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भाई, बीवी, बहन, बहनोई, भांजा, भतीजा… आतंकी सरगना मसूद अजहर के खानदान का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने निकाल दिया जनाजा, 14 लाशें देख बोला- अच्छा होता मैं भी मर जाता

मसूद की बड़ी बहन, बहनोई और 4 करीबी सहयोगियों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं मारे गए लोगों में मौलाना काशिफ, उसका परिवार, मौलाना अब्दुल रऊफ की बड़ी बेटी, पोते और चार बच्चे शामिल हैं।

पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया गया, धर्म पूछ-पूछकर मारा गया। उसके बाद भारत की ओर से जवाबी कार्रवाई की गई। भारतीय वायुसेना द्वारा बुधवार (7 मई, 2025) की रात पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ तहत 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस हमले में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मौलाना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य भी मारे गए।

इनमें मसूद की बड़ी बहन, बहनोई और 4 करीबी सहयोगियों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं मारे गए लोगों में मौलाना काशिफ, उसका परिवार, मौलाना अब्दुल रऊफ की बड़ी बेटी, पोते और चार बच्चे शामिल हैं। पहलगाम हमले में 26 लोगों के नरसंहार के बाद से ही लगातार आवाज़ उठ रही थी कि भारत जवाबी कार्रवाई करे और आतंक का पोषण करने वाले पाकिस्तान को सबक सिखाए। इस हमले की जिम्मेदारी ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, जिसे लश्कर-ए-तैय्यबा का सहयोगी संगठन माना जाता है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय वायुसेना ने 23 मिनट तक चले हमले में पाकिस्तान के बहावलपुर और अन्य क्षेत्रों में स्थित 9 आतंकी ठिकानों पर 24 मिसाइलें दागीं। इन हमलों में जैश-ए-मोहम्मद के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें मसूद अज़हर के परिवार के सदस्य भी मारे गए।

इसके बाद उसने कहा, “अच्छा होता कि मैं भी मर जाता।” हालाँकि, पाकिस्तान सरकार ने इन हमलों में नागरिकों के मारे जाने का दावा किया है और भारतीय कार्रवाई को ‘युद्ध की कार्यवाही’ बताया है। जहाँ तक मसूद अजहर की बात है, वो जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख है और भारत में कई बड़े आतंकी हमलों में शामिल रहा हैं।

मसूद अजहर की भूमिका 2001 के संसद हमले, से लेकर 2016 के पठानकोट हमले और 2019 के पुलवामा हमले में स्पष्ट रूप से सामने आई है।

2001 संसद हमला

13 दिसंबर, 2001 को भारतीय संसद पर हुए आतंकी हमले में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैय्यबा के आतंकवादी शामिल थे। इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया। मसूद अजहर को पाकिस्तान में हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसे कभी औपचारिक रूप से आरोपित नहीं किया गया और बाद में रिहा कर दिया गया। 

2016 पठानकोट हमला

जनवरी 2016 में, पठानकोट एयरबेस पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने हमला किया, जिसमें 7 सुरक्षाकर्मी बलिदान हुए। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मसूद अजहर, उनके भाई रऊफ असगर और दो अन्य को इस हमले की साजिश रचने के आरोप में चार्जशीट में नामित किया। चार आतंकवादी, जो हमले में मारे गए, पाकिस्तान में जैश के शिविरों में प्रशिक्षित थे। 

2019 पुलवामा हमला

14 फरवरी, 2019 को पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमले में 40 जवान बलिदान हुए। NIA ने मसूद अजहर, उनके भाई रऊफ असगर, भतीजे उमर फारूक और अन्य को इस हमले की साजिश में शामिल पाया। चार्जशीट में बताया गया कि हमले की योजना 2016 से बन रही थी, और इसमें पाकिस्तान की भूमिका स्पष्ट थी। उमर फारूक, जो हमले का मास्टरमाइंड था, 2018 में भारत में घुसपैठ कर चुका था और बाद में मुठभेड़ में मारा गया। 

1994 में मसूद अजहर को भारत ने श्रीनगर से गिरफ्तार किया था। उसे रिहा कराने के लिए जैश ने दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 को कंधार में हाईजैक कर लिया गया था। भारत सरकार को यात्रियों की सुरक्षा के बदले मसूद अजहर को रिहा करना पड़ा, जिसके बाद वह पाकिस्तान लौट गया और जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की।

मसूद अजहर भारत में कई बड़े आतंकी हमलों के पीछे मुख्य साजिशकर्ता रहा हैं। उसकी भूमिका विशेष रूप से 2001, 2016 और 2019 के आतंकी हमलों में स्पष्ट रूप से सामने आई है। हालाँकि, 2008 के मुंबई हमले में उसकी सीधी संलिप्तता के प्रमाण नहीं हैं। उसकी गतिविधियों के कारण, संयुक्त राष्ट्र ने उसे 2019 में वैश्विक आतंकवादी घोषित किया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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