पाकिस्तान की जनता में बढ़ते महँगाई को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है। जनता बेसिक सुविधाओं के लिए मुँहताज हो रही है और इमरान खान अभी भी इस समस्या से न निपटकर भारत के आतंरिक मामले कश्मीर में दखल के लिए दूसरे देशों से समर्थन न दिए जाने के बावजूद भी चक्कर लगा रहे हैं।
पुलवामा में आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने बालाकोट के आतंकी ठिकानों पर बम बरसाए थे। यह पहला मौका है जब सार्वजनिक तौर पर इमरान ने यह बात कबूली है। इससे पहले कम से कम दो मौकों पर उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से एयरस्ट्राइक की बात मानी थी।
एक अति-उत्साही पाकिस्तानी पत्रकार ने अपने देश की बेइज्जती करवा दी। उसने कश्मीर को लेकर ट्रम्प के सामने पाकिस्तानी प्रोपगेंडा चलाने की कोशिश की, लेकिन इससे इमरान का ही मज़ाक बन गया। मजबूरी में पाकिस्तानी चैनलों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रसारण ही रोक दिया।
इमरान ख़ान सऊदी क्राउन प्रिंस के स्पेशल प्लेन से अमेरिका पहुँचे। फिर भी इमरान ख़ान के लिए रेड कार्पेट नहीं बिछा। वहीं पीएम मोदी के लिए यह तो बिछा ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी उनके सम्मान में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
"वे क्या करना चाहते हैं, यह उनकी इच्छा है। हमने उन्हें आतंक को मुख्यधारा बनाते देखा है। अब वे नफ़रत की भाषा को मुख्यधारा में इस्तेमाल करना चाहते हैं। यह उनकी इच्छा है, अगर वे यही करना चाहते हैं। ज़हरीले शब्द अधिक समय तक नहीं चलते।"
जिहादी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए इमरान खान का ये बयान उस समय आया है जब वो जल्द ही संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करने वाले है और साथ ही विश्व के सबसे शक्तिशाली देख अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं।
पाकिस्तान FATF की ग्रे-लिस्ट में है, और उसके पास केवल अक्टूबर तक का समय है, वैश्विक समुदाय को यकीन दिलाने के लिए कि वह जिहाद के लिए पैसा देने वाले सभी स्रोतों पर लगाम लगा चुका है।
मुस्लिम देशों ने प्रधानमंत्री इमरान खान से कहा है कि कश्मीर मुद्दे को लेकर दोनों देशों के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए वह अपने भारतीय समकक्ष के खिलाफ अपनी भाषा में तल्खी को कम करें।
अलजजीरा के इंटरव्यू के दौरान जब उनसे चीन में वहाँ की सरकार द्वारा सताए जा रहे उइगरों के बारे में पूछा गया, तो इमरान इस सवाल को टालने लगे। उन्होंने कहा कि वो इस समस्या के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं।
पाकिस्तानी प्रोपगेंडा का राग अलापते हुए इमरान ने कहा, "कश्मीर में 80 लाख मुस्लिम पिछले लगभग छह सप्ताह से कैद हैं। भारत पाकिस्तान पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगा दुनिया का ध्यान इस मुद्दे से भटकाना चाहता है।"