उम्मीद की जा रही है कि पाकिस्तान अपना फैसला बदलेगा और भारत के साथ मैच खेलने के लिए तैयार हो जाएगा। दरअसल भारत-पाकिस्तान का मैच आईसीसी के लिए काफी अहम है और इसे सबसे बड़ा कॉमर्शियल मैच माना जाता है।
मेजबान श्रीलंका ने भी पाकिस्तान को लिखा खत
पाकिस्तान के सारे मैच श्रीलंका में हो रहे हैं और भारत के साथ प्रस्तावित मैच भी कोलंबो के प्रेमदासा स्टेडियम में खेला जाना है। मेजबान श्रीलंका ने पीसीबी को कहा है कि बड़े मुकाबले रद्द होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, इसलिए फैसले पर पुनर्विचार करें।
आईसीसी और पीसीबी की बैठक
आईसीसी के साथ पाकिस्तान क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की बैठक हुई है। इसके बाद पीसीबी चेयरमैन मोहसीन नकवी ने कहा है कि वह शहबाज शरीफ को सारी बातें बताएँगे, फिर फैसला लिया जाएगा यानी ये फैसला राजनीतिक होगा।
इस बीच खबर यह भी है कि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी के सामने खेलने के लिए शर्तें रखी हैं। इनमें ICC रेवेन्यू में ज़्यादा हिस्सेदारी और द्विपक्षीय क्रिकेट की बहाली से लेकर मुआवजे से जुड़ी माँगें शामिल हैं यानी भारत के साथ खेल के बहिष्कार का मुद्दा आईसीसी को बारगेन कर पैसा वसूली भी हो गया है। ये पीसीबी का आत्मविश्वास नहीं, बल्कि कमजोरी को दिखाता है।
बांग्लादेश को लेकर भी रखी शर्तें
बांग्लादेश की क्रिकेट में योगदान का हवाला देते हुए आईसीसी से ज्यादा फंडिंग की डिमांड की गई है। पीसीबी का तर्क है कि बांग्लादेश में इंफ्रास्ट्रक्चर, नए खिलाड़ियों और नेशनल टीम को स्टंडर्ड बनाए रखने के लिए आर्थिक सहायता ज्यादा दिया जाए।
टी20 से बाहर होने के बावजूद बांग्लादेश की पार्टिसिपेशन फीस न काटी जाए। इसके अलावा, बांग्लादेश में क्रिकेट को बढ़ावा देने और ग्लोबल पहचान बनाने के लिए आईसीसी टूर्नामेंट की मेजबानी का मौका दिया जाए। बोर्ड का दावा है कि इसके लिए बांग्लादेश के पास जरूरी सुविधाएँ मौजूद हैं। हालाँकि बांग्लादेश के मुद्दे को लेकर आईसीसी ने साफ कर दिया है कि उसके पास मुआवजा के तौर पर बांग्लादेश को देने के लिए कुछ नहीं है, सिर्फ आईसीसी की कमाई का हिस्सा मिल सकता है।
पाकिस्तान पर खेलने का दबाव
भारत-पाकिस्तान T20 वर्ल्ड कप मैच को लेकर फैसला राजनीतिक रूप से लेने को क्रिकेट के प्रति संवेदनशीलता कम और राजनीतिक दखलंदाजी ज्यादा माना जा रहा है। भारत के साथ न खेलने का ऐलान भी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ही किया था।
अब एक T20 मैच खेलने के लिए पाकिस्तान के कैबिनेट की रजामंदी चाहिए। यह दिखाता है कि पाकिस्तान में राजनीति ने खेलों पर कितना कब्जा कर लिया है। पीसीबी संवैधानिक तौर पर इतना कमजोर है कि क्रिकेट की सेहत को मजबूत करने की उसमें ताकत ही नहीं है। वह राजनीति को क्रिकेट से अलग नहीं रख पा रहा। ये बात भी उतनी ही सही है कि जब पीसीबी का चेयरमैन मोहसिन नकवी खुद पाकिस्तान का एक मंत्री है, तो क्रिकेट और राजनीति अलग कैसे रह सकते हैं।
मोहसिन नकवी पाकिस्तान के लॉ एंड ऑर्डर के लिए ज़िम्मेदार मंत्री हैं। PCB चीफ के तौर पर क्रिकेट से जुड़े फैसले लेने की उन पर जिम्मेदारी है। ऐसे में क्रिकेट पर फैसला स्वतंत्र रूप से कैसे लिया जा सकता है।
दूसरी तरह क्रिकेट के प्रशंसकों को इस बात पर गुस्सा आ रहा है कि राजनीति की वजह से शहबाज सरकार भारत से क्रिकेट खेलने को लेकर आईसीसी से सौदेबाजी कर रही है। लोगों के गुस्से को सरकार भी महसूस कर रही है।
एक सीनियर पाकिस्तानी सरकारी सूत्र के हवाले से सीएनएन न्यूज18 ने कहा, “कैबिनेट में चर्चा क्रिकेट के बारे में नहीं है। यह एक ऐसी सरकार की बैठक है, जो जनता के गुस्से को झेलने से बचने के लिए बहाने सोच रही है।” ये गुस्सा सिर्फ क्रिकेट को लेकर नहीं है। पाकिस्तानी सरकार अपने देश में ही घिर गई है। देश में महँगाई और बेरोजगारी चरम पर है। सेना सरकार पर हावी है और हर तरफ फौज के खिलाफ जनता सड़कों पर दिखाई दे रही है। बलुचिस्तान से लेकर खैबर पख्तूनख्वाँ में जनता विद्रोह कर चुकी है और पाकिस्तानी फौजियों को पीट रही है।
ऐसे में जनता का ध्यान भटकाने के लिए क्रिकेट का मुद्दा सरकार के हाथ में आया है। भारत के साथ मैच अब पाकिस्तानियों के सेंटिमेंट से जुड़ा मुद्दा है। भारत के साथ मैच को मुद्दा बना कर शहबाज शरीफ सरकार राजनीतिक फायदा उठाने में लगी है और पीसीबी आर्थिक हालत को सुधारने में। इसलिए पाकिस्तान मैच खेलने को लेकर बारगेन कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक वसूली की जा सके।
कैसे शुरू हुआ था ड्रामा
ICC T20 वर्ल्ड कप में ग्रुप A का मैच 15 फरवरी को कोलंबो में भारत बनाम पाकिस्तान है। टूर्नामेंट का सबसे बड़ा माना जाने वाला ये मैच पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB), इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) और पाकिस्तान की सियासत के बीच फँस गई है।
पाकिस्तान ने सबसे पहले क्रिकेट की दुनिया को यह ऐलान करके चौंका दिया कि वह भारत के मैच का बॉयकॉट करेगा, जबकि उसकी टीम टूर्नामेंट में बनी हुई है। सोशल मीडिया पर पाकिस्तान सरकार का रुख सामने आया, इसमें कहा गया कि टीम भारत के खिलाफ पाकिस्तान की टीम ‘मैदान में नहीं उतरेगी।’ यह कदम बांग्लादेश के साथ ‘एकजुटता’ दिखाने के लिए किया गया था, क्योंकि बांग्लादेश की टीम को आईसीसी ने टूर्नामेंट से बाहर कर दिया था। दरअसल बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने भारत में मैच नहीं खेलने की बात कही थी और इसके लिए सुरक्षा का हवाला दिया था, जिसे आईसीसी ने रिजेक्ट कर दिया।


