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बांग्लादेश में हिंसा करते रहे इस्लामी कट्टरपंथी, UN ने बाँध रखे थे फौज के हाथ: जानिए एक्शन में आते ही कैसे रुक जाती सालाना ₹2600 करोड़ की फंडिंग

बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र के शान्ति मिशन में बड़ी संख्या में सैनिक भेजता है। वर्तमान में बांग्लादेश ने लगभग 5000 सैनिक UN मिशन में भेजे हुए हैं। UN मिशन में गए सैनिकों को औसत तनख्वाह से अधिक पैसा मिलता है और फ़ौज को भी इससे कमाई होती है।

बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट करने में बड़ा हाथ संयुक्त राष्ट्र (UN) था। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNCHR) के कमिश्नर ने खुद यह बात कबूली है। उन्होंने एक इंटरव्यू में यह बात स्वीकार की है कि उन्होंने बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों के प्रदर्शन के दौरान फ़ौज के हाथ बाँध दिए थे।

BBC के साथ एक इंटरव्यू में हाई कमिश्नर वोल्कर तुर्क ने यह बातें कहीं हैं। उन्होंने कहा है कि UN ने फ़ौज को ISIS, अल कायदा और हरकत उल अंसार जैसे इस्लामी कट्टरपंथियों पर एक्शन लेने से मना किया था। उन्होंने बांग्लादेशी फ़ौज को धमकाया भी था।

क्या कहा वोल्कर तुर्क ने?

5 मार्च, 2025 को BBC के हार्डटॉक कार्यक्रम में तुर्क से गाजा, सूडान, यूक्रेन समेत बाकी इलाकों पर बात की। इस दौरान BBC ने कहा कि इन सभी इलाकों में UN एकदम निष्प्रभावी रहा है। तुर्क ने इसके बाद बांग्लादेश का उदाहरण दिया।

वोल्कर तुर्क ने कहा, “मैं आपको पिछले साल बांग्लादेश का उदाहरण दे रहा हूँ। जुलाई-अगस्त के दौरान, छात्रों द्वारा वहाँ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था। वह शेख हसीना सरकार से तंग आ चुके थे, वहाँ बड़े पैमाने पर दमन हो रहा था।”

उन्होंने आगे कहा, “उनके लिए (प्रदर्शनकारियों) सबसे बड़ी उम्मीद वास्तव में हमारी आवाज़, मेरी आवाज़ और हम जो कर पाए, वह थी। हमने स्थिति पर ध्यान दिया और फ़ौज को चेतावनी दी कि अगर उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोका, तो उन्हें शांति अभियानों में सैनिक नहीं भेजने दिए जाएँगे। इसके बाद फ़ौज के रुख में बदलाव आया।”

क्यों UN की धमकी से डरी बांग्लादेशी फ़ौज

गौरतलब है कि बांग्लादेश संयुक्त राष्ट्र के शान्ति मिशन में बड़ी संख्या में सैनिक भेजता है। वर्तमान में बांग्लादेश ने लगभग 5000 सैनिक UN मिशन में भेजे हुए हैं। UN मिशन में गए सैनिकों को औसत तनख्वाह से अधिक पैसा मिलता है और फ़ौज को भी इससे कमाई होती है।

बांग्लादेश को शान्ति मिशन से हर साल लगभग ₹2600 करोड़ की कमाई होती है। इनमें से आधा ही वह अपने सैनिकों को देता है। बाकी पैसा फ़ौज के हिस्से जाता है। इससे उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी बड़ी जगह मिलती है।

ऐसे में UN की यह धमकी फ़ौज पर काम कर गई और उन्होंने अंत समय में शेख हसीना के आदेश मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद शेख हसीना को देश छोड़ना पड़ा और दंगाइयों ने हिंसा जारी रखी। मोहम्मद यूनुस ने इसके बाद सत्ता पर कब्जा कर लिया था।

यूनुस और UN किस तरह आपस में मिले हुए थे, इसकी सच्चाई भी तुर्क ने बता दी। उन्होंने बताया कि मोहम्मद यूनुस ने सत्ता संभालते ही UN से एक जाँच कमिशन बनवाया। इसके लिए उन्होंने तुर्क से सम्पर्क किया। तुर्क ने बताया कि उन्होंने यूनुस की पूरी मदद की।

उन्होंने यह भी बताया कि मोहम्मद यूनुस ने तुर्क से फ़ौज पर नियंत्रण करने को कहा था। UN अब शेख हसीना के शासन के दौरान हुए कथित दमन को लेकर रिपोर्ट तैयार कर रहा है। वहीं अभी तक UN की तरफ से यह नहीं पूछा गया हैकि बांग्लादेश में यूनुस किस हैसियत से सत्ता पर काबिज हैं।

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अर्पित त्रिपाठी
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