Tuesday, July 23, 2024
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गाजा का समर्थन करने वाले उस्मान ख्वाजा को केशव महाराज से दिक्कत, कारण – बैट पर लिखा है ‘ॐ’: इंस्टाग्राम पर पोस्ट लिख ICC पर निकाला गुस्सा

36 साल के उस्मान ख्वाजा मूल रूप से पाकिस्तानी मूल के हैं। वो 1986 में पाकिस्तान में पैदा हुए थे। जबकि यहाँ इस बात पर गौर करना जरूरी है कि 'ॐ' को आईसीसी नियमों के तहत प्रतिबंधित नहीं किया गया है क्योंकि इसका प्रदर्शन किसी राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय वजह को बढ़ावा देने के लिए नहीं है।

पाकिस्तान में जन्मे ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने इंस्टाग्राम से 25 दिसंबर ‘क्रिसमस की शुभकामनाएँ’ तो दी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट कंट्रोल काउंसिल (ICC) पर अपना गुबार निकालने से खुद को नहीं रोक पाएँ। इंस्टाग्राम पर उन्होंने ICC पर तंज कसा ही, साथ ही दक्षिण अफ़्रीकी हिंदू क्रिकेटर केशव महाराज को भी बीच में घसीटने से बाज नहीं आए।

दरअसल ‘गाजा मेरे दिल के करीब है’ कहने वाले उस्मान ख्वाजा ICC ने पाकिस्तान के साथ हुए प्रैक्टिस और टेस्ट मैच में फिलिस्तीन के समर्थन में उतरने पर कड़ी फटकार लगाई थी। उस्मान ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर क्रिसमस डे को अपने दबे गुस्से के इजहार करने के लिए चुना। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर आईसीसी पर तंज कसते हुए हैशटैग ‘इंकॉन्सटिटेंट’ और ‘डबल स्टैंडर्ड’ हैशटैग का इस्तेमाल किया है।

उन्होंने ICC पर दोहरा रवैया रखने का आरोप लगाते हुए संस्था को गलत साबित करने की कोशिश की है। इतना ही नहीं, इस पोस्ट के लिए उन्होंने गाना भी छाँटकर चुना है। उनकी इस पोस्ट के बैकग्राउंड में कान्ये वेस्ट (Kanye West) का ‘कैन नॉट टेल मी नथिंग’ गाना बज रहा था तो कैप्शन में लिखा था, “सभी को मेरी क्रिसमस। कभी-कभी आपको बस हँसना ही पड़ता है। बॉक्सिंग डे पर मिलते हैं! असंगत, दोहरा मापदंड।”

एक तरह से उस्मान ख्वाजा ने ICC पर आरोप लगाया कि इसी तरह की चीजों पर दूसरे खिलाड़ियों को छोड़ दिया गया, जबकि उन पर कार्रवाई की गई। अपनी बात को साबित करने के लिए उन्होंने 2 अन्य क्रिकेटरों के साथ दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेटर केशव महाराज को भी बीच में घसीट लिया है। इस पोस्ट में उन्होंने हिंदू धर्म से आने वाले केशव की बल्ले पर ‘ॐ’ स्टिकर लिखी फोटो डाली है।

वहीं ऑस्ट्रेलियाई टीम के साथी मार्नस लाबुशेन और वेस्टइंडीज के बल्लेबाज निकोलस पूरन के बल्ले पर ईगल, बाइबिल की वर्सेज और ‘क्रॉस’ स्टिकर लगी फोटो डालते हुए उन्होंने ICC पर हमला बोला है। इस पोस्ट के जरिए ख्वाजा ने तर्क देने की कोशिश की कि या तो उन्हें फिलिस्तीनियों का ‘गैर-राजनीतिक’ तौर पर समर्थन करने दिया जाना चाहिए था या फिर आईसीसी को मैच के दौरान खिलाड़ियों के निजी संदेश देने के मामले पर पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

इस पोस्ट में ख्वाजा ने साफ इशारा किया है कि आईसीसी को अपने फैसलों को एक शख्स पर सीमित न रखते हुए इसे बड़े पैमाने पर लागू करना चाहिए। उनकी पोस्ट में डाली गई केशव महाराज की बल्ले पर ‘ॐ’ वाली, ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर मार्नस लाबुशेन और वेस्टइंडीज निकोलस पूरन की बल्ले पर बाइबिल की वर्सेज वाले स्टिकर फोटो डालने से साफ है कि वो उन पर प्रतिबंध लगाने की वकालत कर रहे हैं।

बताते चलें कि क्रिकेट विश्व कप 2023 के दक्षिण अफ्रीका और पाकिस्तान के बीच हुए मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने पाकिस्तान को 1 विकेट से हरा दिया था। इस मैच में भारतीय मूल के दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी केशव महाराज ने खूब वाहवाही लूटी थी। वो धैर्य के साथ खेले ही नहीं बल्कि मैच के दौरान ही केशव महाराज ने बजरंग बली को याद भी किया। इस पर उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ अपने ‘ॐ’ लिखे बैट से चौका भी लगाया।

बताते चलें कि 36 साल के उस्मान ख्वाजा मूल रूप से पाकिस्तानी मूल के हैं। वो 1986 में पाकिस्तान में पैदा हुए थे। जबकि यहाँ इस बात पर गौर करना जरूरी है कि ‘ॐ’ को आईसीसी नियमों के तहत प्रतिबंधित नहीं किया गया है क्योंकि इसका प्रदर्शन किसी राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय वजह को बढ़ावा देने के लिए नहीं है।

ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज उस्मान ख्वाजा ने पोस्ट में आईसीसी के उस नियम को भी शेयर किया जो क्रिकेटरों को अपने कपड़ों या अन्य साजोसामान पर निजी संदेश लिखने या उनके प्रदर्शन करने से रोकता है। ख्वाजा की हालिया पोस्ट पर डाले गए आईसीसी के इस नियम के मुताबिक, “खिलाड़ियों और टीम के अधिकारियों को निजी संदेश देने और दिखाने वाली किसी भी तरह की सामग्री को अपने कपड़े और अन्य सामानों पर इस्तेमाल करने की मंज़ूरी नहीं दी जाएगी। फिर भले ही ऐसे संदेश कपड़ों पर चिपकाए गए ही क्यों न हों।”

इसमें आगे कहा गया है कि इस तरह के संदेशों को खास तरह के कपड़ों या अन्य वस्तुओं (उदाहरण के लिए आर्मबैंड) के इस्तेमाल के जरिए शब्दों, प्रतीक, ग्राफिक मैसेज, फोटोज और निजी संदेशों के जरिए भी नहीं प्रदर्शित किया जाएगा। इसके लिए पहले से ही टीम अधिकारी बोर्ड और ICC क्रिकेट संचालन विभाग दोनों से मंजूरी लेना जरूरी होगा। उन संदेशों के लिए मंजूरी नहीं दी जाएगी जो राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय गतिविधियों या कारणों से जुड़े हैं।

दरअसल ‘गाजा मेरे दिल के करीब है’ कहने वाले उस्मान ख्वाजा ने पाकिस्तान के खिलाफ पर्थ में हुए टेस्ट मैच से पहले प्रैक्टिस मैच में फिलिस्तीन के समर्थन वाले जूते पहने थे। ICC ने उनके इन जूतों को पहन प्रैक्टिस या फिर आगामी टेस्ट मैच में जाने को लेकर प्रतिबंध लगा दिया। वो अपनी हरकतों से बाज नहीं आए और पाकिस्तान के खिलाफ पर्थ में खेले गए पहले टेस्ट मैच के वक्त काली पट्टी बाँधकर क्रिकेट खेलने मैदान में उतर आए।

उन पर आईसीसी के नियमों को तोड़ने का आरोप लगाया गया था। उनकी इस हरकत पर आईसीसी ने उन्हें कसकर फटकार लगाई थी। दरअसल, ऐसा कर के ख्वाजा का इरादा इज़रायल-हमास युद्ध के बीच फिलिस्तीनियों को समर्थन देने का था। बताते चलें कि पूर्व खिलाड़ियों, परिवार के सदस्यों या अन्य शख्सियतों की मौत पर शोक जताने के लिए खिलाड़ी काली पट्टी पहनते हैं, लेकिन इसे पहनने से पहले उन्हें राष्ट्रीय बोर्ड और आईसीसी से मंजूरी की जरूरत नहीं होती है।

उस्मान ख्वाजा ने बाद में अपनी सफाई में कहा था, “मेरा कोई एजेंडा नहीं था। मैं धर्म को भी इससे बाहर रखता हूँ। मैं ऐसा इसलिए करता हूँ क्योंकि ये मेरे दिल के अंदर जाकर लगा है। मैं जब इंस्टाग्राम पर देखता हूँ कि छोटे-छोटे बच्चों की मौत हो रही है। यह सब मेरे दिल को गमजदा करता है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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