Tuesday, June 22, 2021
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‘अगर तलोजा वापस गए तो मुझे मार डालेंगे, अर्नब का नाम लेने तक वे कर रहे हैं किसी को टॉर्चर के लिए भुगतान’: पूर्व BARC CEO का परिवार

उनकी पत्नी ने बताया कि पार्थो ने व्यक्ति को यातना देने के लिए भुगतान किए जाने के बारे में कहा, "यह तब तक खत्म नहीं होगा जब तक आप अर्नब गोस्वामी का नाम नहीं लेंगे।" यह पूछे जाने पर कि क्या यह व्यक्ति एक कैदी था या जेल अधिकारी था, समरजनी ने कहा, "पार्थो भयानक स्थिति में थे और वह मुझे केवल इतना ही बता पाए।"

मुंबई पुलिस और सिटी क्राइम ब्रांच ने इस साल की शुरुआत में फर्जी टीआरपी घोटाले में 15वीं गिरफ्तारी की। BARC COO रोमिल रामगढ़िया को गिरफ्तार करने के कुछ दिनों बाद, उन्होंने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के पूर्व CEO पार्थो दासगुप्ता को 25 दिसंबर 2020 को गिरफ्तार किया।

पुलिस के अनुसार, दासगुप्ता को पुणे ग्रामीण से गिरफ्तार किया गया है जो रायगढ़ पुलिस थाने के अधिकार क्षेत्र में है। दासगुप्ता जब तलोजा जेल में बंद थे, तभी मुंबई पुलिस ने एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित किया था। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि पार्थो दासगुप्ता ने रिपब्लिक टीवी के पक्ष में टीआरपी बढ़ाने के लिए अर्नब गोस्वामी से पैसे लिए थे। पुलिस ने दावा किया कि उन्हें एक घड़ी, कुछ चाँदी के आभूषण मिले हैं। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि अर्नब गोस्वामी ने दासगुप्ता को लगभग 30 लाख रुपए दिए थे।

आज (जनवरी 16, 2021) BARC के पूर्व सीईओ की बेटी बेटी प्रत्यूषा ने एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगाई है। उन्होंने इस पत्र में अपने पिता की ज़िंदगी बचाने की अपील की है। प्रत्यूषा का कहना है कि उनके पिता शुक्रवार (जनवरी 15, 2021) से ही बेहोशी की अवस्था में एक अस्पताल में भर्ती हैं। वो फ़िलहाल TRP स्कैम में न्यायिक हिरासत में हैं। प्रत्यूषा का कहना है कि जनवरी 15, 2021 को दोपहर 1 बजे उन्हें अस्पताल लेकर जाया गया और अगले दिन 3 बजे दोपहर को परिजनों को इसकी सूचना दी गई, अर्थात 15 घंटे तक इस बात को छिपा कर रखा गया। जिसके बाद वो जेजे अस्पतलात पहुँचे।

उन्होंने बताया कि जब वो अस्पताल पहुँचीं तो उनके पिता इमरजेंसी रूम में पड़े हुए थे और उन्हें ओढ़ाने के लिए एक बेडसीट तक नहीं था। प्रत्यूषा ने सोशल मीडिया के माध्यम से शेयर किए गए पत्र में लिखा है कि उनके पिता कुछ कहना चाहते थे और बातें करना चाहते थे, लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रहे थे। उनका शुगर लेवल भी काफी उच्च स्तर (516) पर पहुँच गया था। डायबिटीज, हाइपरटेंशन और एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस नामक एक ऑटो इम्यून डिसऑर्डर जैसी बीमारियों से वो कई सालों से पीड़ित हैं।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपना संदेश देते हुए कहा, “सर, मेरी आपसे अपील है कि कृपया हमारे खर्च पर एक प्रतिष्ठित अस्पताल में उचित चिकित्सा उपचार की अनुमति देकर मेरे पिता की जान बचाएँ। उच्चतम स्तरों पर हस्तक्षेप के बिना, मैं अब उनके जीवन को लेकर भयभीत हूँ।”

ऑपइंडिया ने स्थिति की वास्तविकता को जानने के लिए पार्थो दासगुप्ता के परिवार से संपर्क किया। परिवार ने ऑपइंडिया को बताया कि दासगुप्ता 15 जनवरी 2021 की दोपहर के बाद से गंभीर हालत में थे और उन्हें जेजे अस्पताल ले जाया गया। हालाँकि, तलोजा जेल के अधिकारियों ने नवी मुंबई पुलिस को उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी। लगभग 15 घंटे तक उनकी हालत के बारे में परिवार से संपर्क नहीं किया गया। दोपहर बाद, जब दासगुप्ता को जेजे अस्पताल ले जाया गया, तब सत्र न्यायालय में जमानत की सुनवाई चल रही थी, जहाँ उनकी बेटी और पत्नी दोनों मौजूद थे।

ऑपइंडिया से बात करते हुए प्रत्यूषा ने सवाल किया कि जब दासगुप्ता अस्पताल में बेहोश थे, तब अधिकारियों ने परिवार को इतने समय तक सूचित क्यों नहीं किया। उन्हें संदेह है कि अधिकारियों ने उस समय उनके गंभीर स्वास्थ्य के बारे में जानकारी छिपा दी थी क्योंकि उसकी स्वास्थ्य स्थिति जमानत के लिए वैध होगी और पुलिस यह नहीं चाहती थी कि सुनवाई के दौरान ही ये जानकारी सामने आए।

प्रत्यूषा ने उस दयनीय स्थिति के बारे में बताया, जिस अवस्था में उन्होंने अपने पिता को देखा था। उन्होंने कहा कि जब वे 16 तारीख को अस्पताल पहुँची, तो उनके पिता के ऊपर कोई कंबल नहीं था और वह अर्ध-बेहोशी की हालत में थे। इसके अलावा, उनके पास एक तकिया भी नहीं था, जिसका वजह से उनका स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी की स्थिति और बदतर हो गई थी।

उन्होंने कहा कि अस्पताल में कर्मचारियों ने उनसे पूछा कि वे पहले अस्पताल क्यों नहीं पहुँचे, क्योंकि उन्हें गंभीर स्थिति में भर्ती कराया गया था, उनका शुगर लेवल 500 से अधिक था। अधिकारियों ने कहा कि वे परिवार से संपर्क नहीं कर सकते क्योंकि उनके पास उनके संपर्क नंबर नहीं थे।

प्रत्यूषा ने खुलासा किया कि पिछले 1 सप्ताह से वह बार-बार तलोजा जेल अधिकारियों को ईमेल कर रही थी कि पार्थो दासगुप्ता के साथ वीडियो कॉल करने की अनुमति दी जाए। हालाँकि, उनकी बार-बार की कोशिशों के बावजूद जेल से कोई जवाब नहीं मिला। इन ईमेल में उन्होंने स्पष्ट रूप से अपने नंबर का उल्लेख किया था।

यहाँ वो ईमेल हैं जो प्रत्यूषा ने तलोजा जेल को भेजे थे।

Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail
Email by the daughter of Partho Dasgupta to Taloja Jail

जैसा कि देखा जा सकता है कि पार्थो दासगुप्ता के परिवार द्वारा तलोजा जेल अधिकारियों को तीन ईमेल भेजे गए थे – 8 जनवरी को, 11 जनवरी को और 15 जनवरी को। परिवार उनकी स्वास्थ्य स्थिति का हवाला देते हुए बात करने की भीख माँग रहा था, क्योंकि उन्हें कानूनी रूप से इसकी अनुमति दी गई थी। हालाँकि, जेल अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि इन ईमेलों में, उनकी बेटी के फोन नंबर का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था और इस प्रकार, जेल अधिकारियों के लिए यह दावा करना संदेहास्पद है कि उन्हें नहीं पता था कि परिवार से कैसे संपर्क किया जाए।

‘मुंबई पुलिस ने अर्नब गोस्वामी का नाम लेने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए तलोजा जेल के अंदर किसी को भुगतान कर रही है’

ऑपइंडिया ने पार्थो दासगुप्ता की पत्नी समरजनी दासगुप्ता से भी बात की। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी 16 जनवरी 2021 की दोपहर तक अस्पताल में थी जब वह वकील के पास गई थी। परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें केवल कुछ समय के लिए पार्थो से मिलने की अनुमति दी गई थी, जिसके बाद उन्हें जल्दी से आईसीयू में ले जाया गया। उसके बाद, परिवार को दासगुप्ता की स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है। अधिकारियों ने कथित तौर पर परिवार को बताया कि चूँकि दासगुप्ता एक कैदी है, इसलिए उसकी स्थिति और उसके ठिकाने की जानकारी परिवार को नहीं दी जा सकती।

समरजनी ने कहा कि पार्थो दासगुप्ता को मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है और राजनीतिक प्रतिशोध के मामले में फँसाया गया। उन्होंने कहा, “मैं खुद को असहाय महसूस कर रही हूँ, मैं किसी को नहीं जानती, वह मृत्युशैय्या पर हैं।”

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जब वह दासगुप्ता से अस्पताल में मिलीं, तो उन्होंने उन्हें बताया कि उन्हें जेल में शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि पार्थो ने अपनी दबी आवाज़ में कहा कि मुंबई पुलिस अर्नब गोस्वामी और रिपब्लिक टीवी को फँसाने के लिए उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए तलोजा जेल के अंदर किसी को भुगतान कर रही है।

समरजनी ने दावा किया कि पार्थो ने व्यक्ति को यातना देने के लिए भुगतान किए जाने के बारे में कहा, “यह तब तक खत्म नहीं होगा जब तक आप अर्नब गोस्वामी का नाम नहीं लेंगे।” यह पूछे जाने पर कि क्या यह व्यक्ति एक कैदी था या जेल अधिकारी था, समरजनी ने कहा, “पार्थो भयानक स्थिति में थे और वह मुझे केवल इतना ही बता पाए।”

जब उन्हें उनके कमरे से बाहर ‘निकाला’ जा रहा था, तो समरजनी कहती हैं कि पार्थो ने पुकारा, “मुझे छोड़कर मत जाओ… अगर वे मुझे तलोजा जेल वापस ले जाते हैं, तो वे मुझे मार डालेंगे। वे कहेंगे कि सब कुछ ठीक है और मुझे वापस ले जाएँगे और मार डालेंगे।”

मुंबई पुलिस द्वारा पार्थो दासगुप्ता पर रिपब्लिक से 30 लाख रुपए लिए जाने के आरोप पर टिप्पणी करते हुए समरजनी ने कहा कि उनके पति ने एक साल में 4 करोड़ रुपए कमाए। वो सिसकते हुए कहती है, “क्या इससे भी आपको समझ में नहीं आता है कि क्या एक साल में 4 करोड़ रुपए कमाने के बाद वह खुद को 30 लाख रुपए में बेच देंगे? वह मौत के मुँह में हैं। वो उन्हें मार डालेंगे। कृपया उन्हें बचाने में हमारी मदद करें।”

पूर्व BARC सीईओ पार्थो दासगुप्ता के परिवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की

समरजनी दासगुप्ता ने अब बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर पार्थो और उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण होने वाली मानसिक और शारीरिक यातना का विवरण दिया है।

हलफनामे में, वह कहती है कि जब वह अस्पताल पहुँची, तो ‘स्ट्रेचर पर खून था’ जहाँ पर पार्थो लेटे हुए थे। उनके पैर बर्फ से ठंडे थे। उन्होंने कहा कि यहाँ तक कि डॉक्टरों ने उनकी तत्काल चिकित्सा ध्यान देने के उसके अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया। वह आगे हलफनामे में कहती है कि 16 की सुबह 6:30 बजे आईसीयू में ले जाया गया, जबकि वह 15 जनवरी की दोपहर से अस्पताल में थे। वह दावा करती है कि उसके बाद भी उन्हें उनकी बीमारी या स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में सूचित नहीं किया गया है।

यह कहते हुए कि उनका जीवन खतरे में है, वह अपने पति पार्थो दासगुप्ता को तत्काल चिकित्सा के लिए अदालत से आग्रह करती है। वह कहती हैं कि चूँकि पीडी हिंदुजा अस्पताल के डॉक्टरों को उनकी बीमारियों के बारे में पता है, अगर उन्हें अस्पताल नहीं भेजा गया, तो उन्हें डर है कि वह अपनी जान गँवा सकते हैं। वह यह कहकर प्रार्थना समाप्त करती है कि उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति लगातार शारीरिक और मानसिक शोषण के कारण है जिसे वह तलोजा जेल में रखा गया है।

फेक टीआरपी घोटाला

अक्टूबर में, मुंबई पुलिस ने कुछ टीवी चैनलों के खिलाफ कुछ सनसनीखेज दावे किए थे कि वे टीआरपी रेटिंग्स में हेरफेर कर रहे थे। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कहा था कि रिपब्लिक टीवी सहित तीन टीवी चैनल BARC के दर्शकों के डेटा में हेरफेर करने में शामिल थे, जिन घरों में बार-ओ-मीटर, टीवी व्यूअरशिप को ट्रैक करने वाले डिवाइस इंस्टॉल किए गए हैं।

पुलिस ने विशेष रूप से उल्लेख किया था कि हंसा रिसर्च ने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी। हंसा ग्रुप एक ऐसा संगठन है जिसने BARC के लिए TRP रिकॉर्ड करने के लिए उपकरणों को विनियमित किया है। दिलचस्प बात यह है कि हंसा रिसर्च द्वारा दर्ज की गई इस एफआईआर में एक बार भी रिपब्लिक टीवी का जिक्र नहीं किया गया था। जिस चैनल का जिक्र कई बार किया गया वह इंडिया टुडे था।

जाँच के दौरान, कई सबूत और गवाह सामने आए कि कथित मुंबई पुलिस रिपब्लिक टीवी के खिलाफ बोलने के लिए उन्हें डरा रही है, जिसमें हंसा के अधिकारी भी शामिल हैं। हंसा ने यह भी शिकायत की है कि उन्हें मुंबई पुलिस द्वारा रिपब्लिक टीवी के खिलाफ बयान देने के लिए परेशान किया जा रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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