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CDS अनिल चौहान ने किया साफ, ऑपरेशन सिंदूर के दूसरे दौर में भारत के ‘सभी जेट्स’ ने पाकिस्तान पर बोले हमले: सवाल उठाते कॉन्ग्रेसियों की ‘कुटिल मुस्कान’ से पूरा देश हैरान

कुछ लोग पूछने लगे कि आखिर कितने जेट्स खोए गए? क्या भारत की सेना ने कोई बड़ी गलती की? विपक्ष, खासकर कॉन्ग्रेस ने इस मौके को भुनाने की कोशिश की और सरकार पर सवालों की झड़ी लगा दी। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ जेट्स के नुकसान पर फोकस करना सही है?

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के तनावपूर्ण संघर्ष, जिसे दुनिया ऑपरेशन सिंदूर के नाम से जानती है। उसने भारतीय सेना का जौहर देखा। इस संघर्ष में भारत ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना कि थोड़ा-बहुत नुकसान हुआ। हालाँकि भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने साफ किया कि नुकसान की संख्या से ज्यादा जरूरी है ये समझना कि गलतियाँ कहाँ हुईं और उन्हें कैसे सुधारा गया।

इस लेख में हम ब्लूमबर्ग के साथ उनकी बातचीत, पाकिस्तान के दावों, विपक्ष के सवालों, और इस ऑपरेशन की असल जीत को समझने की कोशिश करेंगे। साथ ही उन लोगों की सोच को भी साफ करने की कोशिश करेंगे, जो भारत की इस जीत को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं।

सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग के दौरान जनरल अनिल चौहान ने ब्लूमबर्ग टीवी को दिए इंटरव्यू में ऑपरेशन सिंदूर पर खुलकर बात की। उन्होंने माना कि मई में हुए इस संघर्ष में भारत को कुछ नुकसान हुआ। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा, “महत्वपूर्ण ये नहीं कि जेट्स गिरे, बल्कि ये है कि वे क्यों गिरे।” उनके मुताबिक, भारत ने अपनी टैक्टिकल गलतियाँ समझीं, उन्हें सुधारा और सिर्फ दो दिन बाद अपने ‘सारे जेट्स’ फिर से उड़ाए। इन जेट्स ने लंबी दूरी के टारगेट्स पर सटीक हमले किए।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट का स्क्रीनशॉट

जनरल चौहान ने बताया कि भारत ने पाकिस्तान के अंदर, 300 किलोमीटर गहराई तक, भारी हवाई रक्षा वाले एयरफील्ड्स पर शानदार एक्यूरेसी के साथ हमले किए। ये भारत की सैन्य ताकत और उसकी तकनीकी क्षमता का सबूत है। उन्होंने ये भी कहा कि पाकिस्तान के साथ संचार के चैनल हमेशा खुले रहे, जिससे स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली। न्यूक्लियर युद्ध की आशंका पर उन्होंने कहा कि ये सोचना ‘बहुत दूर की बात’ है कि दोनों में से कोई देश न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल करने की कगार पर था। उनके मुताबिक, पारंपरिक युद्ध और न्यूक्लियर थ्रेशोल्ड के बीच काफी स्पेस है, जिसमें कई ‘स्तर’ हैं, इनका इस्तेमाल करके हालात को संभाला जा सकता है।

बता दें कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पहले दावा किया था कि उनकी फौज ने छह भारतीय फाइटर जेट्स को मार गिराया। लेकिन उनके इस दावे को जनरल चौहान ने ‘एकदम गलत’ बताकर खारिज कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि जेट्स की संख्या से ज्यादा जरूरी है गलतियों को समझना और सुधारना।

पाकिस्तान ने ये भी दावा किया कि उसने चीन और अन्य देशों से मिले हथियारों का इस्तेमाल किया, जो बहुत प्रभावी रहे। जनरल चौहान ने इन दावों को भी खारिज करते हुए कहा कि ये हथियार ‘काम के ही नहीं’ थे। भारत के डिफेंस मिनिस्ट्री के एक रिसर्च ग्रुप ने भी पुष्टि की कि चीन ने पाकिस्तान को हवाई रक्षा और सैटेलाइट सपोर्ट दिया था, लेकिन भारत ने फिर भी उनके एयरफील्ड्स पर सटीक हमले किए।

जनरल चौहान के बयान के बाद सोशल मीडिया पर सवालों की बौछार शुरू हो गई। कुछ लोग पूछने लगे कि आखिर कितने जेट्स खोए गए? क्या भारत की सेना ने कोई बड़ी गलती की? विपक्ष, खासकर कॉन्ग्रेस, ने इस मौके को भुनाने की कोशिश की और सरकार पर सवालों की झड़ी लगा दी। लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ जेट्स के नुकसान पर फोकस करना सही है? ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने अपने मकसद हासिल किए – आतंकी ठिकाने नष्ट किए, पाकिस्तानी एयरबेस तबाह हुए और 100 से ज्यादा आतंकी और पाकिस्तानी फौजी मारे गए। फिर भी कुछ लोग भारत की इस जीत को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं।

ऑपरेशन सिंदूर से भारत को मिली असली जीत

युद्ध में नुकसान होना कोई नई बात नहीं है। दुनिया की कोई भी सेना, चाहे वो कितनी भी ताकतवर हो, युद्ध में नुकसान से बच नहीं सकती। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने जो हासिल किया, वो इस नुकसान से कहीं बड़ा है। आइए इसे कुछ प्वॉइंट्स में आपको समझाते हैं-

आतंकी ठिकानों का खात्मा: भारत ने पाकिस्तान के अंदर मस्जिदों में छिपे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। ये ठिकाने आतंकियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह थे, लेकिन भारत ने उन्हें ध्वस्त कर दिया। ये ऑपरेशन 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे।

पाकिस्तानी एयरबेस को नुकसान: भारत ने 11 पाकिस्तानी एयरबेस को निशाना बनाया। ये भारत की सैन्य रणनीति और तकनीकी क्षमता का सबूत है।

100+ आतंकी और पाक फौजी हुए ढेर: भारत ने न सिर्फ आतंकियों को मारा, बल्कि पाकिस्तानी फौज को भी भारी नुकसान पहुँचाया। ये भारत की जीत का साफ संदेश है।

सभी पायलट सुरक्षित: सबसे बड़ी बात, भारत के सारे पायलट सुरक्षित घर लौट आए। ये अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

ये नतीजे दिखाते हैं कि भारत ने न सिर्फ अपने मकसद पूरे किए, बल्कि दुनिया को बता दिया कि वो अपनी जनता की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। फिर कुछ नुकसान पर इतना हंगामा क्यों?

कॉन्ग्रेस ने पूछे सवाल, लेकिन इरादों पर उठ रहे सवाल

कॉन्ग्रेस ने सीडीएस के बयान के बाद इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “कॉन्ग्रेस लगातार सवाल पूछ रही है कि पहलगाम हमले के आतंकी कब पकड़े जाएँगे? पुलवामा में RDX किसने लाया? पाकिस्तान के साथ सीजफायर की शर्तें क्या थीं? सीजफायर किसके दबाव में हुआ? पहलगाम में अपने पति खोने वाली महिलाओं को न्याय मिला या नहीं? ऑपरेशन सिंदूर से क्या सबक सीखा गया, जैसा कि CDS ने भी कहा? अब कम से कम बीजेपी हमें सवाल पूछने वालों को देशद्रोही नहीं कहेगी।” इसके अलावा मल्लिकार्जुन खड़गे भी सवाल उठाने वाले नेताओं में शामिल हो गए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पवन खेड़ा की कुटिल मुस्कान पर भी नजर डालना चाहिए।

पवन खेड़ा के इस बयान से लगता है कि कॉन्ग्रेस को भारत की इस जीत से ज्यादा खुशी नहीं है। उनके सवालों का लहजा और उनकी बॉडी लैंग्वेज ये बताती है कि वो जेट्स के नुकसान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना चाहते हैं। लेकिन जनरल चौहान ने साफ कहा कि गलतियाँ सुधारी गईं और दो दिन बाद भारत के सारे जेट्स फिर से उड़ान भर रहे थे। ‘सारे’ का मतलब साफ है, फिर भी कॉन्ग्रेस इस बात को नजरअंदाज कर रही है। ऐसा लगता है कि वो जानबूझकर भारतीय सेना की ताकत पर सवाल उठाना चाहती है।

वैसे, खुद पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ मान चुके हैं कि भारत-पाकिस्तान के इस 4 दिनी जंग में पाकिस्तान को बहुत नुकसान हुआ। पाकिस्तान खुद भारत पर हमले करना चाहता था, लेकिन उससे पहले ही भारत ने पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर हमला बोलकर उसे पंगु कर दिया और पाकिस्तानी फौज जवाबी कार्रवाई तक में सक्षम नहीं रह गई। शरीफ ने अजरबैजान में साफ कहा कि भारत ने ब्रह्मोस से हमले किए, जिसने उसकी क्षमताओं को नष्ट कर दिया।

इजरायल की जीत से लें उदाहरण

साल 1967 की सिक्स-डे वॉर में इजरायल ने 250 लड़ाकू जेट्स के साथ सिर्फ 352 उड़ानों (Sorties) में 600 विमानों वाली दुश्मन सेनाओं को हरा दिया। उन्होंने दुश्मनों के 452 जेट्स को नष्ट किया, जिसमें से 79 फाइटर जेट्स को डॉग फाइट में ढेर कर दिए गए। इस दौरान इजरायल ने अपने 46 फाइटर जेट्स खोए। इजरायल ने इस युद्ध में शानदार जीत दर्ज की, भले ही उसे 46 फाइटर जेट्स का नुकसान हुआ। लेकिन क्या कभी किसी इजरायली ने सवाल उठाया कि ‘हमने कितने जेट्स खोए?’ नहीं! क्योंकि एक राष्ट्रवादी के लिए जीत मायने रखती है, न कि छोटे-मोटे नुकसान।

भारत के मामले में भी यही बात लागू होती है। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने अपने मकसद पूरे किए। आतंकी ठिकाने, एयरबेस, और दुश्मन सैनिकों को नुकसान पहुँचाया। यह जीत नहीं तो और क्या है? जो लोग भारत के जेट्स के नुकसान पर सवाल उठा रहे हैं, वे देश की ताकत और सेना के शौर्य को कमजोर करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? क्या वे नहीं चाहते कि भारत आतंकियों को सबक सिखाए? क्या वे चाहते हैं कि पाकिस्तान के झूठे दावों को सच माना जाए?

जो लोग भारत की सेना पर सवाल उठा रहे हैं, उनसे एक सीधा सवाल: आपके लिए देश की सुरक्षा और सम्मान ज्यादा जरूरी है या फिर सियासत और विदेशी फंडिंग से चलने वाला एजेंडा? अगर भारत ने आतंकी ठिकानों को तबाह किया, पाकिस्तान को सबक सिखाया और अपने सैनिकों को सुरक्षित वापस लाया, तो क्या यह जीत नहीं है? आप क्यों सिर्फ नुकसान की बात कर रहे हैं? क्या आप चाहते हैं कि भारत चुप रहे और आतंकी हमले सहता रहे? देश की सेना पर उंगली उठाने से पहले अपने इरादों पर सवाल उठाइए।

ऑपरेशन सिंदूर भारत की सैन्य ताकत और उसकी दृढ़ता का प्रतीक है। ये ऑपरेशन एक साफ संदेश है कि भारत अपनी जनता की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। जो लोग इस जीत को छोटा करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके लिए ये उपलब्धि दिल तोड़ने वाली हो सकती है। लेकिन राष्ट्रवादियों के लिए ये गर्व का पल है।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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