"भारत के मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयुक्त, राष्ट्रपति यह सभी लोग हर पाँच साल बाद मतदान करते हैं। हर इंसान जो चुनाव के दौरान अपने संवैधानिक अधिकारों का सदुपयोग करता है। उसकी कोई न कोई राजनीतिक विचारधारा होती है।"
'हिन्दुओं से आजादी' भी इसी एक शब्द में समेट दी गई है, जो बार-बार, रूप बदल कर हमारे कानों तक पहुँचती है। साथ ही, 'केरल माँगे आजादी' जैसे संदर्भ भी इसी शब्द में सिमटे हुए हैं।
प्रशांत भूषण के मामले में तमाम वाम-उदारवादी वर्ग 'ऑड-इवन' की तर्ज पर इस बार SC के फैसले से नाराज नजर आ रहा है और प्रशांत भूषण को दोषी ठहराए जाने पर SC की गरिमा पर सवालिया निशान लगाते हुए नजर आ रहा है।
"जब उनसे आईडी के बारे में पूछा गया तो उन्होंने दिखाने से मना कर दिया। वह यहाँ का माहौल बिगाड़कर धर्म के नाम पर खेल करवाना चाह रहे थे। हम यहाँ बरसों से रह रहे हैं। यहाँ सभी प्यार से रहते हैं यहाँ ऐसा कुछ नहीं है।"