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भारत को इस्लामी मुल्क बनाने के लिए महिलाओं का दस्ता तैयार कर रही थी हैदराबाद की सईदा बेगम, ISIS-अलकायदा से मिले अल-मलिक के लिंक: सीरिया तक फैला है नेटवर्क

इस जाँच का सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘खवातीन’ नाम की महिला विंग का खुलासा है। यह एक अलग यूनिट थी, जिसे खास तौर पर महिलाओं की भर्ती और नेटवर्क विस्तार के लिए तैयार किया गया था। हैदराबाद की सईदा बेगम को इस महिला विंग की प्रमुख बताई गई है।

आंध्र प्रदेश में देशभर में फैले एक संगठित कट्टरपंथी और आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। विजयवाड़ा पुलिस और आंध्र प्रदेश काउंटर-इंटेलिजेंस की अगुवाई में चले इस ऑपरेशन में अब तक 6 राज्यों से 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके तार ISIS और अलकायदा जैसे अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़े होने की आशंका है। इस गिरोह का नाम अल मलिक इस्लामिक यूथ बताया जा रहा है।

यह गिरोह डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ओसामा बिन लादेन, जाकिर नाइक, इसरार अहमद शेख और अनवर अल-अवलाकी जैसे व्यक्तियों के वीडियो शेयर करता था, ताकि मुस्लिम युवाओं को जिहाद और उग्र विचारधारा की ओर आकर्षित किया जा सके। नेटवर्क के मास्टरमाइंड मोहम्मद रहमतुल्लाह शरीफ को 24 मार्च 2026 को विजयवाड़ा से अरेस्ट किया गया था।

उसके साथ मोहम्मद दानिश और मिर्जा सोहेल बेग को भी पकड़ा गया। जाँच में सामने आया है कि यह नेटवर्क भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने, विदेशी हैंडलर्स से संपर्क रखने, साइबर आतंकवाद को बढ़ावा देने और भविष्य में आतंकी हमलों की साजिश रचने में सक्रिय था।

इन शुरुआती गिरफ्तारियों के बाद जाँच का दायरा तेजी से बढ़ा और आंध्र प्रदेश पुलिस ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, बिहार और राजस्थान में टीमें भेजीं। इसके बाद विभिन्न राज्यों से अन्य संदिग्धों की पहचान की गई और कुल 12 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

इनमें अल-हकीम शुकूर, मोहम्मद हुजैफा, निंजा, हेमरॉक्सी, अबू मुहरिब, अबू बलुशी और सईदा बेगम जैसे नाम सामने आए हैं।

‘खवातीन’ महिला विंग: हैदराबाद की सईदा बेगम हेड

इस जाँच का सबसे चौंकाने वाला पहलू ‘खवातीन’ नाम की महिला विंग का खुलासा है। यह एक अलग यूनिट थी, जिसे खास तौर पर महिलाओं की भर्ती और नेटवर्क विस्तार के लिए तैयार किया गया था। हैदराबाद की सईदा बेगम को इस महिला विंग की प्रमुख बताई गई है।

जाँच में सामने आया है कि सईदा बेगम पाकिस्तान और जम्मू-कश्मीर में सक्रिय लोगों के संपर्क में थी और जिहादी गतिविधियों के समन्वय की योजना बना रही थी। एजेंसियों का मानना है कि इस महिला विंग के जरिए नेटवर्क समाज के एक नए वर्ग तक पहुँच बनाने की कोशिश कर रहा था।

विंग में शामिल महिलाओं को प्रचार, कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने और नए सदस्यों को जोड़ने की जिम्मेदारी दी गई थी।

डिजिटल प्लेटफॉर्म से कट्टरपंथ: 40+ अकाउंट से इस्लामिक राष्ट्र बनाने की तैयारी

जाँच में यह भी सामने आया कि इस नेटवर्क ने सोशल मीडिया को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया हुआ था। 40 से अधिक इंस्टाग्राम अकाउंट और कई एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए यह समूह सक्रिय रूप से कट्टरपंथी सामग्री फैला रहा था।

इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए ओसामा बिन लादेन, जाकिर नाइक, इसरार अहमद शेख और अनवर अल-अवलाकी जैसे व्यक्तियों के वीडियो शेयर किए जाते थे, ताकि मुस्लिम युवाओं को जिहाद और उग्र विचारधारा की ओर आकर्षित किया जा सके।

सदस्य मास्क पहनकर ISIS के झंडे के साथ तस्वीरें पोस्ट करते थे और ‘वन उम्माह’ जैसे नारे लगाते थे, जिससे एक वैश्विक इस्लामिक राज्य यानी ‘खिलाफत’ की मंशा जाहिर होती थी। समूह ने आपत्तिजनक और भड़काऊ सामग्री भी शेयर की थी, जिसमें राष्ट्रगान का अपमान करते हुए गाली-गलौज के साथ गाने और राष्ट्रीय ध्वज को जलाने जैसे वीडियो शामिल थे।

विदेशी हैंडलर्स, ‘हिजरत’ और आतंक प्रशिक्षण का प्लान

जाँच एजेंसियों के मुताबिक इस नेटवर्क के सीधे संपर्क पाकिस्तान, अफगानिस्तान, सीरिया, बांग्लादेश और UAE में बैठे विदेशी हैंडलर्स से थे। इन हैंडलर्स के नाम अल-हकीम शुकूर, अबू बलुशी और अन्य उपनामों से सामने आए हैं। इन विदेशी संपर्कों के जरिए युवाओं को ‘हिजरत’ यानी भारत छोड़कर बाहर जाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

वहाँ पहले मजहबी तालीम और फिर आतंकी प्रशिक्षण देने का वादा किया गया था। प्रशिक्षण में स्नाइपर राइफल का इस्तेमाल, हथियार चलाना और IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाना शामिल था। जाँच में ऐसे डिजिटल दस्तावेज और वीडियो बरामद हुए हैं, जिनमें ‘ब्लैक पाउडर’ और बम बनाने की विस्तृत जानकारी दी गई थी।

हैंडलर्स ने यह भी आश्वासन दिया था कि भारत में संभावित हमलों के लिए हथियार पाकिस्तान और अफगानिस्तान से उपलब्ध कराए जाएँगे। एजेंसियों को शक है कि इस नेटवर्क से जुड़े कुछ लोग पहले से ही विदेशों के मदरसों में कथित प्रशिक्षण ले रहे थे।

साइबर आतंकवाद, हैकिंग और तकनीकी साजिश, आतंकी साजिश का बड़ा मकसद: ‘खिलाफत’ की स्थापना

यह नेटवर्क केवल वैचारिक प्रचार तक सीमित नहीं था, बल्कि साइबर आतंकवाद की दिशा में भी सक्रिय था। जाँच में सामने आया कि समूह के सदस्य सरकारी वेबसाइटों को हैक करने और साइबर हमले करने की योजना बना रहे थे। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए ऐसे कंटेंट भी साझा किए गए, जिनमें साइबर अटैक को अंजाम देने के तरीके बताए गए थे।

इससे साफ होता है कि यह नेटवर्क तकनीकी रूप से भी सक्षम बनने की कोशिश कर रहा था और केवल भौतिक हमलों तक सीमित नहीं था। जाँच एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क का अंतिम उद्देश्य भारत में एक इस्लामिक राज्य या ‘खिलाफत’ स्थापित करना था।

‘वन उम्माह’ जैसे नारों और ISIS के प्रतीकों के इस्तेमाल से यह इरादा स्पष्ट होता है कि यह समूह एक वैश्विक कट्टरपंथी विचारधारा से प्रेरित था। एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क भारत तक सीमित नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जो विचारधारा, प्रशिक्षण और संसाधनों के स्तर पर एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

फंडिंग, जाँच और आगे की कार्रवाई

सुरक्षा एजेंसियाँ अब इस नेटवर्क की फंडिंग के स्रोतों का पता लगाने में जुटी हैं। यह भी जाँच की जा रही है कि विदेशी हैंडलर्स से पैसे किस माध्यम से भारत में भेजे जा रहे थे और किन-किन लोगों तक यह फंडिंग पहुँची। इसके अलावा एजेंसियाँ उन युवाओं की पहचान करने की कोशिश कर रही हैं, जिन्हें इस नेटवर्क ने निशाना बनाया था या जो इसके संपर्क में आए थे।

संभावना है कि आने वाले समय में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। फिलहाल जाँच एजेंसियाँ इस नेटवर्क की हर कड़ी को जोड़ने, इसके पूरे तंत्र को समझने और इसे पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए देशभर में व्यापक स्तर पर कार्रवाई कर रही हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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