"आरक्षण का हक लेने के लिए हमारे समाज ने काफी संघर्ष किया। 73 लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी। हम किसी भी हाल में दूसरी जातियों को इसमें (विशेष पिछड़ा वर्ग) आरक्षण नहीं लेने देंगे।"
स्पेशल वीवीआईपी सिक्योरिटी यूनिट के कमांडोज़ की एक टुकड़ी राहुल गाँधी के तुग़लक़ लेन स्थित आवास पर तैनात है। प्रियंका गाँधी के लोधी एस्टेट घर की सुरक्षा-व्यवस्था भी दूसरी टीम ने सॅंभाल ली है।
कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी को कहा है कि अगर महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस सरकार में शामिल होने में विफल रहती है तो राज्य में पार्टी का अस्तित्व ख़त्म हो जाएगा। हालाँकि, कॉन्ग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के विधायकों की राय का विरोध किया और...
शिव सेना भले ही कपिल सिब्बल के साथ अपना इतिहास भूल गई हो लेकिन लोगों को याद है। और वे मज़े लेकर उसे भी याद दिला रहे हैं। बस 5 साल पहले शिव सेना ने कपिल सिब्बल को 'शराब पीकर उत्पात मचाने वाला बंदर' कहा था।
चारों मुख्य पार्टियों भाजपा, कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना में सबसे कम यानी केवल 44 विधायक कॉन्ग्रेस के जीते हैं, और राज्यपाल के राष्ट्रपति शासन से पहले की मीटिंग में न बुलाने पर बिफ़र ऐसे रहे हैं मानो बैठक में होते तो दावा सीएम की दावेदारी का पेश कर देते!
"कॉन्ग्रेस हमेशा ही देश से पहले पार्टी को तवज्जो देती है। कॉन्ग्रेस, बीजेपी को महाराष्ट्र ‘थाली में सजाकर’ दे रही है। महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर कॉन्ग्रेस की शिथिलता से सिद्ध हो गया कि कॉन्ग्रेस के खात्मे का समय आ गया है।"
शिवसेना ने एक बड़ी कीमत चुकाई है। जिसकी सरकार को बाला साहेब ने हिजड़ों का शासन कहा उसके सामने झुकना पड़ा। मातोश्री अब 'मातेश्री' का शरणागत है। फिर भी हासिल कुछ नहीं हुआ।
राजस्थान में (जहाँ कॉन्ग्रेस का शासन है) इतिहास की पाठ्य पुस्तकों से उनके नाम से 'वीर' हटा दिया गया और अब इतिहासकारों की स्वायत्त संस्था ICHR को राजस्थान यूनिवर्सिटी ने कह दिया है कि यूनिवर्सिटी कैम्पस में सावरकर छोड़ कर किसी भी विषय पर सम्मेलन हो सकता है।
NCP के एक नेता का कहना है कि जब तक तीनों पार्टियाँ- कॉन्ग्रेस, NCP और शिवसेना, सरकार में शामिल नहीं हो जातीं, तब तक कोई स्थिरता नहीं आएगी। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार का हिस्सा हो।"
कॉन्ग्रेस के सभी विधायक जयपुर में एक रिसॉर्ट में रुके हुए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेतागण वहीं पर नव-निर्वाचित विधायकों के साथ लगातार मंत्रणा कर रहे हैं। अभी उद्धव ठाकरे कॉन्ग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद वो आगे की रणनीति तैयार करेंगे।