श्री लंका में बुर्क़े पर प्रतिबंध लगाने की बात चल ही रही थी कि इसी बीच केरल के एक अल्पसंख्यक कॉलेज ने बुर्क़ा पहनकर आने पर पाबंदी लगाने से संबंधित सर्कुलर जारी किया गया था।
कुछ रोज पहले श्री लंका में आतंकी हमला हुआ था जिसमें 300 से अधिक लोगों के मारे जाने की ख़बर थी और लगभग 500 लोग घायल हुए थे। वहाँ की सरकार ने मुँह ढकने वाले हर तरह के कपड़ों पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला लिया था।
मृतकों के पहचान 45 साल के बेन्नी और 38 साल की अमला के रूप में हुई है। खबरों के अनुसार दोनों की शादी अलग-अलग जगह हो चुकी है, लेकिन उनके बीच अवैध संबंध था।
कॉन्ग्रेस का हिन्दू आस्था और उनके प्रतीकों के अपमान के प्रति आक्रोश महज एक दिखावा है। उनका मंदिर-मंदिर दौड़ लगाना भी केवल वोट बैंक को आकर्षित करने की कोशिश है जबकि बार-बार उनके व्यवहार से उनका हर झूठ बाहर आता रहता है। यह घटना नई नहीं है ऐसा पहले भी हो चुका है। एक गौहत्या करने वाले के साथ की उनकी तस्वीरें उनके चरित्र के दोहरेपन को उजागर करती हैं।
सुधाकरण द्वारा पोस्ट यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग सुधाकरण के महिला विरोधी बयान की आलोचना कर रहे हैं। महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए सुधाकरण द्वारा इस्तेमाल की गई वीडियो पर मुकदमा दायर किया है।
संगठन के महासचिव अलीक्कूटी मुसलियर ने इस मामले पर कहा, “हम धार्मिक मामलों में कोर्ट के हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं कर सकते हैं। हमें अपने धार्मिक नेताओं के निर्देशों को मानना चाहिए।”
सवाल यह भी है कि क्या हम खुद अपने मंदिरों पर जारी हमलों को उसी तरह देखने और बयान करने की हिम्मत जुटाएँगे जैसा वो सचमुच हैं? सेकुलरिज्म का टिन का चश्मा हम अपनी आँख से उतारेंगे क्या?
दोनों नेताओं की पार्टी के मध्य अनेकों मतभेदों के बाद भी निर्मला सीतारमण का थरूर से मिलना उन्हें भावुक कर गया। उन्होंने ट्विटर पर अपनी तस्वीर को साझा करने के साथ कहा कि राजनीति में शिष्टाचार एक दुर्लभ गुण है।
साल 2009 में केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद चुने जाने वाले शशि थरूर एक बार फिर यहाँ से अपनी किस्मत आजमाने को तैयार हैं। वे तिरुवनंतपुरम से कॉन्ग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार हैं।