इससे पहले भी कॉन्ग्रेस और जेडीएस गठबंधन के बीच दरार की ख़बरें सामने आ चुकी हैं। इसकी वजह यह भी है कि लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियों का वोट एक-दूसरे को ट्रांसफर नहीं हुआ, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
हत्या की घटना के बाद पुलिस ने सुमन कुंडू और सुजय दास को कथित तौर पर गोली मारने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है। दोनों को बैरकपुर उप-मंडल अदालत में बुधवार (5 जून) को पेश किया गया। दोनों के पास से कुछ हथियार और कारतूस भी बरामद किए गए।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के ईदगाह में आज ईद उल फितर पर हजारों लोगों ने ईद की नमाज अदा की। तिरंगा के साथ बीजेपी का झंडा भी फहरा दिया गया। ये प्रतीक रूप में ही सही लेकिन इसमें भाजपा के नाम पर मुस्लिमों को डराने वालों के लिए एक बड़ी नसीहत भी छुपी है।
कॉन्ग्रेस की समस्या को और बढ़ाते हुए, पाटिल के साथ पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार ने भी कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने तो यहाँ तक दावा किया कि जल्द ही 8-10 और विधायक भी पार्टी छोड़ बीजेपी में शामिल हो सकते हैं।
पश्चिम बंगाल में ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाना एक अपराध बन चुका है, जिसके लिए सज़ा भी दी जाती है। ताज़ा मामला कलकत्ता यूनिवर्सिटी का है जहाँ एक कर्मचारी का तबादला सिर्फ़ इसलिए कर दिया गया क्योंकि उसने ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाया था।
कॉन्ग्रेस के पूर्व सांसद के भाजपा में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि कासरगोड ज़िले के मंजेस्वरम निर्वाचन क्षेत्र से आगामी उपचुनाव लड़ने के लिए पार्टी उन्हें टिकट दे सकती है।
ममता बनर्जी अब जहाँ से भी गुज़रेंगी हो सकता है कि उस स्थान को अब पूरी तरह से खाली करा लिया जाए। आमतौर पर उस स्थान को पहले से ही खाली करा लिया जाता है जहाँ नेताओं के विरोध में नारेबाज़ी होने की गुंजाइश हो या फिर उन्हें काले झंडे दिखाए जाने की संभावना हो।
पिछले साल घाटी में आतंकरोधी अभियानों की शुरुआत न होने के कारण, रमज़ान महीने के दौरान केवल 11 आतंकवादी मारे गए थे और वह भी कुपवाड़ा और हंदवाड़ा ज़िलों में।
‘जय श्रीराम’ के नारे से तिलमिलाई ममता ने अपनी भड़ास निकालने के लिए ‘जय बांग्ला’ और ‘जय हिंद’ शब्दों का इस्तेमाल शायद एक विकल्प के रूप में चुना है। शब्दों को लेकर ममता बनर्जी की यह सोच उनकी कुंठित मानसिकता को उजागर करती है।