Tuesday, March 31, 2026
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सपा की गोद में बैठी दैनिक भास्कर की ‘रशियन’ पत्रकारिता, अपने राजनीतिक आका को तेल लगाने के लिए खुद का न निकालो जनाजा

भास्कर ऐसा इसलिए भी करता है, ताकि वो विपक्ष की राजनीति के काम आ सके। यही कारण है कि उसकी इस घटिया पत्रकारिता को प्रोमोट करते हुए समाजवादी पार्टी ने उसे शेयर किया है।

आजकल मीडिया और राजनीति का गठजोड़ इतना घिनौना हो चुका है कि राष्ट्रीय स्तर के अखबार और कथित समाजवादी दल मिलकर समाज में विकृति फैला रहे हैं। दैनिक भास्कर जैसे बड़े न्यूजपेपर, जो कभी विश्वसनीयता का दावा करते थे, अब सनसनीखेज हेडलाइंस के जरिए क्लिकबेट और अश्लील इंसिनुएशन परोस रहे हैं। हालिया उदाहरण देखिए, दैनिक भास्कर की एक खबर का शीर्षक- “नेताजी रशियन के साथ मनाएँगे नया साल।”

यह शीर्षक उत्तर प्रदेश की राजनीति पर आधारित एक रिपोर्ट का हिस्सा है, जिसमें कुमार विश्वास की राज्यसभा सीट की महत्वाकांक्षा और अखिलेश यादव की पार्टी की आंतरिक कलह का जिक्र है। लेकिन भास्कर ने जानबूझकर ‘रशियन’ शब्द को ऐसे ट्विस्ट किया कि यह रूसी महिलाओं के प्रति एक घटिया, यौन संकेत देने वाला इंसिनुएशन बन गया।

दैनिक भास्कर की खबर का स्क्रीनशॉट (फोटो साभार: Bhaskar website)

यह कोई संयोग नहीं है। सस्ते कॉमेडियन ‘रशियन’ शब्द का स्टीरियोटाइप के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं और अब दैनिक भास्कर जैसे संस्थान अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए इसे मेनस्ट्रीम बनाना चाहते हैं। ‘रशियन’ शब्द का द्विअर्थी इस्तेमाल विदेशी महिलाओं खासकर रूसी महिलाओं को वेश्यावृत्ति या सस्ते मनोरंजन से जोड़ता है। भास्कर की हेडलाइन ने इस शीर्षक से ठीक यही काम किया और राजनीतिक खबर को अश्लील जोक में बदल दिया।

क्या यह पत्रकारिता है या कॉमेडी शो का सस्ता स्टंट? दैनिक भास्कर जैसे राष्ट्रीय अखबार का यह स्तर देखकर शर्म आती है। पाठकों को सूचना देने की बजाय, वे उनके मन में विकृति पैदा कर रहे हैं। महिलाओं का सम्मान तो दूर, एक पूरे देश रूस का अपमान कर रहे हैं। रूस भारत का पुराना मित्र है, जो हर संकट में साथ खड़ा रहा। लेकिन भास्कर के लिए यह सब TRP और क्लिक्स का खेल है।

और यह अकेला मामला नहीं है। भास्कर की ‘ये बात खरी है’ सीरीज पहले से ही विवादों में रही है, जहां तथ्यों को तोड़-मरोड़कर सनसनी पैदा की जाती है। अब वे कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता परोस रहे हैं। पहले स्टैंड-अप कॉमेडियन यह काम करते थे, अब कथित पत्रकार जोकर बनकर देश के मित्र राष्ट्र का मजाक उड़ा रहे हैं। क्या यही है जिम्मेदार पत्रकारिता?

राष्ट्रीय अखबार होने का मतलब यह थोड़े है कि आप समाज में जहर घोलें। भास्कर के संपादक और रिपोर्टर शायद भूल गए हैं कि उनका काम सूचना देना है, न कि पाठकों के दिमाग में गंदगी भरना। यह नारी सम्मान का अपमान है, रूसी महिलाओं की गरिमा का अपमान है और भारत-रूस मैत्री का अपमान है।

अब आते हैं समाजवादी पार्टी पर, जो इस घटिया खबर को लपककर अपनी गंदी राजनीति चमकाने में लग गई। सपा के मीडिया सेल ने भास्कर की इसी खबर को शेयर करते हुए लिखा, “भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगी दलों के नेताओं का चाल चरित्र चेहरा सबके सामने सार्वजनिक है। भाजपा नेताओं को रशियन चाहिए, ये भाजपाई कितने गंदे चाल चरित्र के हैं ये सब सबको दिखाई दे रहा है अब।”

वाह! क्या स्तर है समाजवादी पार्टी का। एक सनसनीखेज हेडलाइन को आधार बनाकर वे पूरे भाजपा और उसके सहयोगियों पर कीचड़ उछाल रहे हैं। लेकिन ये वही समाजवादी पार्टी है, जिसके संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने एक बार बलात्कार जैसे जघन्य अपराध पर कहा था कि “लड़कों से गलतियाँ हो जाती हैं।”

उस बयान ने पूरे देश को हिला दिया था, महिलाओं के सम्मान पर सवाल उठाए थे। आज उनके वारिसान इसी पार्टी में बैठकर दूसरों के चरित्र पर लेक्चर दे रहे हैं?

समाजवादी पार्टी की यह दोहरी मानसिकता जगजाहिर है। जब उनके अपने नेता महिलाओं के प्रति संवेदनहीन बयान देते हैं, तब चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन राजनीतिक फायदा देखकर घटिया हेडलाइंस को हथियार बना लेते हैं। अखिलेश यादव की पार्टी महिलाओं के सम्मान की दुहाई देती है, लेकिन खुद ऐसी खबरों को बढ़ावा देकर समाज में विकृति फैला रही है। यह राजनीति नहीं, घटियापन है।

सपा को याद रखना चाहिए कि जनता सब देख रही है- उनका चाल, चरित्र और चेहरा। वे भारत के मित्र रूस का अपमान करके क्या साबित करना चाहते हैं? कि वे सत्ता के लिए कितने नीचे गिर सकते हैं?

यह प्रकरण मीडिया और विपक्ष की गिरती साख को उजागर करता है। दैनिक भास्कर जैसे अखबार को चाहिए कि वे अपनी हेडलाइंस पर संयम बरतें, सनसनी की बजाय तथ्य परोसें। ‘रशियन’ जैसे शब्दों का दुरुपयोग बंद करें, जो एक पूरे राष्ट्र और उसकी महिलाओं का अपमान है। और समाजवादी पार्टी को चाहिए कि वे अपनी पुरानी गलतियों पर माफी माँगें, मुलायम सिंह के उस बयान पर आत्मचिंतन करें, बजाय दूसरों पर कीचड़ उछालने के।

यह मामला सिर्फ एक शीर्षक या एक ट्वीट तक सीमित नहीं है, बल्कि मीडिया की गिरती भाषा, राजनीतिक दलों की विकृत मानसिकता और महिलाओं के प्रति समाज में फैलाए जा रहे ज़हरीले संकेतों का गंभीर उदाहरण बन चुका है। जिस शब्दावली और संदर्भ में ‘रशियन’ शब्द को परोसा गया, वह न सिर्फ स्त्री-सम्मान के खिलाफ है, बल्कि एक सम्प्रभु राष्ट्र और भारत के मित्र देश रूस का खुला अपमान भी है। यह सवाल अब टालने लायक नहीं रहा कि क्या राष्ट्रीय स्तर का अख़बार और एक राजनीतिक दल मिलकर समाज को उसी गटर में ढकेल रहे हैं, जहाँ कभी स्टैंड-अप कॉमेडी के नाम पर सस्ते जोक सुनाए जाते थे।

भास्कर ऐसा इसलिए भी करता है, ताकि वो विपक्ष की राजनीति के काम आ सके। यही कारण है कि उसकी इस घटिया पत्रकारिता को प्रोमोट करते हुए समाजवादी पार्टी ने उसे शेयर किया है।

बहरहाल, जनता अब जाग चुकी है। ऐसे जोकरों को नकारने का समय आ गया है। दैनिक भास्कर जैसे मीडिया हाउस और सपा जैसे दल अगर नहीं सुधरे, तो उनका हश्र वही होगा जो सस्ते जोकर्स का होता है- जनता की नजरों में गिरना और भुला दिया जाना।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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