों प्रजातियाँ दक्षिणी चीन और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की ओर पलायन कर रही हैं, जो चिंता का विषय है।”

कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के 2021 के एक अध्ययन में पता चला है कि दक्षिण-पश्चिमी युन्नान प्रांत, पड़ोसी देश म्यांमार और लाओस में बड़े पैमाने पर प्राकृतिक वनस्पति का स्वरूप बदलने के बाद यह पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण वर्तमान में महामारी का संकट पैदा हुआ है। अध्ययन में यह भी कहा गया है, “तापमान में वृद्धि और वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर में रिकॉर्ड वृद्धि के कारण पेड़-पौधे प्रभावित हुए हैं। इसके कारण वन और झाड़ियाँ अधिक हो गई हैं। इससे कई चमगादड़ प्रजातियों को यहाँ रहने के लिए ​उपयुक्त स्थान मिल गया है, जो मुख्य रूप से जंगलों में रहते हैं।”

इसमें कहा गया है कि किसी दिए गए एक क्षेत्र में कोरोना वायरस की संख्या यहाँ मौजूद विभिन्न चमगादड़ों की प्रजातियों की संख्या से जुड़ी हुई है। पिछले 100 वर्षों के दौरान 40 चमगादड़ों की प्रजातियाँ युन्नान में चली गई हैं, जो अपने साथ लगभग 100 नए कोरोना वायरस लेकर आई हैं।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के एक शोधकर्ता अध्ययन के पहले लेखक रॉबर्ट बेयर के अनुसार, जेनेटिक डेटा से पता चला है कि जिस वायरस SARS-CoV-2 के कारण COVID-19 होता है। वह भी हो सकता है कि इसी क्षेत्र से आया हो। बेयर ने कहा, “पिछली शताब्दी में हुए जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिणी चीनी युन्नान प्रांत में चमगादड़ों की प्रजातियाँ विकसित हुई हैं।” उन्होंने कहा, “जैसा कि जलवायु परिवर्तन के कारण चमगादड़ों के रहने का स्थान बदल गया है, ऐसे में चमगादड़ों की प्रजातियाँ इस वायरस के साथ कुछ स्थानों को छोड़कर दूसरों स्थान पर चली गई है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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