दरअसल द प्रिंट और शिवम विज का सोचना यह है कि एक दशक पुरानी बात, जब समय और परिस्थितियाँ अलग थीं, उस समय की घटनाओं और परिस्थितियों का हवाला देते हुए आज के समय में वो अपने प्रोपेगेंडा को फैलाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।
केंद्र सरकार को लम्बे समय से कश्मीर के मामले पर घेरने वालों को जवाब देते हुए उन्होंने राज्य में लगे प्रतिबंधों पर कहा कि इन्टरनेट कभी भी 40 हज़ार लोगों की जान से ज्यादा कीमती नहीं हो सकता। उल्टे उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में खून की नदियाँ बहने के दावे करने वाले गुलाम नबी आज़ाद आज कहाँ हैं?
26/11 की बरसी पर आतंकियों ने घाटी में दो धमाके कर दो लोगों की हत्या कर दी है। साथ ही इन धमाकों में कई लोग घायल भी हुए हैं। दोनों ही धमाके सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील इलाकों अनंतनाग और राजधानी श्रीनगर में हुए हैं।
सीटीडी एडवाइज़र्स नामक इस संस्था का गठन पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश बैंकर शोएब बाजवा ने पिछले साल किया था। जेकेएलएफ जैसा आतंकी संगठन संस्था के कार्यक्रम की प्रशंसा कर चुका है।
मेहराजुद्दीन को गोली पॉइंट-ब्लैंक पर यानी बेहद करीब से मारी गई है। इस घटना के बाद आतंकित लोगों ने इलाके के काम-धंधे, दुकानें आदि बंद कर दिए हैं। हत्या उनकी दुकान में ही की गई।
पाकिस्तान के समर्थन में प्रोपेगंडा NDTV के लिए नया नहीं है। हाल ही में पाकिस्तान ने एनडीटीवी की ही एक फुटेज को अपने भारत-विरोधी एजेंडा को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया था। निधि ने अपने चैनल के 'काम' को आगे बढ़ाते हुए...
जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने कहा है कि घाटी में पर्यटकों और बागानों को निशाना बनाने के बाद आतंकवादी अब जल और विद्युत आपूर्ति समेत पूरे बुनियादी ढांचे काे तबाह करने की कोशिश में हैं।
याचिका में कहा गया है कि राष्ट्रपति को अनुच्छेद 370 से ही एक पब्लिक नोटिफिकेशन के ज़रिए उसे निरस्त करने की शक्ति मिली हुई थी। साथ ही कहा गया है कि यह एक अस्थाई प्रावधान था जिसे जोड़ने का मकसद राज्य में शांति, सुरक्षा और कानून व्यवस्था था।