Thursday, April 2, 2026
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ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगाँठ पर समंदर में तीसरा साइलेंट रक्षक उतारेगा भारत, न्यूक्लियर पॉवर से लैस ‘अरिदमन’ करेगा दुश्मन का सफाया: जानें- इसकी असीम ताकत का राज, क्यों है ये खास

भारतीय नौसेना अप्रैल-मई 2026 में तीसरी परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन 'INS अरिदमन' को शामिल करने की तैयारी में है। 7000 टन वजनी यह सबमरीन 83 मेगावाट रिएक्टर से लैस है और 3500KM दूर तक मिसाइलें दाग सकती है। इससे भारत की समुद्री सेकेंड स्ट्राइक और न्यूक्लियर ट्रायड क्षमता मजबूत होगी।

ऑपरेशन सिंदूर की वर्षगाँठ पर भारतीय नौसेना ‘INS अरिदमन’ नाम की तीसरी स्वदेशी परमाणु-शक्ति वाली बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन (SSBN) को अप्रैल-मई 2026 के बीच आधिकारिक रूप से सेवा में शामिल करने की तैयारी कर रही है। इसे भारतीय नौसेना के न्यूक्लियर डेटरेंस फोर्स का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, INS अरिदमन को भारत में ही बनाया गया है और यह पहले से सक्रिय INS अरिहंत और INS अरिघाट के बाद तीसरी ऐसी सबमरीन है, जो समुद्र के भीतर दुश्मन पर शक्तिशाली जवाबी हमले की क्षमता रखती है।

नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी बताते हैं कि इसी कमीशनिंग से भारत की सेकेंड स्ट्राइक (Second Strike) क्षमता और मजबूत होगी, यानी अग भारत पर पहले परमाणु हमला होता है तो समुद्र में तैनात यह पनडु्ब्बी जवाबी हमला करने के लिए तैयार रहेगी।

INS अरिदमन को विशाखापट्टनम के पास स्थित स्टोरेज और लॉन्च सुविधा, ‘प्रोजेक्ट वर्षा’ से ऑपरेशन के लिए तैनात किया जाएगा। यह सबमरीन पहले दो SSBNs की तुलना में और उन्नत है और इसे भारतीय नौसेना के स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड (SFC) के अंतर्गत चलाया जाएगा।

अधिकारियों के अनुसार, इसके शामिल होने से समुद्री न्यूक्लियर डिटेरेंस को और विश्वसनीय बनाएगा, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक संतुलन के लिहाज से। अब जानते हैं INS अरिदमन की मुख्य खासियतें, हथियार और तकनीक के बारे में। यह सब जानना जरूरी है ताकि यह समझा जा सके कि यह सबमरीन क्यों महत्वपूर्ण है और इसे मजबूर हथियारों से लैस क्यों किया गया है।

INS अरिदमन की बनावट और क्षमता

INS अरिदमन लगभग 7000 टन वजन वाली परमाणु सबमरीन है, Advanced Technology Vessel programme के तहत शिप बिल्डिंग सेंटर में बनाया गया है। इसमें 83 मेगावाट क्षमता वाला प्रेसराइज्ड वाटर न्यूक्लियर रिएक्टर लगा है। इसी वजह से यह महीनों तक समुद्र के भीतर रह सकती है और इसे बार-बार सतह पर आने की जरूरत नहीं पड़ती।

इसकी लंबाई करीब 110 मीटर बताई जा रही है और इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह समुद्र के भीतर बेहद कम आवाज के साथ आगे बढ़ सके। सबमरीन में विशेष एनेकोइक कोटिंग लगाई गई है जो ध्वनि को कम करती है और दुश्मन के सोनार से बचने में मदद करती है।

मिसाइल और हथियार प्रणाली

INS अरिदमन में चार वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं। इनसे यह दो प्रकार की सबमरीन से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें ले जा सकती है। पहली है K15 सागरिका मिसाइल, जिसकी मारक दूरी लगभग 750 किलोमीटर है। यह कम दूरी के लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है।

दूसरी ओर अधिक ताकतवर है K4 मिसाइल, जिसकी रेंज करीब 3500 किलोमीटर तक मानी जाती है। K4 की लंबी दूरी भारत को समुद्र में रहते हुए ही दूर स्थित रणनीतिक ठिकानों तक पहुँचने की क्षमता देती है। यह सबमरीन अधिकतम 8 K4 मिसाइलें या 24 K15 मिसइलें ले जा सकती है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उसे किस मिशन के लिए तैनात किया गया है।

मिसाइलों को पानी के भीतर से ही दागा जा सकता है। यही इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है क्योंकि दुश्मन के लिए यह जान पाना बेहद मुश्किल होता है कि सबमरीन किस जगह पर है। इसके अलावा इसमें आधुनिक सोनार प्रणाली, कम शोर वाला प्रोपल्शन सिस्टम और सुरक्षित कमांड एवं कंट्रोल व्यवस्था मौजूद है।

क्यों अहम है INS अरिदमन?

INS अरिदमन के शामिल होने के बाद भारत के पास तीन परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन हो जाएँगी। इससे भारत की परमाणु त्रि शक्ति (Nuclear Triad) और संतुलित होगी, जिसमें जमीन से दागी जाने वाली मिसाइलें, हवा से छोड़े जाने वाले हथियार और समुद्र से जवाब देने की क्षमता शामिल है।

समुद्र में छिपी सबमरीन किसी भी देश के लिए सबसे भरोसेमंद जवाबी ताकत मानी जाती है, क्योंकि इसे ढूँढ पाना आसान नहीं होता। खासकर पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब देकर भारत की सुरक्षा रणनीति को और मजबूती देगी।

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पूजा राणा
पूजा राणाhttps://hindi.opindia.com/
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