राम कृष्ण के बाद अब राकेश कृष्णन्न सिम्हा ने इंडिया टुडे की कार्यसंस्कृति की पोल खोली है। उनका दावा है कि संस्थान का सच्चाई से कोई लेनादेना नही है। उसे केवल नकदी चाहिए।
इंडिया टुडे ने अब वह स्कूल और हेडमास्टर खोज निकाला है जहॉं कभी रिया चकवर्ती ने पढ़ाई की थी। इसके जरिए भी इंटरव्यू की तरह ही इमेज गढ़ने की कोशिश की गई है।
"भारत के मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयुक्त, राष्ट्रपति यह सभी लोग हर पाँच साल बाद मतदान करते हैं। हर इंसान जो चुनाव के दौरान अपने संवैधानिक अधिकारों का सदुपयोग करता है। उसकी कोई न कोई राजनीतिक विचारधारा होती है।"