मध्य प्रदेश का इंदौर शहर सबसे अधिक कोरोना महामारी की चपेट में है, जहाँ मंगलवार को एक ही दिन में 20 नए मामले सामने आए, जिनमें 11 महिलाएँ और शेष बच्चे शामिल थे। साथ ही मध्य प्रदेश में कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 6 हो गई है।
पॉजिटिव पाए गए 8 मरीजों में से सिर्फ 3 मरीज की ही कांटेक्ट हिस्ट्री है, जबकि शेष 5 मरीजों की कोई ट्रेवल हिस्ट्री नहीं है। इंदौर जैसी घनी आबादी वाले शहर के लिए यह भयावह संकेत है। यहाँ अब तक जो मरीज कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, उनमें से अधिकांश की कोई ट्रैवल हिस्ट्री नहीं है।
रानीपुर इलाके में पहुँची एक टीम के साथ स्थानीय लोगों ने बदसलूकी की और टीम के सामने ही मुँह में पानी भरकर उनके ऊपर जूठा पानी फेंका गया और थूका गया। यही नहीं, जाँच टीम द्वारा उन्हें समझाने पर उनके साथ गाली-गलौज भी की गई।
भोपाल के तलैया स्थित जैनब मस्जिद में इमाम सहित करीब 30 लोग रात के वक़्त जमा होकर नमाज अदा कर रहे थे। वहीं, टीला जमालपुरा इलाके में मस्जिद के इमाम शाहीद नासिर के घर में लोग इकट्ठा होकर नमाज अदा कर रहे थे।
मृतक महिला राबिया ने कोई विदेश की यात्रा नहीं की थी। हाँ, उसने उज्जैन में आयोजित सीएए विरोध में हिस्सा जरूर लिया था साथ ही इंदौर में एक शादी में भाग लिया था। इसके बाद उन लोगों में हड़कंप मच गया है, जिन लोगों ने...
20 मार्च को इस्तीफे की घोषणा करने के लिए मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने आवास पर एक पत्रकार वार्ता की थी। जिसमें से एक पत्रकार की बेटी की कोरोना वायरस की जाँच में रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है।
इस प्रस्ताव का सदन में मौजूद सभी 107 बीजेपी विधायकों के अलावा 2 निर्दलीय, बीएसपी और एक एसपी के विधायक ने समर्थन किया। बहुमत प्रस्ताव पारित कराने के लिए सदन में आसंदी पर मौजूद सभापति जगदीश देवड़ा ने मतदान की औपचारिकता पूरी करवाई। इस दौरान हुए मतदान में विश्वास मत को ध्वनिमत के जरिए सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
मध्य प्रदेश के इतिहास में पहला मौका होगा, जब कोई चौथी बार मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुआ है। शिवराज सिंह ने अकेले ही शपथ ली और उनके साथ आज कोई मंत्री शामिल नहीं हुआ।
शिवराज सिंह के अलावा अब तक अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन-तीन बार सीएम रहे हैं। मगर, इस बार शिवराज के साथ-साथ नरेंद्र सिंह तोमर और नरोत्तम मिश्रा के नाम की भी चर्चा थी। लेकिन अब, भाजपा आलाकमान ने शिवराज के नाम ही मुहर लगा दी है।
22 विधायकों की बगावत ने ही मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार की विदाई की पटकथा लिखी थी। शुरुआत में विधानसभा स्पीकर इनका इस्तीफा स्वीकार करने से टालमटोल कर रहे थे। लेकिन, गुरुवार को फ्लोर टेस्ट के सुप्रीम कोर्ट के बाद इनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया था।