Thursday, July 18, 2024
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आजादी के बाद PAK की राजधानी इस्लामाबाद में 20,000 वर्गफुट में बनेगा पहला कृष्ण मंदिर, सरकार देगी ₹10 करोड़

लाल चंद मल्ही ने मंदिर की आधारशिला रखते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में राजधानी में हिंदू आबादी बढ़ी है, जिससे उनके पूजा करने के लिए मंदिर बनाना महत्वपूर्ण हो गया है। इस्लामाबाद में हिंदू समुदाय लंबे समय से मंदिर बनाने की माँग कर रहा है। यहाँ कई हिंदू मंदिर खंडहर की हालत में हैं। इसके अलावा इस्लामाबाद में कोई श्मशान घाट नहीं है।

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिंदुओं के लिए पहला मंदिर बनने जा रहा है। इसकी आधारशिला मंगलवार को रख दी गई। इस मंदिर को इस्लामाबाद के H-9 इलाके में 20 हजार वर्गफुट क्षेत्र में बनाया जाएगा। इसका नाम श्री कृष्ण मंदिर होगा। इसे बनाने में लगभग 10 करोड़ रुपयों का खर्चा आएगा। ये सभी खर्चा इमरान सरकार उठाएगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल में इस्लामाबाद के एच-9 सेक्टर क्षेत्र में एक सादा समारोह आयोजित किया गया था। इस समारोह में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर पहले हिंदू मंदिर को बनाने के लिए चार कनाल भूमि आवंटित की गई। इस समारोह को आयोजित करने वाले मानवाधिकार मामलों के संसदीय सचिव लाल चंद मल्ही थे।

लाल चंद मल्ही ने मंदिर की आधारशिला रखते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में राजधानी में हिंदू आबादी काफी बढ़ी है, जिससे उनके पूजा करने के लिए मंदिर बनाना महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा, इस्लामाबाद में हिंदू समुदाय लंबे समय से मंदिर बनाने की माँग कर रहा है। यहाँ कई हिंदू मंदिर खंडहर की हालत में हैं। इसके अलावा इस्लामाबाद में कोई श्मशान घाट नहीं है।

मल्ही ने आयोजन में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए बताया कि साल 1947 से पहले इस्‍लामाबाद और उससे सटे हुए इलाकों में कई हिंदू मंदिर थे। इसमें सैदपुर गाँव और रावल झील के पास स्थित मंदिर शामिल है।

हालाँकि, बाद में उन्‍हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया और कभी इस्‍तेमाल नहीं किया गया। उन्‍होंने इस बात पर भी दुख जताया कि इस्‍लामाबाद में अल्‍पसंख्‍यकों के अंतिम संस्‍कार के लिए जगह बहुत कम है।

वहीं, धार्मिक मामलों के मंत्री पीर नूरुल हक कादरी ने भी इसका ऐलान किया कि सरकार इस मंदिर के निर्माण पर आने वाला 10 करोड़ रुपए का खर्च वहन करेगी।

उन्‍होंने कहा कि मंदिर के लिए व‍िशेष सहायता देने की अपील प्रधानमंत्री इमरान खान से की गई है। इस्‍लामाबाद हिंदू पंचायत ने इस मंदिर का नाम श्रीकृष्‍ण मंदिर रखा है। इस मंदिर के लिए वर्ष 2017 में जमीन दी गई थी।

बता दें, इस मंदिर को लेकर माँग बहुत समय से की जा रही थी। लेकिन कुछ औपचारिकताओं, जैसे मंदिर निर्माण की मंजूरी मिलने के बाद सीडीए और अन्य अधिकारियों द्वारा साइट मानचित्र की मंजूरी आदि के कारण ये मामला 3 साल लटक गया।

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो इस मंदिर परिसर में एक अंतिम संस्कार स्थल भी होगा और अन्य हिंदू मान्यताओं के लिए अलग जगह बनाई जाएगी।

ध्यान रहे कि एक ओर जहाँ पाकिस्तान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पाकिस्‍तान अल्‍पसंख्‍यकों के लिए नरक बन चुका है और यहाँ आए दिन हिंदू समुदाय की बच्चियों का अपहरण करके उन्‍हें इस्लाम कबूलने पर मजबूर किया जाता है।

वहीं मंदिर निर्माण की खबर उस समय सामने आई है जब पाकिस्तान सरकार भारत की आलोचना करके ये जाहिर करने की कोशिश करती रही है कि भारत में समुदाय विशेष के लिए मस्जिदों के दरवाजें बंद हो रहे हैं और मस्जिदों की जगहों पर हिंदू मंदिर बनाने की बात हो रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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