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‘गैर-मुस्लिमों को अल्लाह शब्द के इस्तेमाल की इजाजत नहीं, किसी ईश्वर की तुलना अल्लाह से नहीं हो सकती’: अदालत में सुनवाई

सुल्तान शरफुद्दीन इदरीस शाह ने कहा कि 'अल्लाह' शब्द मुस्लिमों के लिए पवित्र है और कोई इसका दुरुपयोग नहीं कर सकता - अपने इस स्टैंड पर वो कायम हैं। उनके राज्य ने एक फतवा जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अल्लाह की तुलना किसी भी दूसरे मजहब/समुदाय के ईश्वर या देवी-देवता से नहीं की जा सकती है।

मलेशिया में इस बात पर बहस चल रही है कि क्या ‘अल्लाह’ शब्द की पवित्रता को बचाए रखने के लिए नॉन-मुस्लिमों द्वारा इसके प्रयोग पर पूर्ण पाबंदी लगा दी जाए? वहाँ की अदालत में इसी तरह का मामला चल रहा है, जिस पर मलेशिया के 13 राज्यों में से एक सेलंगोर के सुल्तान शरफुद्दीन इदरीस शाह ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने ‘अल्लाह’ शब्द को लेकर हाईकोर्ट द्वारा नॉन-मुस्लिमों पर प्रतिबंध न लगाए जाने पर आपत्ति जताई।

शरफुद्दीन ने ‘सेलंगोर इस्लामी रिलीजियस काउंसिल’ से कहा है कि वो इस मामले में हाईकोर्ट में हस्तक्षेप करे। उन्होंने कहा कि ‘अल्लाह’ शब्द मुस्लिमों के लिए पवित्र है और कोई इसका दुरुपयोग नहीं कर सकता – अपने इस स्टैंड पर वो कायम हैं। उनके राज्य ने 2010 में एक फतवा जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि अल्लाह की तुलना किसी भी दूसरे मजहब/समुदाय के ईश्वर या देवी-देवता से नहीं की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि अगर वो इस्लाम की पवित्रता और ‘अल्लाह’ शब्द के सम्मान को बरक़रार रखने में कामयाब नहीं होते हैं तो फिर सेलंगोर में उनके इस्लाम का मुखिया होने का औचित्य ही क्या रह जाता है? उन्होंने कहा कि लोगों को न सिर्फ एक-दूसरे के मजहबों का सम्मान करना चाहिए, बल्कि किसी अन्य मजहब के संवेदनशील मुद्दों को छूने से भी बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में सांप्रदायिक एकता पर दुष्प्रभाव पड़ेगा।

साथ ही उन्होंने चेताया कि जब मुस्लिम अन्य मजहबों में हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं तो अन्य मजहब वाले भी मुस्लिमों और इस्लाम की इज्जत करें, खासकर ‘अल्लाह’ शब्द का सम्मान करें। मलेशिया में दिसंबर 5, 1986 को गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया था कि ‘अल्लाह, बैतुल्लाह और सोलत’ – ये तीन शब्द नॉन-मुस्लिमों की जुबान पर नहीं आने चाहिए। हाईकोर्ट ने इसे अवैध और असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया।

अब फिर सरकार ने अदालती आदेश के खिलाफ अपील दायर की है। जोहोर के सुल्तान इब्राहिम इस्कंदर ने भी इसके खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शरफुद्दीन ने सभी राज्यों को ऐसा ही करने को कहा है। सरकारी आदेश को रद्द करने का आदेश जज नूर बी आरिफ़िन ने दिया था। अब मलेशिया के दो इस्लामी संस्थाओं को सुनवाई में पार्टी बनाया गया है, जिनके मौलाना कोर्ट में अपना पक्ष रखेंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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