“ये भारतीय छात्र हैं, इन्हें एयरपोर्ट ले जाया जाएगा और वहाँ से फिर इन्हें इनके घर पहुँचाया जाएगा। बांग्लादेश वाले भी चले जाएँगे। एक हम पाकिस्तानी हैं, जो यहाँ पर फँसे हैं। जिनकी सरकार कहती है कि आप मरो या जियो, हम आपको नहीं निकालेंगे। शेम ऑन यू पाकिस्तान, सीखो भारत से कुछ सीखो।”
आईटीबीपी ने संक्रमित भारतीय मरीजों को बुनियादी चिकित्सा सेवा देने के लिए दिल्ली में 600 बिस्तरों वाला अलग केंद्र तैयार किया है। चीन से भारत पहुँचे यात्रियों को दक्षिण पश्चिम दिल्ली के छावला इलाके में 14 दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रखा जाएगा।
पाकिस्तान ने कहा है कि वह चीन में फँसे अपने नागरिकों को नहीं निकालेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन में फँसे पाकिस्तानियों में मुख्य रूप से छात्र हैं जो वुहान शहर में फँसे हुए हैं। वुहान चीन का वह शहर है जहाँ से यह महामारी चीन के बाकी हिस्सों समेत दुनियाभर के शहरों में पहुँची है।
थाईलैंड, वियतनाम, सिंगापुर, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, नेपाल, फ्राँस और संयुक्त राज्य अमेरिका में भी इस वायरस के होने की पुष्टि की गई है। थाईलैंड में पाँच, सिंगापुर और ताइवान तीन में तीन, जापान, वियतनाम, दक्षिण कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका में दो-दो मामले सामने आए हैं।
चीन में फैले कोरोना वायरस को लेकर भारत पहले ही अपने सभी एयरपोर्ट्स पर अलर्ट जारी कर चुका है, जिसके तहत चीन से आने वाले सभी यात्रियों की गहनता से जाँच की जा रही है। वहीं इसी बीच दिल्ली एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि हम इसे लेकर गंभीर हैं और इसके इलाज के भी हमने सभी इंतजाम पहले से ही कर लिए हैं।
चीन में अचानक से फैला कोरोना वायरस अब तक अकेले चीन में ही 9 लोगों की जान ले चुका है। तेजी से दूसरे देशों में फैल रहे इस वायरस को लेकर भारत सरकार ने सभी एयरपोर्ट्स पर अलर्ट जारी कर दिया है, जिसके बाद से चीन से आने वाले सभी यात्रियों की गहनता से जाँच की जा रही है।
ताइवान और हॉन्ग कॉन्ग पर कब्जा करके चीन एक ग्रेटर चीन का सपना देख रहा था। मगर दोनों जगहों की जनता ने लोकतंत्र समर्थक उम्मीदवारों को जीत दिलाकर चीन के अरमानों पर पानी फेर दिया। यहाँ के मतदाताओं ने हॉन्ग कॉन्ग की तरह ही चीन के ‘एक देश दो सिस्टम’ की राजनीतिक व्यवस्था को खारिज कर दिया है।
चीनी प्रशासन गर्भपात को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। उनकी मुस्लिम होने की पहचान को समय से पहले ही मिटाया जा रहा है। उनके बच्चों को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा है।
हॉस्टल की पहली कक्षा में एक बच्ची है। उसके क्लास के दोस्त उसे बहुत प्यार करते हैं और वह पढ़ने-लिखने में भी अच्छी है, लेकिन वह अकेले में रोया करती है। दरअसल, वह अपनी माँ के पास जाना चाहती है, जिसे चीन में एक डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। लेकिन...