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सऊदी अरब में 3 पाकिस्तानी सहित 12 को सजा-ए-मौत, तलवार से काटा: रिपोर्ट, प्रिंस सलमान ने किया था रोक का वादा

जिन 12 लोगों को मौत की सजा दी गई है उन्हें नशीली दवा रखने/ तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों के पास जो दवाएँ प्राप्त हुईं थीं वे हाई-लेवल ड्रग्स की श्रेणी में शामिल नहीं हैं। इसके बाद भी इन लोगों का गला काट दिया गया है।

इस्लामिक देश सऊदी अरब में 12 लोगों को मौत की सजा दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार 10 दिन के भीतर इनलोगों को सजा मिली है। तलवार से इनका गला काटा गया है। इसने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से किए गए वादे की भी पोल खोल दी है।

सलमान ने अहिसंक अपराधों पर मौत की सजा पर रोक लगाने की बात कही थी। लेकिन जिन लोगों को मृत्युदंड दिया गया है उन पर नशीली दवाओं से जुड़े अपराध में शामिल होने के आरोप थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीते जिन 12 लोगों को मौत की सजा दी गई है उन्हें नशीली दवा रखने/ तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन लोगों के पास जो दवाएँ प्राप्त हुईं थीं वे हाई-लेवल ड्रग्स की श्रेणी में शामिल नहीं हैं। इसके बाद भी इन लोगों का गला काट दिया गया है। सऊदी अरब सरकार ने शरिया कानून के तहत तलवार से जिन लोगों का गला काटा है उनमें 3 पाकिस्तानी, 4 सीरियाई, सऊदी अरब के 3 और जॉर्डन के 2 नागरिक शामिल हैं।

बता दें कि सऊदी सरकार ने इसी साल मार्च में 81 लोगों को मौत की सजा दी थी। उस समय जिन 81 लोगों को सजा दी गई थी, उनमें 73 सऊदी, 7 यमन और 1 सीरियाई व्यक्ति था। इन लोगों पर बलात्कार, बच्चों के अपहरण, हत्या, हथियारों की तस्करी और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे। साथ ही कुछ लोग अलकायदा और ISIS जैसे इस्लामिक आतंकी संगठनों से जुड़े हुए थे।

सऊदी अरब में इस साल अब तक कुल मिलाकर 132 लोगों को मौत की सजा दी गई है, जो कि पिछले साल के मुकाबले कहीं ज्यादा है। साल 2021 में सऊदी सरकार ने 69 लोगों को मौत की सजा दी थी। वहीं, 2019 में 187 लोगों को यह सजा सुनाई गई थी।

गौरतलब है कि साल 2018 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने कहा था कि प्रशासन ने मौत की सजा को कम करने की कोशिश की है। सिर्फ हत्या या हत्या के दोषी पाए गए लोगों को ही मृत्युदंड दिया जा रहा है। साथ ही उन्होंने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि सऊदी अरब में कानून के हिसाब से ही फैसले होते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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