असम ने जब बांग्लादेशी नागरिकों को बाहर निकालने के लिए आंदोलन शुरू किया तो 22 साल के खरगेश्वर तालुकदार का बलिदान पहला दर्ज किया गया। इसी दिन को याद करते हुए शहीद दिवस मनाया जाता है।
1983 में असम में हुए 3 महीने के हिंसक आंदोलन के पीछे तिवारी रिपोर्ट में आसु और एजेएसपी को जिम्मेदार ठहराया है। हालाँकि मूल वजह असमियों के मन में बैठ गया 'भय' था।