सिंधिया के लिए 'भारतीय कॉमेडियन' और 'सत्ता का भूखा सिंधिया' जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल किया गया। विकिपीडिया पेज पर ढूँढने पर पता चलता है कि कुछ और भी जानकारियों से छेड़छाड़ की गई है।
रविवार की शाम कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुलाकात भाजपा के बड़े नेताओं से हुई है। कहा जा रहा है कि इस मुलाकात में सिंधिया को राज्यसभा भेजने के फॉर्मूले पर सहमति बनी है।
कॉन्ग्रेस पार्टी ने दावा किया था कि उसका व उसके सहयोगियों के कुल 9 विधायकों को भाजपा ने होटल में बंद कर के रखा हुआ है। वहीं भाजपा का दावा है कि दिग्विजय सिंह ये सब कमलनाथ पर दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। कुछ विधायक गुरुग्राम में हैं तो कुछ बेंगलुरु में।
“जब जूनियर्स को मंत्री बनाया जाता है और कई बार विधायक होने के बावजूद आपको मंत्री नहीं बनाया जाता है, तो गुस्सा आना स्वाभाविक है। अगर आपके हितों की रक्षा नहीं की जाती है, तो इसमें गुस्सा होने में कुछ भी गलत नहीं है।”
कॉन्ग्रेस अपने राजनैतिक विरोधियों को किस तरह प्रताड़ित करती है, यह संजय पाठक से सुनिए। वे हत्या की आशंका जता रहे हैं। कह रहे हैं कि कॉन्ग्रेस में शामिल होने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। जब से कॉन्ग्रेस के खुद के MLA बागी हुए हैं वे निशाने पर हैं।
मध्य प्रदेश शिक्षा मंडल की सामाजिक विज्ञान की परीक्षा में सही जोड़ी मिलाने वाले सवाल (प्रश्न संख्या- 4) में एक विकल्प 'आज़ाद कश्मीर' का दिया गया है। प्रश्न नंबर 26 में ये दिखाने को कहा गया है कि नक़्शे में 'आज़ाद कश्मीर' कहाँ है?
बीजेपी विधायक संजय पाठक ने अपनी हत्या किए जाने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा है, "मैं सीएम कमलनाथ से नहीं मिला हूँ। बीती रात मुझे अगवा करने की कोशिश की गई थी। मेरे ऊपर बहुत दबाव बनाया जा रहा है।"
कमलनाथ सरकार का संकट गहराता ही जा रहा है। कॉन्ग्रेस ने जिन विधायकों को छुड़ाकर लाने का दावा किया है वे ही बंधक बनाए जाने की खबरों को नकार रहे हैं। साथ ही कह रहे हैं कि यह कॉन्ग्रेस की अंदरूनी लड़ाई है।
उन्होंने दावा किया है कि मध्य प्रदेश के 15-20 कॉन्ग्रेस विधायक भाजपा से संपर्क में हैं। उनके इस बयान के बाद ख़ुद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ सकते में हैं। वो भाजपा पर विधायकों की ख़रीद-फरोख्त के आरोप लगाए हैं। दिग्विजय सिंह ने भी ऐसे ही दावे किए थे।
दिग्विजय सिंह भले भाजपा पर आरोप लगा रहें हो और कमलनाथ सरकार को कोई खतरा नहीं होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन इस उठापठक में जिन विधायकों के नाम सामने आए हैं उनमें 3 उनके ही करीबी बताए जाते हैं। एक विधायक सिंधिया खेमे के बताए जा रहे हैं।