Saturday, May 18, 2024
Homeसोशल ट्रेंड'इस्लाम की उदारता से खतरे में आया हिंदुत्व का अस्तित्व' : Vision IAS में...

‘इस्लाम की उदारता से खतरे में आया हिंदुत्व का अस्तित्व’ : Vision IAS में ‘भक्ति आंदोलन’ के नाम से पढ़ाया जा रहा इस्लामी प्रोपेगेंडा

सोशल मीडिया पर ऐसी वीडियो सामने आने के बाद लोग दो चीजों पर सवाल कर रहे हैं। एक बात तो ये कि आखिर हिंदुत्व को इतना नीचे दिखाने का प्रयास बुद्धिजीवियों द्वारा क्यों किया जा रहा है? और दूसरा सवाल ये कि इस्लाम का महिमामंडन करके छात्रों का ब्रेनवॉश इस स्तर तक कैसे किया सकता है।

सिविल परीक्षाओं के लिए अभ्यार्थियों को तैयार करने के नाम पर इस्लामी प्रोपेगेंडा फैलाने का एक मामला सोशल मीडिया पर सामने आया है। एक वीडियो है जिसे फिल्म निर्देशक विवेक अग्रनिहोत्री ने भी शेयर की है। वीडियो Vision IAS कोचिंग सेंटर की है। इसमें महिला टीचर छात्रों को ‘भक्ति आंदोलन’ पढ़ा रही हैं और समझा रही हैं कि कैसे ये आंदोलन इस्लाम में पसरी लिबर्टी के कारण शुरू हुआ।

वीडियो में महिला टीचर पूछती हैं कि बताओ भक्ति आंदोलन का उद्देश्य क्या था। बच्चे जब जवाब में समानता बोलते हैं तो टीचर कहती हैं। सातवीं-आठवीं शताब्दी में कुछ नहीं था, इस्लाम आ गया था। इसलिए ये शुरू हुआ। वह कहती हैं, “इस्लाम था बहुत लिबरल। वह समानता के बारे में बात करता था। कोई जाति व्यवस्था भी नहीं थी। अगर इस्लाम पढ़ा होगा तो एक चेरामन जुमा मस्जिद है जिसका मिनिएचर आपके पीएम ने सऊदी किंग को दिया । ये भारत का पहला मस्जिद है जो 7वीं-8वीं शताब्दी में बना। तब इस्लाम आया नहीं था। लेकिन इस्लाम आना शुरू हो गया था। उस समय वह उदारवाद, समानता के बारे में बात कर रहे थे। वह किसी भी तरह की कठोरता और जातिवाद से मुक्त थे। इस्लाम की एक खासियत थी जिसमें वह ईश्वर (अल्लाह) के प्रति पूरे समर्पण को लेकर बात करते थे। वे एक ईश्वर के कॉन्सेप्ट पर बात कर रहे थे।”

महिला टीचर कहती हैं, “इस्लाम का कहना था कि अगर एक ही अल्लाह है। उसी ने सबको बनाया है। इसका मतलब है कि सब एक ही हैं। वह सार्वभौमिक भाईचारे के बारे में बात कर रहा था। यही वजह है कि इस्लाम की ओर लोग आकर्षित होने लगे। जो लोग निम्न वर्ग के थे वो भी अपना स्तर बढ़ाने के लिए इस्लाम में आने लगे। उस समय था जब हिंदू सभ्यता के अस्तित्व पर खतरा आ गया। जब लोगों को कछ समझ नहीं आया तो उन्होंने भक्ति आंदोलन की शुरुआत की। वह बताना चाहते थे कि इस्लाम जैसा ही हिंदू धर्म है। ज्यादा फर्क नहीं है। थोड़ा 1 भक्ति आंदोलन में भी पूर्ण समर्पण और पूर्ण आस्था की बात हुई।”

बता दें कि सोशल मीडिया पर ऐसी वीडियो सामने आने के बाद लोग दो चीजों पर सवाल कर रहे हैं। एक बात तो ये कि आखिर हिंदुत्व को इतना नीचे दिखाने का प्रयास बुद्धिजीवियों द्वारा क्यों किया जा रहा है? और दूसरा सवाल ये कि इस्लाम का महिमामंडन करके छात्रों का ब्रेनवॉश इस स्तर तक कैसे किया सकता है। लोग तंज कस रहे हैं कि गजनवी और बाबर न केवल सेकुलर लोग थे बल्कि लिबरल भी थे। उन्होंने भातीयों को सेकुलरिज्म का पाठ पढ़ाया और भारत में चल रहे भक्ति आंदोलन से निजात दिलाई।

जानकारी के अनुसार, वीडियो में नजर आने वाली महिला टीचर का नाम स्मृति शाह है। जो पूर्व में आईएस परीक्षाओं की तैयारी करती थीं, लेकिन उनका एग्जाम नहीं क्लियर हुआ। ट्विटर पर इन्हें लेकर कहा जा रहा है कि स्मृति भारतीय समाज के बारे में बारे में विजिन आईएएस में पढ़ाती हैं। वह वामपंथी हैं और मोदी/भाजपा से नफरत करने वाली हैं। एक यूजर कहता है, “मैंने पता नहीं इनके 20 लेक्चर कैसे देखे वो भी 2019 इलेक्शन से ठीक पहले। सारे लेक्चर सिर्फ राजनैतिक भाषण और व्यंग्य जैसे थे।”

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘₹100 करोड़ का ऑफर, ₹5 करोड़ एडवांस’: कॉन्ग्रेस नेता शिवकुमार की पोल खुली, कर्नाटक सेक्स सीडी में PM मोदी को बदनाम करने का दिया...

BJP नेता देवराजे गौड़ा ने कहा है कि पीएम मोदी को बदनाम करने के लिए कर्नाटक के डेप्यूटी सीएम डीके शिवकुमार ने उन्हें 100 रुपए का ऑफर दिया था।

‘जिसे कहते हैं अटाला मस्जिद, उसकी दीवारों पर त्रिशूल-फूल-कलाकृतियाँ’: ​कोर्ट पहुँचे हिंदू, कहा- यह माता का मंदिर

जौनपुर की अटाला मस्जिद पर हिंदुओं ने दावा पेश किया है। इसे माता का मंदिर बताया है। मस्जिद की दीवारों पर हिंदू चिह्न होने की बात कही है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -