शेखी बखारने के चक्कर में पाकिस्तानी रेल मंत्री को अपनी बेइज्जती करवाने की आदत रही है। वे भारत-पाकिस्तान के बीच एक-दो महीने में परमाणु युद्ध होने की भविष्यवाणी कर चुके हैं। उनका दावा है कि पाक के पास पाव, आधा पाव के एटम बम हैं।
डीएम अनुराग पटेल कहते हैं कि प्रिंट के पत्रकार ने वीडियो बनाया, इसीलिए उस पर मुक़दमे दायर किए गए। डीएम साहब बताएँ कि रेडियो पत्रकार को देखने का हक़ है या उसे सिर्फ़ सुन कर ही काम चलाना है? प्रशासनिक लापरवाही को छिपाने के लिए ख़ुद का मज़ाक बना रहे डीएम।
इंडिया टुडे के पत्रकार शिव अरूर ने ट्वीट कर लिखा कि तिरंगा टीवी और बीटीवीआई का बंद होना बताता है कि मीडिया जगत के लिए यह कठिन परिस्थिति है। बीटीवीआई के पत्रकार आदित्य राज कौल ने लिखा कि हर यात्रा का एक अंत होता है और रात के अँधेरे के बाद ही नया सवेरा निकलता है।
विजयता ने अपनी बात को साबित करने के लिए इस रिपोर्ट में वरिष्ठ सरकारी सूत्रों का हवाला दिया। लेकिन उन्होंने इस रिपोर्ट में किसी अधिकारी का नाम नहीं बताया। उन्होंने बस हवा में दावा कर दिया कि सुरक्षाबलों ने 36 लोगों को प्रदर्शन के दौरान घायल किया।
"सऊदी के एक व्यक्ति ने एयरक्राफ्ट के मॉडल की जगह गलती से असली एयरक्राफ्ट्स ख़रीद ली। 329 मिलियन यूरो ख़र्च कर उसने ऐसा किया और बाद में कहा कि इतना मूल्य उचित है। अर्थात, उसने 2600 करोड़ से भी अधिक रुपए ख़र्च कर दिए।"
इन पत्रकारों के द्वारा निशाने पर लिए गए अधिकारियों के ख़िलाफ़ कंटेंट्स को व्हाट्सप्प और फेसबुक सहित अन्य सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर फैलाया जाता था। एफआईआर में दर्ज किया गया है कि इन्होने 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' का ग़लत फायदा उठाते हुए आधारहीन ख़बरें चलाईं।
पाकिस्तानी मीडिया ने इंडिया टुडे पर मौसमी सिंह द्वारा पोस्ट किए गए उस क्लिप का इस्तेमाल करके यह दिखाने का झूठा प्रयास किया है कि कश्मीर में अत्यधिक बल का उपयोग किया जा रहा है।
इन्हें सिर्फ रोकना ज़रूरी नहीं है, इनका समूल नाश आवश्यक है। इनका लक्ष्य मोदी या भाजपा नहीं, इनका लक्ष्य हिन्दुओं को इतना पंगु और लाचार बना देना है कि ये बिखर जाएँ, नेतृत्वहीन हो जाएँ, और अंत में इस संस्कृति को भुला दें जिसकी जड़ में वैयक्तिक और सामाजिक स्वतंत्रता, सहिष्णुता, सर्वधर्म समभाव है।
NDTV: आरोप है कि NNPLC को FIPB बोर्ड की मंजूरी उस समय के FDI प्रावधानों को ताक पर रखकर दी गई। प्रणय रॉय, राधिका रॉय और विक्रम चंद्रा पर मुकदमा IPC की धारा 120-B, 420, और भ्रष्टाचार-निरोधी अधिनियम, 1988 की धारा 13(1) और 13(2) के अंतर्गत दर्ज किया गया है।