सोने और चाँदी के ऑल टाइम हाई के बाद अचानक जोरदार गिरावट दर्ज की गई। जनवरी 2026 में लगभग 32 परसेंट की तेजी आई थी। पिछले तीन दिनों में सोने में भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिसमें 24-कैरेट सोने की कीमतें 18,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा गिर गईं, जबकि चाँदी 1.50 लाख रुपए से ज्यादा सस्ती हुई। पिछले 48 घंटों में जो हुआ वह कोई आम गिरावट नहीं है, बल्कि एक जबरदस्त बदलाव था, जिसने महीनों की सट्टेबाजी को खत्म कर दिया।
चाँदी ने बढ़ते हुए सोने को भी पीछे छोड़ दिया था। जब गिरी तो फिर सोने को पीछे छोड़ा। ऑल टाइम हाई से पिछले 3 दिन में 1.50 लाख रुपए से ज्यादा सस्ती हो गई। यहाँ तक कि रविवार को बजट वाले दिन भी 27000 रुपए की गिरावट चाँदी में देखी गई, जबकि गोल्ट रेट में 9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जनवरी 2026 में लगभग 71 परसेंट की तेजी के बाद आई इस गिरावट की कई वजह है।
दुनिया भर में सोने और चाँदी में तेजी क्यों आई
आम तौर पर माना जाता है कि युद्ध और वैश्विक अशांति की वजह से सोना-चाँदी की माँग बढ़ती है और इसके विपरीत शांति होने पर इसके दाम कम होते हैं। लेकिन इस बार वैश्विक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। रूस- यूक्रेन युद्ध से लेकर पश्चिम एशिया में तनाव का माहौल बना हुआ है। अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध की स्थिति है यानी जियोपॉलिटिकल बैकग्राउंड वैसा ही है। जो बदला है, वह है मार्केट की पोजिशनिंग, निवेशकों का व्यवहार और जल्दी पैसे कमाने की उम्मीद। एक बार जब भारी बिकवाली शुरू हुई, तो गिरावट तो आनी ही थी।
ब्लूमबर्ग के डेटा से पता चलता है कि भारी बिकवाली से पहले अकेले जनवरी में सोने की कीमतें 17 परसेंट से ज़्यादा बढ़ गई थीं, जिससे ऐसा लगा कि ये साल सोना-चाँदी के अच्छे दिनों का है, लेकिन तेजी से स्थिति बदली है।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, सोना-चाँदी में चार दशकों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दोनों मेटल पहले ऑल-टाइम हाई पर थे। इसके बाद सोने 12 परसेंट से ज्यादा गिरा और $5,000 प्रति औंस के निशान से नीचे चला गया। यह 1980 के दशक की शुरुआत के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है।
डॉलर में आई मजबूती से फिसला सोना
इसकी अहम वजह डॉलर में आई वैश्विक मजबूती है। सोने-चाँदी की भारी बिकवाली का भी US डॉलर को फायदा मिला। इस बीच खबरें आई कि ट्रंप प्रशासन ने केविन वार्श को अगले फेडरल रिजर्व चेयरमैन के तौर पर नॉमिनेट करने की तैयारी कर रहा है। माना गया कि वॉर्श ज्यादा आक्रामक रुख अपना सकते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत होगा और कीमती धातुओं पर दबाव पड़ेगा।
दरअसल निवेशक ये मान कर कीमती मेटल्स में पैसा लगा रहे थे कि अमेरिका डॉलर की गिर रही कीमतों को लेकर संजीदा नहीं है और उसे बर्दाश्त कर रहा है। लेकिन अमेरिका के मजबूत आर्थिक आँकड़ों ने इस पर पानी फेर दिया। सोने-चाँदी जैसे मेट्ल्स पर ऊँची व्याज दरें नेगेटिव असर डालती हैं। ऐसा माहौल बना कि कुछ निवेशक सोना-चाँदी से पैसा निकाल कर बांड और इक्विटी जैसे यील्ड वाले एसेट्स में पैसे लगाने लगे।
ब्लूमबर्ग रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी निवेशक काफी तेजी से कीमती मेटल खरीद रहे थे। इससे शंघाई फ्यूचर्स एक्सचेंज को सोने-चाँदी समेत कई धातुओं में आई बेतहाशा तेजी को कम करने के लिए जल्दबाजी में कदम उठाने पड़े। जैसे ही ग्लोबल कीमतें बदलीं, इसके शेयरों में गिरावट और तेज हो गई।
भारी बिकवाली का असर
कुछ दिनों में जबरदस्त उछाल को लेकर निवेशक मुनाफावसूली के लिए बेचना शुरू किया और जबरदस्त पैसा कमाया। घरेलू बाजारों में सोने और चाँदी के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में 20 फीसदी तक की गिरावट आई है। दिल्ली में सोना एक ही दिन में 14,000 रुपये प्रति 10 ग्राम गिर गया, जबकि 29 जनवरी 2026 को यह 1,83,000 रुपए के ऑल-टाइम हाई पर पहुँचा था। चाँदी भी इसके बाद 20,000 रुपये प्रति kg गिरी, जबकि यह भी 29 जनवरी 2026 को 4,04,500 रुपये के रिकॉर्ड पर पहुँच गई थी। लेकिन तीन दिनों में इसकी कीमत में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। हालाँकि बजट के बाद 24 कैरेट सोना ₹1,62,240 प्रति 10 ग्राम हो गया और चाँदी 2.78 प्रति किलो पहुँच गया।
ये भी माना जा रहा है कि अचानक आई तेजी के बाद बाजार में करेक्शन का दौर शुरू हुआ। जानकार बताते हैं कि ऐसे करेक्शन लगभग तय थे। खास कर चाँदी में, जिसका बाजार अपेक्षाकृत छोटा और अस्थिर होता है। ऐसे में अगर तेजी ज्यादा आई है तो करेक्शन भी तेजी से ही होता है। यही वजह है कि चाँदी जबरदस्त तरीके से लुढ़का है।
तांबा भी ऑल टाइम हाई से औंधे मुँह गिरा
तांबा की कीमतों में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। साल 2026 में तांबा निवेशकों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहा था। 30 जनवरी को इसमें भारी गिरावट दर्ज की गई । तांबे की कीमत पहले ऑल टाइम हाई पर थी और 1411 प्रति किलो था, जो घट कर 1284 रुपए हो गया। यानी एक ही झटके में तांबे में 126.5 रुपए प्रति किलो सस्ता हो गया।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी तांबे की कीमत $6.21 से गिरकर $5.96 प्रति औंस पर आ गया। इसकी वजह निवेशकों की भारी बिकवाली और सोने-चाँदी की कीमतों में आ रही गिरावट का दबाव माना जा रहा है। हालाँकि जानकार मानते हैं कि तांबे के उत्पादन में कमी और इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ रहे प्रोमोशन से तांबे का महत्व बना रहेगा इसलिए बाजार में इसकी कीमत अब नहीं घटेगी।
औद्योगिक माँग का कमजोर पड़ना
गिरावट की एक अहम वजह इंडस्ट्रियल मेटल्स की माँग का कमजोर पड़ना भी बताया जा रहा है। चाँदी का व्यापक इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और मैन्युफैक्चरिंग जैसी इंडस्ट्री में होता है। ग्लोबल ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ने की वजह चीन और यूरोप से इसकी माँग कम हो गई है। इसका दबाव पड़ा है और चाँदी की कीमतों पर इसका असर दिख रहा है।
यह अकेला ही उस रैली को अस्थिर करने के लिए काफी था जो लगभग पूरी तरह से डॉलर के कमजोर होने और गिरते रियल यील्ड पर बनी थी। एक मज़बूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड सोने और चाँदी जैसे नॉन-यील्डिंग एसेट्स को मूल रूप से कम आकर्षक बनाती हैं और एक बार जब यह समीकरण फिर से बन गया, तो कीमतें डगमगाने लगीं।


