भारत और UAE के बीच हुआ नया ऊर्जा समझौता सिर्फ एक कारोबारी डील नहीं, बल्कि आने वाले समय में भारत की एनर्जी सिक्योरिटी को मजबूत करने वाला बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की UAE यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच यह समझौता हुआ, जिसके तहत UAE की सरकारी तेल कंपनी ADNOC भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में 30 मिलियन बैरल तक कच्चा तेल स्टोर करेगी।
इस समझौते का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अगर दुनिया में युद्ध, तनाव या सप्लाई संकट पैदा हो जाए, तब भी भारत के पास तेल का पर्याप्त बैकअप मौजूद रहे।
क्या है पूरा समझौता?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अगर किसी वजह से तेल की सप्लाई रुक जाए तो देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। इसी खतरे को कम करने के लिए भारत ने जमीन के नीचे बड़े-बड़े तेल भंडार यानी स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बनाए हैं।
अब UAE की कंपनी ADNOC भारत के इन रिजर्व में अपना तेल रखेगी। यह स्टोरेज मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम और कर्नाटक के पादुर व मैंगलोर जैसे केंद्रों में होगा। भविष्य में ओडिशा के चाँदी खोल प्रोजेक्ट में भी UAE की भागीदारी हो सकती है।
इस समझौते के तहत सिर्फ कच्चे तेल पर ही नहीं, बल्कि LPG और LNG स्टोरेज को लेकर भी सहयोग बढ़ाने की बात हुई है। दोनों देशों ने लंबे समय तक LPG सप्लाई जारी रखने को लेकर भी करार किया है।
स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व क्या होता है?
आसान भाषा में समझें तो स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व यानी आपातकालीन तेल भंडार। जिस तरह घरों में लोग मुश्किल समय के लिए राशन जमा करके रखते हैं, उसी तरह देश भी संकट के वक्त इस्तेमाल के लिए तेल जमा करके रखते हैं।
अगर युद्ध हो जाए, समुद्री रास्ते बंद हो जाएँ या अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की भारी कमी आ जाए, तब यही रिजर्व देश की जरूरतें पूरी करते हैं। भारत के पास फिलहाल करीब 5.3 मिलियन टन का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व है, जो विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में मौजूद है।
अब UAE के 30 मिलियन बैरल तेल स्टोर होने से यह क्षमता करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। सरकार पहले ही ओडिशा के चाँदी खोल और पादुर में नए रिजर्व बनाने की मंजूरी दे चुकी है। यानी आने वाले सालों में भारत का तेल बैकअप और मजबूत होने वाला है।
भारत को इससे क्या फायदा होगा?
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा। अगर पश्चिम एशिया में युद्ध या तनाव बढ़ता है और तेल सप्लाई प्रभावित होती है, तब भी भारत के पास पहले से जमा तेल मौजूद रहेगा। इससे देश में पेट्रोल-डीजल की भारी कमी या कीमतों में अचानक उछाल जैसी स्थिति को काफी हद तक रोका जा सकेगा।
दूसरा बड़ा फायदा यह है कि भारत को तेल की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित होगी। UAE पहले से भारत के सबसे बड़े तेल सप्लायर देशों में शामिल है। अब भारत की जमीन पर ही उसका तेल स्टोर होने से सप्लाई और ज्यादा भरोसेमंद हो जाएगी।
तीसरा फायदा रणनीतिक स्तर पर है। अगर किसी संकट के दौरान पड़ोसी देशों को मदद की जरूरत पड़े, तो भारत उनके लिए भी सप्लाई सपोर्ट देने की स्थिति में आ सकता है। इससे क्षेत्र में भारत की ताकत और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे।
होर्मुज संकट के बीच भारत के लिए राहत
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे तनाव की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर खतरा बना हुआ है। दुनिया का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से तेल सप्लाई करता है। अगर यहाँ संकट बढ़ता है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
इसी खतरे को देखते हुए UAE ने फुजैराह तक अपनी नई पाइपलाइन परियोजना को तेजी से पूरा करने का फैसला किया है ताकि तेल निर्यात के लिए होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके।
भारत के लिए राहत की बात यह है कि अब उसका बड़ा तेल स्टॉक पहले से ही देश के भीतर मौजूद रहेगा। यानी समुद्री रास्ते प्रभावित होने पर भी भारत के पास बैकअप तैयार रहेगा।
सिर्फ तेल नहीं, निवेश और रक्षा साझेदारी भी मजबूत
पीएम मोदी और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मुलाकात में सिर्फ ऊर्जा सहयोग ही नहीं, बल्कि रक्षा, निवेश, टेक्नोलॉजी और व्यापार को लेकर भी कई अहम समझौते हुए।
UAE ने भारत में 5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। इसमें बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंस सेक्टर में बड़े निवेश शामिल हैं। इसके अलावा दोनों देशों ने रक्षा सहयोग, साइबर सिक्योरिटी और समुद्री सुरक्षा बढ़ाने पर भी सहमति जताई।


