एनआईए प्रवक्ता ने बताया कि पाकिस्तान स्थित लश्कर के मुख्यालय से पैसा दुबई भेजा जाता था। दुबई में बैठा हैंडलर हवाला कारोबार के जरिए यह पैसा भारत में भेजता था। इस पैसे को जावेद और उसके साथी लश्कर के नए एजेंट बनाने के लिए प्रयोग करते थे।
अचानक शुरू हुई फायरिंग पर सुरक्षा बलों ने पहले तो आतंकियों को समर्पण के लिए कहा। इसके बाद भी फायरिंग नहीं रुकी तो सुरक्षाबलों ने आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब दिया और दो आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया।
खुफिया एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के अनुसार आतंकी कैंप पाकिस्तानी पंजाब के मुरीदके, शाकरगढ़ और नारोवाल में हैं। बताया जा रहा है कि कैंपों में काफी तादाद में पुरुष और महिला रहते हैं और ट्रेनिंग ले रहे हैं।
चन्ना पिछले महीने से लापता था। वह सज्जाद हैदर के नेतृत्व वाले लश्कर गुट के लिए काम करता था। यह गुट मजदूरों की हत्या सहित कई आतंकी वारदातों में संलिप्त रहा है।
लश्कर ने इन कैंपों के लिए आतंकियों की भर्ती भी शुरू कर दी है। भर्ती स्वात घाटी के पास पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा से सटे कबीलाई इलाकों, पेशावर, क्वेटा और इलाका-ए-घैर में की जा रही है।
किश्तवाड़ और डोडा जिले पूरी तरह से आतंकी मुक्त होने की कगार पर हैं। डोडा में भी अब केवल हरुन वानी ही सक्रिय बताया जा रहा है। डोडा जिला पुलिस पहले ही उस पर 15 लाख रुपए का इनाम घोषित कर चुकी है।
जाकिर मूसा इसी साल मई में मार गिराया गया था। उसके मारे जाने के दो हफ्ते बाद हामिद कमांडर घोषित किया गया था। 30 वर्षीय हामिद पुलवामा का ही रहने वाला था।
"आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्रवाई में सरकार की तरफ़ से सेना को खुली छूट दी गई है। पाकिस्तान को चेतावनी है कि अगर उसका रवैया आगे भी ऐसा ही रहा तो सेना फिर से ऐसी कार्रवाई करने में नहीं हिचकेगी। आज 4 आतंकी कैम्पों को तबाह कर दिया गया है।"
पाकिस्तान ने आतंक के खिलाफ लड़ाई का ढोंग करते हुए मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज सईद के संगठन लश्कर-ए-तैयबा के चार टॉप आतंकियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार चारों आतंकी की पहचान प्रोफेसर जफर इकबाल, याहया अजीज, मुहम्मद अशरफ और अब्दुल सलाम के रूप में हुई है।
इस रैली के लिए हाफिज सईद ने सभी आतंकवादियों को बुलावा भेजा है। मुजफ्फराबाद में 14 अक्टूबर को होने वाली इस रैली में जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल के अधिकतर आतंकी शामिल होंगे।