2019 के लोकसभा चुनावों में, कॉन्ग्रेस पार्टी ने एक चुनावी घोषणा पत्र जारी किया था, जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कॉन्ग्रेस पार्टी यदि कभी सत्ता में आती है तो वह कृषि उपज मंडी समितियों के अधिनियम में संशोधन करेगी।
कुछ लोग और वामपंथी मीडिया संगठन हैं, जिन्होंने विस्तारवादी चीनी डिजाइन के खिलाफ भारत के रुख को कमजोर करने और मोदी सरकार के खिलाफ अपने एजेंडे को पूरा करने के लिए इस संकट का इस्तेमाल किया है।
व्यापक फेरबदल के नाम पर ओल्ड गार्ड को किनारे कर कॉन्ग्रेस ने युवराज के वफादारों को भाव दिया है। यह उस योजना का हिस्सा है जो अध्यक्ष पद पर राहुल गॉंधी की दोबारा ताजपोशी से पूरी होनी है।
कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से जब भी पर्दा उठेगा तो गाँधी ही निकलेंगे। या तो कुर्सी पर बैठा गाँधी या फिर पर्दे के पीछे से कुर्सी को नचाता गाँधी। 'गैर गॉंधी अध्यक्ष' महज जुमला है।
कॉन्ग्रेस ने हाल ही में फेसबुक और भाजपा के बीच सॉंठगॉंठ के आरोप लगाए थे। पर मनीष तिवारी के एक पत्र से पता चलता है कि अमेरिका में प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए कॉन्ग्रेस ने बकायदा लॉबी बना रखी है।