यह नोटिस देश में नागरिक व सामाजिक गतिविधियों के लिए 51.72 करोड़ रुपए की उधारी और ऋण से संबंधित है। इसमें एनमेस्टी पर आरोप है कि उसने अपने मूल निकाय एमनेस्टी इंटरनेशनल (ब्रिटेन) से सेवा निर्यात के नाम पर यह राशि हासिल की और...
प्रवर्तन निदेशालय ने यह कार्रवाई 'Prevention of Money Laundering Act (PMLA)' के तहत की है। लगातार 4 दिनों तक चली मैराथन पूछताछ के बाद ईडी ने उन्हें गिरफ़्तार किया है।
2017 में एक छापेमारी के दौरान डीके शिवकुमार की सम्पत्तियों में गड़बड़ी मिली थी, जिसके बाद उनके ख़िलाफ़ जाँच की जा रही है। शिवकुमार के साथ-साथ चार अन्य को भी इस मामले में पूछताछ के लिए ED से नोटिस मिला है, जिसे रद्द कराने का अनुरोध लेकर वह......
ED की हिरासत से बचने के लिए चिदंबरम किस कदर व्यग्र हैं, इसे इस बात से समझा जा सकता है कि उन्होंने खुद ही सोमवार तक सीबीआई की हिरासत में रहने की पेशकश कर डाली।
चिदंबरम और इस मामले के सह-आरोपितों की 12 देशों में सम्पत्ति है। इन देशों में अर्जेंटीना, ऑस्ट्रिया, ब्रिटिश वर्जिन आइसलैंड, फ्रांस, ग्रीस, मलेशिया, मोनाको, फिलीपींस, सिंगापुर, साउथ अफ्रीका, स्पेन और श्री लंका शामिल है।
चिदंबरम के परिवार का और कानूनी विवादों का रिश्ता नया नहीं है। चिदंबरम के अलावा उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के खिलाफ भी ये आरोप हैं कि उन्होंने आईएनएक्स मीडिया के खिलाफ संभावित जाँच को रुकवाने के लिए 10 लाख डॉलर की माँग की थी। इस मामले में कार्ति चिदंबरम को बीते साल 28 फरवरी को गिरफ्तार भी किया गया था।
CBI तथा प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पी चिदम्बरम की गिरफ्तारी से राहत माँगने वाली याचिका के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल किए हैं। अब कोर्ट कैविएट दायर करने वालों का पक्ष सुने बिना मामले में कोई फैसला नहीं सुना सकता है।
2008 में एफआईपीबी की मंजूरी में कुछ दिक्कतें आईं तो पीटर मुखर्जी और इन्द्राणी ने 'उचित सलाह' के लिए तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम से मुलाक़ात की। कार्ति ने मुखर्जी दम्पति से 10 लाख डॉलर रिश्वत के रूप में माँगे।
दिल्ली हाईकोर्ट चिदंबरम को 'किंगपिन' बताते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। HC ने चिदंबरम के मामले को मनी लॉन्ड्रिंग का 'क्लासिक उदाहरण' बताते हुए कहा कि ऐसे केस में यदि आरोपित को जमानत दी जाती है, तो इससे समाज में बेहद खराब संदेश जाएगा।
रतुल पुरी ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा रिकॉर्ड किए गए अपने बयान की कॉपी हासिल करने के लिए गुरुवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। निचली अदालत ने 6 अगस्त को उनकी यह माँग ख़ारिज कर दी थी।