अदालत को यह पता नहीं है कि इस तरह रेगुलेशन संभव है या नहीं। हालाँकि, अदालत ने उन पक्षों को नोटिस जारी करने का फैसला किया है जो मामले में शामिल हो सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के हाथरस में कथित गैंगरेप केस और मौत के मामले में आज यानी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने हाथरस मामले में दायर कई दलीलों पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने माँस के लिए जानवरों को हलाल करने पर पाबंदी लगाए जाने की माँग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता अखंड भारत मोर्चा के वकील से कहा है कि यह याचिका शरारत भरी लगती है।
यहाँ कट्टरपंथी और वामी-कामी गिरोह सत्तू-नमक बाँध कर बैठा है कि जब तक दो भी जिंदा रहेगा आपसे में ही लड़ मरेंगे, एक ही बचा तो हाथ में तलवार और पैर के अँगूठे और दूसरी उँगली के बीच में कटार फँसा कर लड़ता रहेगा। उसका जन्म ही अराजकता फैलाने के लिए हुआ है, हिंसा उसकी नियति है, हिन्दूघृणा उसका न बदल सकने वाला पाठ्यक्रम है, आग लगाना उसकी मनोवृत्ति है, दंगा उसके लिए मजहबी आयोजन है…
SC ने कहा कि धरना-प्रदर्शन का अधिकार अपनी जगह है लेकिन अंग्रेजों के राज वाली हरकत अभी करना सही नहीं है और धरना-प्रदर्शन निर्धारित जगहों पर ही होना चाहिए।