Wednesday, July 28, 2021
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मुस्लिमों को गिरोह बना लेना चाहिए, कमलेश की हत्या है ‘अब भी रहस्य’: The Wire का जहरीला वीडियो

अपूर्वानंद ने झूठ भी बोला कि यह हत्या पुलिस के लिए अभी भी 'रहस्य' है, जबकि सच्चाई यह है कि इस मामले में पुलिस ने लखनऊ से लेकर गुजरात और राजस्थान तक से समुदाय विशेष के आरोपितों की गिरफ्तारियाँ कर ली हैं।

वामपंथी प्रोपेगंडाबाज द वायर ने कमलेश तिवारी हत्याकांड पर झूठ फैलाना बंद नहीं किया है। “भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशा अल्लाह, इंशा अल्लाह” के नारे लगाने-लगवाने के लिए देशद्रोह के आरोपित उमर खालिद और अर्बन नक्सली आतंकवादियों के पक्ष में बोलने के आरोपित दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अपूर्वानंद के द वायर के यूट्यूब वीडियो में कमलेश तिवारी हत्याकांड की जमकर लीपापोती की गई है। वीडियो का शीर्षक “क्या मुसलमान, मुसलमान की तरह बोल सकता है?” है।

The Wire का शीर्षक

इस बातचीत में उमर खालिद ने साफ़ कहा है कि मुस्लिम अपने मज़हब में हजरत माने जाने वाले मुहम्मद का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं (यानी अगर किसी ने अपमान कर दिया तो उसका गला रेतना, शरीर चाकू से जीते जी फाड़ डालना, और उसके बाद चेहरे पर गोली मार देना ‘बट नैचुरल’ प्रतिक्रिया हुई तब तो??), भले ही उस अपमान से कोई भौतिक नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद का अपमान मुस्लिमों की अस्मिता पर हमला है, जिससे मुस्लिमों को लड़ने की ज़रूरत है।

हालाँकि इतनी हिंसक और उकसावे वाली बातों को वे “इन सबको ‘शांतिपूर्ण’ तरीके से किए जाने की ज़रूरत है।” के लबादे में ढँकने की कोशिश ज़रूर करते हैं, लेकिन असली संदेश छिपता नहीं है। वे अंत में उसी नैरेटिव का ही समर्थन करते दिखते हैं, जिसमें इस्लाम में पैगंबर माने जाने वाले मोहम्मद की शान में गुस्ताखी करना इतना बड़ा जुर्म है कि उसकी सज़ा चाकुओं से गोद कर किसी जानवर की तरह हलाल कर दिया जाना है।

खुद अर्बन नक्सली कहे जाने वाले अपूर्वानंद भी इसमें कम सहयोग नहीं करते हैं। वे कमलेश तिवारी की हत्या को कमलेश तिवारी, उनके परिवार, उनके सहधर्मी हिन्दुओं की बजाय मुस्लिमों के लिए ‘परेशानी का सबब’ बता देते हैं। और इसका सबूत? इस्लाम में पैगंबर माने जाने वाले मोहम्मद के खिलाफ कमलेश तिवारी की हत्या की खबर आने पर एक ‘अपमानजनक’ ट्विटर ट्रेंड चल गया था। यानी अपने विश्वास में अल्लाह के आखिरी दूत के खिलाफ चले एक ट्विटर ट्रेंड से मुस्लिमों को हुआ ‘कष्ट’ अपूर्वानंद के लिए कमलेश तिवारी को मरते समय हुई तकलीफ़, अपने बेटे, पति, बाप की कटी-फ़टी लाश देखने वाले परिवार के दुःख और अपने सहधर्मी की ऐसी हत्या और उसके बाद भी पसरे भयावह सन्नाटे से हिन्दुओं में बसी दहशत न केवल खूँखार नक्सलियों के पैरोकार कहे जाने वाले अपूर्वानंद के लिए बराबर के स्तर पर हैं, बल्कि मुस्लिमों का ‘कष्ट’ हिन्दुओं में पसरे आतंक से बढ़कर है।

अपूर्वानंद यहीं तक नहीं रुके। उन्होंने दिवंगत कमलेश तिवारी को भी नफ़रती (हेटफुल) करार दे दिया, जब कि उनका मामला अदालत में अभी विचाराधीन था। उन्होंने यह झूठ भी बोला कि यह हत्या पुलिस के लिए अभी भी ‘रहस्य’ है, जब कि सच्चाई यह है कि इस मामले में पुलिस ने लखनऊ से लेकर गुजरात और राजस्थान तक से मजहब विशेष के आरोपितों की गिरफ्तारियाँ कर ली हैं। अब तक इस मामले में कुल 8 गिरफ्तारियाँ पुलिस ने की हैं। इसके अलावा पुलिस ने खुलासा यह भी किया है कि ये जिहादी दर्जनों अन्य जिहादियों से WhatsApp ग्रुपों के ज़रिए सम्पर्क में थे, और साज़िश में सबकी कोई न कोई भागीदारी थी।

और इतना सब हो जाने के बाद भी कमलेश तिवारी हत्याकांड को अपूर्वानंद न केवल अपने लिए, बल्कि इतनी सारी गिरफ्तारियाँ करने वाली पुलिस के लिए भी ‘रहस्य’ बता रहे हैं! यानि इस हत्या को अंजाम देने वाले जिहादियों और उनकी जिहादी विचारधारा को क्लीन चिट!

इसके बाद ट्रैक बदल कर उमर खालिद सीधे-सीधे झूठ बोलने पर उतर आते हैं। कल तक नास्तिक और कम्युनिस्ट रहे उमर खालिद जब कमेश तिवारी हत्याकांड के बाद ट्विटर पर अपने असली रंग में, कट्टर मजहबी के रूप में सामने आए तो ज़ाहिर तौर पर लोगों ने उनकी जमकर भद्रा उतारी। उसके बारे में बात करते हुए उमर खालिद ने कहा कि उनका इस्लाम यह ज़रूरी नहीं करता कि वे अपनी मज़हबी पहचान सबको साफ़-साफ़ बताएँ। यह सौ फीसदी झूठ है। इस्लाम में अल्लाह और पैगंबर माने जाने वाले मोहम्मद का रास्ता छोड़ने वालों को ‘काफ़िर’ हिन्दुओं से भी गया बीता मानते हुए उनके लिए केवल मौत की सज़ा मुक़र्रर की गई है। दरअसल इस झूठ का इस्तेमाल उमर तिवारी हत्याकांड के तुरंत बाद अपना रंग बदलने को जस्टिफाई करने के लिए करना चाहते थे।

इसके बाद एक तरफ़ उमर खालिद एक तरफ़ “नफरत का जवाब मोहब्बत से देने” की बात कर के दर्शकों को बरगलाने की कोशिश करते हैं, वहीं दूसरी ओर वे समुदाय विशेष से आह्वाहन करते हैं कि वे गुस्से में भड़क कर उठ खड़े हों और सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को अपनी माँगों (जिसमें वे चालाकी से आर्थिक अधिकार, अपने आत्मसम्मान आदि की बकवास भर देते हैं, जबकि मकसद केवल मुस्लिमों को गिरोह और गुट बनाकर उठ खड़े होने का आह्वाहन करना है) का अहसास कराएँ। हैशटैग में ‘लव’ की बात करने वाले उमर की इस वीडियो में सारी की सारी बातें उसी काफ़िरों से नफ़रत से पड़ीं हैं, जिसकी परिणति कमलेश तिवारी की हत्या के रूप में हुई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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