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हिन्दू विरोधी दंगों को मुस्लिम नरसंहार साबित करने की कोशिश! बरखा दत्त का प्रोपेगेंडा हुआ फुस्स

सोशल मीडिया के तमाम जायज सवालों और कुछ लोगों की अपीलों के बावजूद भी बरखा हिन्दू पीड़ितों से मिलने अब तक नहीं जा सकी हैं। यह देखना दुखद तो है ही, पर अब आश्चर्यजनक नहीं लगता क्योंकि यह वही ब्रिगेड है जिसने...

विवादास्पद पत्रकार बरखा दत्त दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों की रिपोर्टिंग को लेकर फिर से चर्चा में हैं। जैसा कि उनसे उम्मीद भी थी ही, उन्होंने इन दंगों की रिपोर्टिंग करते समय जमीनी वास्तविकता और तथ्यों को परखने की जगह अपना सारा ध्यान गंगा जमुनी तहजीब का ज्ञान उड़ेलने में खर्च कर दिया।

बरखा दत्त ने अपनी सालों से सींची गई प्रोपेगेंडा पत्रकार की भूमिका का बखूबी निर्वाह करते हुए इस हिन्दू विरोधी दंगों की रिपोर्टिंग में भी जानबूझकर हिन्दू विक्टिम्स को दरकिनार किया और सारा फोकस मुस्लिम पीड़ितों पर ही बनाए रखा, जिससे इन दंगों को मुस्लिम नरसंहार साबित किया जा सके, जबकि जमीनी वास्तविकता ठीक इससे उलट है।

लेकिन उनका यह प्रोपेगेंडा सोशल मीडिया यूजर्स के सामने पल भर में धराशाई होते दिखा, जब उन पर चारों तरफ से इस इकतरफा रिपोर्टिंग को लेकर सवाल आने शुरू हो गए। लोगों ने उनसे पूछना शुरू कर दिया कि क्यों वो दंगे की बलि चढ़े हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल और मुस्लिम फ़सादियों की बर्बरता के शिकार हुए आईबी के अंकित शर्मा के यहाँ नहीं गईं?

लोगों ने उनसे यहाँ तक कहा कि अंकित शर्मा के साथ हुई बर्बरता पर भी रिपोर्ट कर दीजिए लेकिन बरखा जी ने अच्छी विदेशी क्वालिटी का तेल दोनों कानों में भरा हुआ था शायद…

सोशल मीडिया के तमाम जायज सवालों और कुछ लोगों की अपीलों के बावजूद भी बरखा हिन्दू पीड़ितों से मिलने अब तक नहीं जा सकी हैं। यह देखना दुखद तो है ही, पर अब आश्चर्यजनक नहीं लगता क्योंकि यह वही ब्रिगेड है जिसने नागरिकता कानून और एनआरसी पर महीनों मुस्लिमों को भड़काया, उन्हें सड़क पर उतारा। इस ब्रिगेड से कोई रवीश कह देता है, “किसी ने बताया कि वो शाहरुख़ नहीं अनुराग मिश्रा है” ऐसे स्वनामधन्य पत्रकारों से और आशा भी क्या की जा सकती है?

लेकिन जो आपको याद रखना है उसे अच्छे से अपने दिलो दिमाग में बैठा लीजिए – दिल्ली का दंगा, हिन्दू विरोधी दंगा था, जिसमें हिन्दुओं की सिर्फ हत्या नहीं हुई, उनकी हत्याएँ बेरहमी के साथ की गईं, जिसके लिए महीनों से तैयारी चल रही थी, पेट्रोल इकट्ठा किया जा रहा था, ईंट बोरियों में भर-भर कर छतों तक पहुँच रही थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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