Homeरिपोर्टमीडिया'मुस्लिमों को खुलेआम कठमुल्ला बताया': CM योगी को बदनाम कर रहे थे अजीत अंजुम,...

‘मुस्लिमों को खुलेआम कठमुल्ला बताया’: CM योगी को बदनाम कर रहे थे अजीत अंजुम, ‘रेख़्ता’ दिखा कर लोगों ने खोल दी पोल

घूम-घूम कर भाजपा के खिलाफ प्रोपेगंडा फैला रहे अजीत अंजुम ने इसे ऐसे पेश किया, जैसे 'कठमुल्ला' कोई गाली हो और संपूर्ण मुस्लिम समुदाय के लिए इसका प्रयोग किया गया हो।

तथाकथित पत्रकार अजित अंजुम ने ‘कठमुल्ला’ शब्द के इस्तेमाल के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भला-बुरा कहा। दरअसल, ‘आज तक’ चैनल पर अंजना ओम कश्यप को दिए गए एक इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कहा, “महिलाओं के प्रति सम्मान का भाव व्यक्त करना अच्छी बात है। तीन तलाक के खिलाफ भारत का जो कानून बना है, उसका समर्थन करना चाहिए। हमने महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर देने के कई कार्य किए, लेकिन उसके रास्ते में देश का ‘कठमुल्लापन’ है, जिसका समर्थन ओवैसी जैसे लोग करते हैं।”

योगी आदित्यनाथ का असदुद्दीन ओवैसी जैसे इस्लामी कट्टरपंथी नेताओं और मौलानाओं की तरफ था, जो महिलाओं के आगे बढ़ने का विरोध करते हैं। ‘सरकास्टिक ह्यूमन’ नाम के ट्विटर हैंडल ने दावा किया कि भाजपा नेता ने मुस्लिमों के लिए ‘कठमुल्ला’ शब्द का प्रयोग किया है। अजीत अंजुम ने इस पर लिखा, “मुख्यमंत्री योगी के दिल में इतनी नफरत भरी है कि मुस्लिमों के लिए। खुलेआम ‘कठमुल्ला’ शब्द का प्रयोग कर रहे हैं। फिर ‘सबका साथ और सबका विश्वास’ जैसे पाखंड क्यों करते हैं योगी जी?

आजकल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की कवरेज के बहाने घूम-घूम कर भाजपा के खिलाफ प्रोपेगंडा फैला रहे अजीत अंजुम ने इसे ऐसे पेश किया, जैसे ‘कठमुल्ला’ कोई गाली हो और संपूर्ण मुस्लिम समुदाय के लिए इसका प्रयोग किया गया हो। लेकिन, ये दोनों ही बातें गलत हैं। लोगों ने अजीत अंजुम को उर्दू शब्द ‘कठमुल्ला’ का अर्थ समझा कर बता दिया। इसके लिए उर्दू की जानी-पहचानी वेबसाइट ‘रेख़्ता’ के जरिए लोगों ने उन्हें समझाया कि ये क्या होता है।

असल में ‘रेख़्ता’ की मानें तो ‘कठमुल्ला’ का अर्थ होता है वो मुल्ला, जो काठ के मनकों की माला फेरता हो। साथ ही इसका अर्थ ‘संकुचित विद्या का मालिक, हाथ-धर्म मौलवी, कट्टर मौलवी, मूर्ख, और कट्टर मुल्ला/मौलवी’ बताया गया है। ‘कठमुल्ला’ का अर्थ ‘दुराग्रही व्यक्ति’ या फिर ‘लाक्षणिक मूर्ख या नकली धर्म गुरु अथवा मौलवी’ भी लिखा हुआ है। मतलब साफ़ है कि इसका अर्थ जाने बिना ही अजीत अंजुम ने ‘खुलेआम सारे मुस्लिमों’ को ‘कठमुल्ला’ कहने का आरोप सीएम योगी पर मढ़ दिया।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -