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कुरान जलाने की घटना से स्वीडन पर भड़की यमन सरकार, स्वीडिश आयात पर प्रतिबंध लगाया: हूती विद्रोहियों ने कहा- बाकी इस्लामी देश भी ऐसा करें

बताते चलें कि इस साल बकरीद के दिन स्वीडन शहर के स्टॉकहोम में स्थित सबसे बड़ी मस्जिद के सामने 37 वर्षीय सलवान मोमिका ने कुरान जलाया था। मोमिका इराक के रहने वाले हैं और कुछ साल पहले वे इराक के स्वीडन चले आए थे।

यूरोपीय देश स्वीडन में इराकी मूल के एक व्यक्ति द्वारा मस्जिद के सामने कुरान जलाने का दुनिया भर में विरोध हो रहा है। अब यमन के हूती विद्रोहियों ने स्वीडिश सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। हूती विद्रोहियों का यमन के उत्तरी हिस्से पर नियंत्रण है।

व्यापार मंत्री के हवाले से हूती द्वारा संचालित अल मसीरा टीवी ने कहा, “यमन पहला इस्लामी देश है, जिसने मुस्लिमों के सबसे पवित्र किताब के अपमान करने के बाद स्वीडिश वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाया है।”

मंत्री ने स्वीडिश आयात को सीमित बताया और कहा कि इस निर्णय का प्रतीकात्मक मूल्य है। उन्होंने कहा कि जब हूती इस तरह का कदम उठा सकता है तो इस्लामी देश भी उठा सकते हैं। उन्होंने अन्य इस्लामी देशों से ऐसा ही कदम उठाने का आह्वान किया।

हूती विद्रोहियों ने साल 2014 के अंत में सऊदी अरब समर्थित सरकार को सना से हटा दिया था। हुतियों का उत्तरी यमन में नियंत्रण है। हालाँकि, सऊदी अरब के तत्वाधान में गठित राजनीतिक नेतृत्व परिषद (Political Leadership Council) को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है। इसे पिछले साल गठित किया गया था।

बताते चलें कि इस साल बकरीद के दिन स्वीडन शहर के स्टॉकहोम में स्थित सबसे बड़ी मस्जिद के सामने 37 वर्षीय सलवान मोमिका ने कुरान जलाया था। मोमिका इराक के रहने वाले हैं और कुछ साल पहले वे इराक के स्वीडन चले आए थे।

मोमिका ने कुरान को जलाने से पहले उसे पैरों से कुचला, पन्ने फाड़े और फिर आग के हवाले कर दिया था। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। मोमिका ने इस प्रदर्शन को जल्दी ही दोहराने की बात कही है। उन्होंने कहा, “10 दिनों के भीतर मैं स्टॉकहोम में इराकी दूतावास के सामने इराकी झंडा और कुरान जलाऊँगा।”

मोमिका ने कुरान जलाकर प्रदर्शन की इजाजत स्वीडिश पुलिस से माँगी थी, लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और आखिरकार इसकी इजाजत मिली। उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत इसकी इजाजत दी गई थी।

इस घटना को लेकर इस्लामी देशों ने स्वीडन के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी। कई इस्लामी मुल्कों ने स्वीडन के राजदूत को तलब कर आपत्ति जाहिर की। वहीं, अंतरराष्ट्रीय इस्लामी संगठन (OIC) ने बैठक का आयोजन किया है।

वहीं, स्वीडन में स्टॉकहोम की मस्जिद के सामने बकरीद पर कुरान जलाने के एक सप्ताह बाद फिर से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर प्रदर्शन की अनुमति माँगी गई है। कथित फ्री-स्पीच कार्यकर्ताओं ने यहूदियों की धार्मिक पुस्तक टोरा और ईसाइयों की धार्मिक पुस्तक बाइबिल को को जलाने की अनुमति के लिए पुलिस के समक्ष तीन आवेदन दिए हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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