पूजा की मौत के बाद पूरा परिवार शोक में है और गाँव वालों में इस बात का गुस्सा है कि यदि सरकारी आवास योजना का लाभ पहले मिला होता तो 20 वर्षीय लड़की की मौत नहीं होती।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि यह प्रकृति का प्रकोप है, जिसके आगे मनुष्य अक्सर असहाय हो जाता है। उन्होंने कहा, "सबसे बड़ी समस्या तो यह है कि किसी को नहीं पता कि मूसलाधार बारिश कब तक जारी रहेगी? मौसम विभाग भी ऐसी स्थिति में असहाय है।"
भाजपा और जदयू ने इस बयान को लेकर केजरीवाल की तीखी आलोचना की है। इससे पहले दिल्ली में एनआरसी लागू करने के मसले पर अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को निशाना बनाते हुए केजरीवाल ने यूपी-बिहार से आने वाले लोगों की तुलना बाहरियों से कर दी थी।
बिहार के प्रभावित क्षेत्रों में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की 19 टीमों को बचाव और निकासी अभियानों को चलाने के लिए पहले से ही तैनात किया जा चुका है। कल रात तक पटना के निचले इलाकों से 235 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।
'रवीश बुद्धि' पत्रकारिता के चोले में वही असर छोड़ते हैं, जैसा समाज में 'जड़ बुद्धि'। पत्रकारिता में गहराते 'रवीश बुद्धि' का नमूना ही है कि नवभारत टाइम्स के पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा को जिंदादिली की तस्वीर में कमीनापन, बेशर्मी और प्रचार की भूख, सब एक साथ दिखे।
शक्ति की आराधना का पर्व शुरू हो गया है। ऐसे में बुद्ध-महावीर की धरती से इस वीडियो का सामने आना और इसमें पीड़िता द्वारा गिड़गिड़ाते हुए कही गई 2 पंक्तियाँ पूरे देश-समाज को झकझोड़ देने वाली है। सवाल है कि एक ग़रीब मजदूर अपनी बेटी के लिए न्याय माँगते हुए कहाँ-कहाँ भटकेगा?
बिहार सरकार की हर घर नल से जल पहुॅंचाने की योजना की तो हालत खस्ता है। लेकिन, बारिश ने राजधानी पटना में जरूर जल को द्वारे-द्वारे पहुॅंचा दिया है। आम लोग ही बेबस नहीं हैं, राज्य के उपमुख्यमंत्री का घर भी पानी से लबालब है। सड़कें, रेल की पटरियॉं जलमग्न हैं और बिजली गुल।
मुजफ्फरपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सूर्यकांत तिवारी की अदालत में यह मुकदमा वकील सुधीर कुमार ओझा ने दायर किया है। इसका आधार लोगों की भावनाएँ भड़काने को बनाया गया है। अदालत ने इसे मंजूर कर लिया है और सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की है।
"महागठबंधन को बाँधने वाली गाँठे कितनी मजबूत हैं, इसका अंदाजा इसी से लग रहा है कि उपचुनाव की पाँच सीट आपस में बाँटने में ही टूट गई। ये 2020 में 243 सीटों पर कैसे फैसला कर पाएँगे?"
"एसडीओ साहब भला गाड़ी से क्यों उतरेंगे? वो तो बाबू हैं, साहब हैं। बहुत बड़े आदमी हैं। बाढ़ पीड़ितों से मैंने आपकी काफ़ी तारीफ सुनी है। कोशिश कीजिए कि मुझे ये दोबारा सुनने को न मिले। पीड़ितों के लिए कैम्प लगाइए नहीं तो आपके दफ़्तर के बाहर धरना दूँगा। ।"