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खतरनाक सैन्य ठिकानों में तैनाती के लिए सेना ने FF BOT को बेड़े में किया शामिल, जानें- कितना अहम है यह स्वदेशी रोबोट जो बनेगा जवानों की ढाल

यह रोबोट उन हालात में काम करने में सक्षम है, जहाँ विस्फोट का खतरा हो, जहरीला धुआँ फैला हो, तापमान बेहद ज्यादा हो या इमारत के ढहने की आशंका हो। ऐसे हालात में आमतौर पर फायर फाइटर्स को जान जोखिम में डालकर अंदर जाना पड़ता है, लेकिन अब पहले FF BOT को अंदर भेजा जाएगा।

आग और तबाही के खतरनाक हालात में भी अपने जवानों की जान की कीमत से कोई समझौता न करते हुए भारतीय सेना ने एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम उठाया है। जवानों को सीधे आग के मोर्चे पर उतारने के बजाय अब तकनीक को आगे कर दिया गया है। इसी कड़ी में 13 जनवरी 2026 को सेना के डायरेक्टोरेट ऑफ कैपेबिलिटी डेवलपमेंट ने एक स्वदेशी कंपनी के साथ समझौता किया, जिसके तहत भारतीय सेना 18 अत्याधुनिक फायर फाइटिंग रोबोट (FF BOT) को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है।

इस सौदे की कुल कीमत 62 करोड़ रुपए तय की गई है। यह अहम फैसला ऐसे समय पर लिया गया है, जब सैन्य ठिकानों पर आग लगने की घटनाओं को लेकर खतरे और चिंताएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं, खासकर गोला-बारूद और ईंधन भंडारण जैसे बेहद संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले इलाकों में।

दिसंबर 2025 में विजय दिवस समारोह के दौरान आर्मी हाउस में FF BOT को सार्वजनिक रूप से पेश किया गया था। यह एक स्टैटिक डिस्प्ले था, जिसका उद्देश्य रोबोट की वास्तविक फायर फाइटिंग क्षमता का प्रदर्शन करना नहीं बल्कि उसके आधुनिक डिजाइन, प्रस्तावित भूमिका और ऑपरेशनल कॉन्सेप्ट को स्पष्ट करना था। इस दौरान सेना का जोर इस बात पर था कि किस तरह ऐसी अनमैन्ड तकनीकें बेहद खतरनाक परिस्थितियों में मानव उपस्थिति की जरूरत को कम कर सकती हैं और जवानों की सुरक्षा को कहीं अधिक मजबूत बना सकती हैं।

FF BOT क्या है और इसे क्यों माना जा रहा है खास?

FF BOT एक अनमैन्ड ग्राउंड फायर फाइटिंग सिस्टम है, जिसे खास तौर पर उन परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है, जहाँ इंसानों का जाना जानलेवा साबित हो सकता है। इस रोबोट को एक भारतीय स्टार्ट-अप एम्प्रेसा प्राइवेट लिमिटेड ने विकसित किया है।

इसका निर्माण रक्षा मंत्रालय की iDEX यानी Innovations for Defence Excellence पहल के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार और स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देना है। यह रोबोट उन हालात में काम करने में सक्षम है, जहाँ विस्फोट का खतरा हो, जहरीला धुआँ फैला हो, तापमान बेहद ज्यादा हो या इमारत के ढहने की आशंका हो।

ऐसे हालात में आमतौर पर फायर फाइटर्स को जान जोखिम में डालकर अंदर जाना पड़ता है लेकिन FF BOT की मौजूदगी इस खतरे को काफी हद तक कम कर देती है। हालाँकि, FF BOT को शुरुआत में भारतीय नौसेना के लिए iDEX फ्रेमवर्क के तहत विकसित किया गया था।

इसके सफल परीक्षणों के बाद अब भारतीय सेना ने भी इसे अपने बेड़े में शामिल करने का फैसला किया है। रक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुसार, यदि किसी एक सेवा के लिए iDEX के तहत विकसित कोई सिस्टम सफलतापूर्वक परीक्षण पास कर लेता है, तो दूसरी सेवा भी उसे बिना नए विकास चरण के अपना सकती है।

FF BOT को सिंगल स्टेज कॉम्पोजिट ट्रायल के बाद मंजूरी दी गई। इस पूरे प्रोजेक्ट को आर्मी डिजाइन ब्यूरो का भी समर्थन मिला, जो यह दर्शाता है कि सेना स्वदेशी तकनीक और निजी क्षेत्र की भागीदारी को कितनी गंभीरता से ले रही है। यह कदम सीधे तौर पर मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की सोच से जुड़ा हुआ है।

कहाँ और कैसे होगा FF BOT का इस्तेमाल?

सेना के अनुसार FF BOT को देश के अलग-अलग कैंटोनमेंट्स में तैनात किया जाएगा। खास तौर पर इन्हें गोला-बारूद डिपो, हथियार रखने के केंद्र, ईंधन और तेल के भंडार, सैन्य कारखानों और रिफाइनरी जैसे बेहद संवेदनशील और खतरनाक इलाकों में इस्तेमाल किया जाएगा।

इन जगहों पर अगर आग लगती है तो नुकसान सिर्फ इमारतों या सामान तक सीमित नहीं रहता बल्कि बड़े विस्फोट, सप्लाई सिस्टम के ठप होने और आसपास मौजूद दूसरी सैन्य इकाइयों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे हालात में FF BOT को सबसे पहले अंदर भेजा जाएगा ताकि वह आग की स्थिति को करीब से देख सके और शुरुआत में ही उसे काबू में लाने में मदद करे, जबकि फायर फाइटिंग में लगे जवान सुरक्षित दूरी पर रह सकेंगे।

FF BOT की तकनीकी क्षमताएँ

FF BOT को पूरी तरह रिमोट से ऑपरेट किया जाता है। यानी फायर फाइटर्स इसे खतरे वाले क्षेत्र के बाहर से नियंत्रित कर सकते हैं। इसमें लगे ऑप्टिकल और थर्मल कैमरे ऑपरेटर को लाइव वीडियो फीड भेजते हैं। थर्मल कैमरा खास तौर पर धुएँ के बीच छिपी आग, गर्म हिस्सों और हॉटस्पॉट की पहचान करने में मदद करता है, जो सामान्य आँखों से दिखाई नहीं देते।

इस लाइव और स्पष्ट जानकारी की वजह से फायर फाइटिंग टीम को हालात की बेहतर समझ मिलती है और वे तेजी से सही फैसले ले पाते हैं। कम दृश्यता और अत्यधिक जोखिम वाले माहौल में यह तकनीक बेहद अहम साबित होती है।

पहले भी हो चुका है FF BOT का इस्तेमाल

FF BOT सिर्फ कागजों या परीक्षण तक सीमित नहीं है। इसे पहले भी नागरिक क्षेत्र में आग बुझाने के अभियानों में इस्तेमाल किया जा चुका है। खास तौर पर विशाखापट्टनम रिफाइनरी में लगी भीषण आग के दौरान इस रोबोट की उपयोगिता सामने आई थी।

इस अनुभव ने यह साबित किया कि FF BOT न सिर्फ सैन्य ठिकानों के लिए बल्कि बड़े औद्योगिक हादसों और आपदा प्रबंधन में भी बेहद कारगर हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इसे पावर स्टेशन, एयरपोर्ट और अन्य संवेदनशील स्थानों पर भी तैनात किया जा सकता है।

समझौते में क्या-क्या है शामिल और क्यों यह कदम है बेहद अहम?

सेना द्वारा किए गए इस समझौते में सिर्फ 18 रोबोट्स की खरीद ही नहीं बल्कि उनका लंबे समय तक रखरखाव भी शामिल है। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत दो साल की वारंटी और पाँच साल की व्यापक मेंटेनेंस सुविधा दी जाएगी। कुल मिलाकर सात साल तक ऑन-साइट सर्विस सपोर्ट सुनिश्चित किया गया है।

FF BOT की इंडक्शन प्रक्रिया अप्रैल के पहले सप्ताह से शुरू होने वाली है। FF BOT, iDEX SPRINT के DISC-7 के तहत पहला प्रोजेक्ट था, जिसे 2023 में Acceptance of Necessity मिली थी। यह दिखाता है कि कैसे एक भारतीय स्टार्ट-अप द्वारा विकसित तकनीक अब सीधे भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा कर रही है।

सेना ने साफ किया है कि FF BOT का उद्देश्य मानव फायर फाइटर्स को हटाना नहीं, बल्कि उन्हें सबसे खतरनाक हालात से बचाना है। रोबोट पहले अंदर जाकर जोखिम उठाएगा, जिससे जवान सुरक्षित रहेंगे और प्रतिक्रिया तेज और प्रभावी होगी। FF BOT की खरीद भारतीय सेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशीकरण और जवानों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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सौम्या सिंह
सौम्या सिंह
ख़ुद को तराशने में मसरूफ़

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