विषय: रवीश कुमार

रवीश कुमार

बात श्री-श्री 1008 श्री रवीश कुमार और उनके अखंड (आपको पता ही है) भक्तों की

श्री-श्री 1008 श्री रवीश कुमार जी महाराज के विरोधियों ने उनके हर पोस्ट और प्राइम टाइम पर कमेंट सेक्शन में लिख कर भक्तों को रवीशिया अफ़ीम की ख़ुमारी से बाहर लाने की कोशिश की लेकिन भक्त तो परमअज्ञान की अवस्था पा चुके थे, उनका उस प्रपंच सागर से बाहर आना नामुमकिन हो चुका था। वो बेचारे सूअरों की तरह कीचड़ में ही आनंद पा रहे थे।
रवीश कुमार

‘लोग घरों में मेरा शो नहीं देखने देते’ कहने वाले रवीश जी, लोगों को आपके बेकार शो मे रूचि नहीं रही

कुंठायुक्त विरोधाभासी रवैये की पराकाष्ठा पर टीवी फोड़ डालने की सलाह देने वाले रवीश कुमार ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि लोग उनके शो के दौरान टीवी बंद कर देते हैं। आप ख़ुद दोनों वीडियो देखिए और सोचिए कि रवीश आख़िर चाहते क्या हैं?

मिस्टर चिदंबरम को, पूर्व गृह मंत्री, वित्त मंत्री को ऐसे उठाया CBI ने… तो? चावल के लोटे में पैर लगवाते?

अगर एनडीटीवी को सीबीआई के दीवार फाँदने पर मर्यादा और 'तेलगी को भी सम्मान से लाया गया था' याद आ रहा है तो उसे यह बात भी तो याद रखनी चाहिए पूर्व गृह मंत्री को कानून का सम्मान करते हुए, संविधान पर, कोर्ट पर, सरकारी संस्थाओं पर विश्वास दिखाते हुए, एक उदाहरण पेश करना चाहिए था।
रवीश कुमार

बात रवीश कुमार के ‘सूत्रों’, ‘कई लोगों से मैंने बात की’, ‘मुझे कई मैसेज आते हैं’, वाली पत्रकारिता की

ये है वामपंथी पत्रकारिता जो खबरों को देखता नहीं, दिखाता नहीं, बल्कि खबरों को बनाता है, मेकअप करता है उनका और तब आपको गंभीर चेहरे के साथ बताता है कि भाई साहब आप देखते कहाँ हैं, रवीश का हलाल खबर शॉप यहाँ है!
रवीश कुमार द्वारा सुषमा स्वराज पर किए गए प्राइम टाइम से

रवीश जी, पत्रकार तो आप घटिया बन गए हैं, इंसानियत तो बचा लीजिए!

अनुभवी आदमी शब्दों को अपने हिसाब से लिख सकता है कि वो एक स्तर पर श्रद्धांजलि लगे, एक स्तर पर राजनैतिक समझ की परिचायक, और गहरे जाने पर वैयक्तिक घृणा से सना हुआ दस्तावेज। रवीश अनुभवी हैं, इसमें दोराय नहीं।
रवीश कुमार और मोदी

अलीगढ़ और रवीश: शाह ने नोचा इंटरनेट का तार, मोदी ने तोड़ा टावर, नहीं हो रहा दुखों का अंत

अलीगढ़ मुद्दे के साम्प्रदायिक न होने की वजह से अब भारत के मुसलमान शर्मिंदा नहीं हैं, न ही बॉलीवुड की लम्पट हस्तियाँ शर्मिंदगी के बोझ से मेकअप पिघला पा रही हैं, न ही पत्रकारों में वो मुखरता देखने को मिल रही है कि वो अपनी बेटी से नज़रें नहीं मिला पा रहे कि वो उनके लिए कैसा समाज छोड़े जा रहे हैं।

यूट्यूब पर लोग KRK, दीपक कलाल और रवीश को ही देखते हैं और कारण बस एक ही है

रवीश अब अपने दर्शकों से लगभग ब्रेकअप को उतारू प्रेमिका की तरह ब्लॉक करने लगे हैं, वो कहने लगे हैं कि तुम्हारी ही सब गलती थी, तुमने मुझे TRP नहीं दी, तुमने मेरे एजेंडा को प्राथमिकता नहीं माना। जब मुझे तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम देशभक्त हो गए।
रवीश कुमार

साला ये दुःख काहे खतम नहीं होता है बे!

जो लोग रवीश की पिछले पाँच साल की पत्रकारिता टीवी और सोशल मीडिया पर देख रहे हैं, वो भी यह बात आसानी से मान लेंगे कि रवीश जी को पत्रकारिता के कॉलेजों को सिलेबस में केस स्टडी के तौर पर पढ़ाया जाना चाहिए।
PM मोदी और अमित शाह, राजदीप, सोनिया और राहुल गाँधी, रवीश कुमार

मोदी-शाह प्रेस कॉन्फ़्रेंस, रवीश-राजदीप, राहुल गाँधी की बचकानी हरकतें, और सोनिया का मिशन 272

पिछले दिनों की कुछ खबरों पर चर्चा जिसमें आज हुए BJP प्रेस कॉन्फ्रेंस, राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस, मीडिया के समुदाय विशेष के लोगों के ट्रोल बन कर सिमट जाने की बात और सोनिया गाँधी के मिशन 272 की बात शामिल है।
रवीश कुमार

BJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस से पत्रकारिता के ‘नाराज फूफा’ गायब

नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने की प्रबल इच्छा रखकर महागठबंधन की रैली से लेकर चार्टर प्लेन में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ घूमने वाले NDTV के वरिष्ठ पत्रकार कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। विगत 4-5 सालों में देखने को मिला है कि अक्सर यह पत्रकार, शादी-बरात में नाराज फूफा की तरह ही मीडिया और प्राइम टाइम में नजर आते रहे हैं।
रूहअफजा

रवीश का रूहअफजा – ठन्डे शरबत का गरम मामला

रवीश जी ने बताया कि भाजपा की रैली में आमरस और गठबंधन की रैली में रूहअफजा की माँग रहती है। उसके बाद से वे केवल रूहअफजा की सप्लाई ही करते हैं, क्योंकि उसका रंग लाल होता है, और जब हर ग्लास में रूहअफजा भरते हुए लाल सलाम कहते हैं तो उनकी आत्मा को ठंडक मिलती है।
नरेंद्र मोदी रवीश कुमार

रवीश ‘कौन जात हो’ के कठिन सवाल चार्टर्ड प्लेन और 100 रुपए के दलित पानी बोतल में खो गए

रवीश वास्तविकता में मुश्क़िल सवाल न तो सामने वाले से पूछते हैं और न ही खुद से… उन्हें बड़े जहाज़, मंच पर जाकर फोटोबाजी और महँगे प्रसाधन से भी परहेज नहीं। ऐसे में मोदी जी को भी बिना झिझक… प्रधानमंत्री रहते रवीश के सामने बैठ कर कहना चाहिए - 'पांडे जी तुम भी कम नहीं हो बे… हें हें हें'!

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