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रूसी तेल से नहीं झुलसे हैं ट्रंप, चाहते थे नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट करे भारत: इनकार से बन गए खिसियानी बिल्ली

जून की फोन कॉल के कुछ हफ्तों बाद बातचीत के बीच ही ट्रंप ने अचानक भारत पर 25% टैरिफ लगाने का एलान कर दिया था। इसके कुछ दिनों यह बढ़ाकर 50% कर दिया गया था।

अमेरिका और भारत के रिश्तों में पिछले कुछ हफ्तों में खटास देखने को मिली है। इसकी बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए बेतुके टैरिफ हैं। ट्रंप दावा कर रहे हैं कि भारत पर 50% फीसदी टैरिफ लगाने की वजह भारत द्वारा रूसी तेल खरीदा जाना है।

हालाँकि, रूसी तेल खरीदने और व्यापार को लेकर चीन पर टैरिफ ना लगाए जाने के बाद उन पर बार-बार सवाल उठ रहे थे। इसके अलावा वो लगातार यह दावा भी कर रहे हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच उन्होंने सीजफायर कराया है। अब न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में ट्रंप के भड़के होने का राज खुला है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के रिश्तों में आई खटास की बड़ी वजह रूसी तेल नहीं बल्कि भारत का ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित ना करना है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने जब भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम की बात कही थी तो उसके बाद पाकिस्तान ने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित कर दिया था। पाकिस्तान की फौज के मुखिया आसिम मुनीर की व्हाइट हाउस में ट्रंप से मुलाकात हुई थी और इसके कुछ दिनों बाद ही पाकिस्तान ने औपचारिक रूप से ट्रंप को 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया था।

रिपोर्ट में क्या है दावा?

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पीएम मोदी से भी ट्रंप यही चाहते थे। रिपोर्ट में कहा गया है, “17 जून को हुई एक फोन कॉल में ट्रंप ने फिर वही बात (भारत-पाकिस्तान सीजफायर) छेड़ दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने सैन्य तनाव को खत्म कर दिया है।”

रिपोर्ट कहती है, “उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि पाकिस्तान उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने जा रहा है। कॉल से वाकिफ लोगों के अनुसार, इस बातचीत का सीधा-सा संकेत यह था कि मोदी को भी वही करना चाहिए।”

रिपोर्ट में लिखा है, “मोदी यह सुनकर तिलमिला गए। उन्होंने ट्रंप से साफ कह दिया कि हालिया युद्धविराम में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी। यह फैसला सीधे भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था। ट्रंप ने मोदी की इस बात को ज्यादा तवज्जो नहीं दी लेकिन यह असहमति और नोबेल के मुद्दे पर मोदी का इनकार दोनों नेताओं के रिश्ते में आई खटास का बड़ा कारण बना था।”

न्यूयॉर्क टाइम्स का दावा है कि उसकी रिपोर्ट वॉशिंगटन और दिल्ली के दर्जन भर से ज्यादा लोगों से हुई बातचीत पर आधारित है। इनमें से ज्यादातर ने गोपनीयता की शर्त पर बात की क्योंकि दोनों देशों के रिश्तों का असर बहुत दूरगामी है।

भारत ने अमेरिकी मध्यस्थता की बात को किया है खारिज

जून की उस फोन कॉल के कुछ हफ्तों बाद बातचीत के बीच ही ट्रंप ने अचानक भारत पर 25% टैरिफ लगाने का एलान कर दिया था। इसके कुछ दिनों यह बढ़ाकर 50% कर दिया गया था।

ट्रंप दरअसल दावा करते हैं कि उन्होंने व्यापार की धमकी देकर इस युद्ध को रुकवाया था। जाहिर है कि अगर ट्रंप की बात में दम होता और भारत ने उनकी बात ही सुनी होती तो आज भारत पर इतना टैरिफ ना लग रहा होता।

भारत ने हमेशा से यह स्पष्ट किया है कि भारत-पाकिस्तान के बीच किसी तीसरे देश की मध्यस्थता उसे स्वीकार नहीं है। विदेश मंत्री एस जयशंकर और सैन्य अधिकारी भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि संघर्ष विराम के लिए पाकिस्तान के DGMO द्वारा भारत के DGMO से अनुरोध किया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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