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पाकिस्तान में रमजान के पहले दिन गैस सप्लाई बंद: कोयले पर बना खाना, कराची में चूल्हों से सिर्फ दुर्गंध निकली

कराची की रहने वाली सबा नावेद का कहना है कि उनके यहाँ 4 महीनों से गैस की सप्लाई नहीं हो रही है। चूल्हा जलाने की कोशिश करने पर गैस की जगह सिर्फ दुर्गंध आती है।

इस्लामी मुल्क पाकिस्तान की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है। बढ़ती महंगाई और बिजली संकट के बाद पाकिस्तानियों को गैस की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। प्राकृतिक गैस की कमी से कराची, क्वेटा और रावलपिंडी जैसे प्रमुख शहरों के लोग परेशान हैं। रमजान के पहले ही दिन गैस की किल्लत झेल रहे लोगों का चूल्हा नहीं जल सका।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों की मानें तो कराची समेत पाकिस्तान के प्रमुख शहरों में कई महीनों से गैस की सप्लाई प्रभावित है। ऐसे में रमजान का चाँद नजर आने के बाद लोगों के घरों में होने वाली गैस की सप्लाई बंद हो गई। सप्लाई में कमी के बाद लोगों ने इसकी शिकायत सरकार से की थी। सरकार की तरफ से भरोसा दिलाया गया था कि सहरी और इफ्तार से पहले उपभोक्ताओं के लिए गैस उपलब्ध होगी।

रमजान के पहले दिन पड़ोसी मुल्क के प्रमुख शहरों में उपभोक्ताओं ने दिन भर गैस सप्लाई बंद रहने और कम गैस प्रेशर की शिकायत की। पाकिस्तान में प्राकृतिक गैस की सप्लाई करने वाली सुई साउदर्न गैस कंपनी (Sui Southern Gas Company) ने गैस प्रोफाइलिंग (गैस सप्लाई करने का समय) निर्धारित किया था। कंपनी ने उपभोक्ताओं से सहरी और इफ्तारी के लिए गैस सप्लाई का वादा किया था।

SSGC की तरफ से कहा जा रहा है कि देश के गैस भंडार में भारी कमी की वजह से सप्लाई प्रभावित हो रही है। इसलिए बेहतर गैस दबाव के लिए कई घंटों तक सप्लाई रोकनी पड़ेगी। कराची की रहने वाली सबा नावेद का कहना है कि उनके यहाँ 4 महीनों से गैस की सप्लाई नहीं हो रही है। चूल्हा जलाने की कोशिश करने पर गैस की जगह सिर्फ दुर्गंध आती है। खाना बनाने के लिए परिवार 2.5 किलोग्राम का सिलेंडर इस्तेमाल कर रहा है। इसे भराने में 600 रुपए खर्च होते हैं। महीने में 2 बार इसे भराना पड़ता है।

इसी तरह रावलपिंडी में भी गैस सप्लाई न हो पाने के कारण लोग कोयले पर खाना बनाने को मजबूर हैं। क्वेटा के लोगों ने स्थानीय मीडिया को बताया कि गैस की सप्लाई न होने के कारण सेहरी के लिए कुछ पका नहीं सके। परेशान लोगों का कहना है कि लगातार शिकायत के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। वहीं एसएसजीसी कंपनी की तरफ से कहा गया है कि एक ही वक्त पर लाखों स्टोव जलाए जाने की वजह से प्रेशर का कम होना स्वभाविक है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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