एक ऐसा समय था जब पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नाम पर अरबों डॉलर मिलते थे। धीरे-धीरे भारत ने उसे बेनकाब करना शुरू किया और अब इस्लामी मुल्क भी उसे लताड़ते हैं।
सभी मामलों की जाँच करने के बाद पता चला कि सभी आरोपितों का जुड़ाव शहर की ऐसी मस्जिदों से है, जहाँ पाकिस्तान कट्टरपंथी विचारधारा के संगठन दावते इस्लामी का कब्जा है।
"पाकिस्तान के सामान्य देश बनने का एकमात्र जरिया यह है कि वह आतंकवाद को वित्तीय सहयोग देना बंद करे और अपना ध्यान उन समस्याओं पर केंद्रित करे, जो अल्पसंख्यकों समेत उसके नागरिक झेल रहे हैं।"