Saturday, July 24, 2021
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‘फिर से अजान होगी, फिर से नमाज होगी – इंशाअल्लाह’: #BabriZindaHai ट्रेंड के साथ ऐसे फैलाया गया नफरत

तथाकथित पत्रकार इतने भड़क गए कि उन्होंने राम मंदिर भूमि पूजन को "आतंकवाद का कार्य" तक कह दिया। एक के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने फैसला जरूर दिया है लेकिन इंसाफ नहीं।

अयोध्या में आज इतिहास रच गया है। वर्षों तक अदालत में मामला चलने के बाद आज (5 अगस्त, 2020) अयोध्या में प्रधानमंत्री ने राममंदिर की आधारशिला रख दी है। पूजा विधिवत सम्पन्न हो चुकी है। अयोध्या को दीया और फूलों से सजाया गया है। आज का दिन दीपावाली से कम नहीं है।आज जब पूरी दुनिया राम की भक्ति में डूबी हुई है और उत्साह के साथ जश्न मना रही है, ऐसे में समाज का एक विशेष वर्ग इस पावन पर मातम मना रहा है।

आज रामजन्म भूमि के शिलान्यास के शुभ मौके पर मुस्लिम समुदाय के लोग सोशल मीडिया के जरिए #ReturnBabriLandToMuslims, #5AugustBlackDay और #BabriZindaHai जैसे ट्रेंड चला कर समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे हैं।

जैसा कि अपेक्षित था, कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने भूमिपूजन के दौरान ट्विटर पर जहर उगलना शुरू कर दिया है। वे रामजन्म भूमि निर्माण स्थल पर हुए भूमिपूजन को सेक्युलरिज्म की हत्या करार दे रहे हैं।

इससे पहले राम जन्मभूमि के फैसले के बाद दुख मना रहे अली सोहराब ने ट्वीटर के जरिए लोगों को बरगलाया था। जिसके लिए उन्हें 48 घंटे के पुलिस रिमांड पर भी भेजा गया था। वहीं अब उसी अली सोहराब, ने फर्जी न्यूज पेडलर के माध्यम से तमाम नफरत भरे ट्वीट्स को हैशटैग के साथ पोस्ट किया है। जैसे कि-: 5AugustBlackDay #ReturnBabriLandToMuslims and #BabriZindaHai

अली सोहराब इतने भड़क गए कि उन्होंने राम मंदिर भूमि पूजन को “आतंकवाद का कार्य” तक कह दिया।

इसके अलावा तथाकथित पत्रकार ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि अपने आप को अल्पसंख्यकों का मसीहा कहने वाले कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो ने भी भूमिपूजन का विरोध नहीं किया। बल्कि ये लोग उल्टा राम मंदिर के समर्थन में लिख रहे हैं।

इसी तरह, अन्य मुस्लिम कट्टरपंथी भी यह मानने से इनकार कर रहे कि राम जन्मभूमि पर बने अवैध ढाँचे यानी बाबरी मस्जिद का कई समय पहले ही विध्वंस हो चुका है। कट्टरपंथी यह बात पसंद करे या नहीं, लेकिन अयोध्या में भव्य राम मंदिर अब एक वास्तविकता है, जिसे नकारा नहीं जा सकता।

भारतीय लोकतंत्र में 5 अगस्त को काला दिन मानने वाले यह इस्लामी इस बात विश्वास कर रहे हैं कि एक दिन ऐसा आएगा जब बाबरी मस्जिद को दोबारा से बनाया जाएगा।

खैर, अयोध्या में राममंदिर भूमिपूजन हो चुका है। इस्लामवादी कट्टरपंथी मानसिकता वाले लोग इससे खुश हो या दुखी राम मंदिर की निरपेक्षता निर्विवाद है। बता दें, राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की लड़ाई पाँच सौ शताब्दियों तक चली।

यह उस सपने की पूर्ति है जो हिंदू पीढ़ी द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी पोषित किया गया है। इस पवित्र भूमि पर बने राममंदिर को सदियों पहले मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा ध्वस्त कर दिया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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