नरोत्तम मिश्रा ने कहा है, "ओवैसी को साक्षी पर बोलते नहीं सुना। दमोह पर लंबी तकरीर कर रहे हैं। साक्षी, श्रद्धा पर तकरीर नहीं की। उनकी ये पीड़ा है। उनकी यही मानसिकता जिहादी कहलाती है।"
एक छात्रा ने ये भी बताया कि हर शुक्रवार (जुमा) को स्कूल में नमाज पढ़ना अनिवार्य था। हिंदी-अंग्रेजी से ज्यादा उर्दू-अरबी सिखाया जाता था। प्रार्थना में दुआ पढ़ने को कहा जाता था।
लड़की ने दावा किया है कि वह आसिफ के खिलाफ पहले भी मुकदमा दर्ज करवा चुकी है और वह जेल भी जा चुका है। लेकिन जमानत पर बाहर आने के बाद फिर परेशान कर रहा है।