"कॉन्ग्रेस पार्टी ने पहले राजस्थान में बसपा विधायकों को तोड़ा और अब मूवमेन्ट को अघात पहुँचाने के लिए वहाँ के वरिष्ठ लोगों पर हमला करवा रही है, जो अति-निन्दनीय व शर्मनाक है। कॉन्ग्रेस अम्बेडकरवादी मूवमेन्ट के खिलाफ काफी गलत परम्परा डाल रही है....."
बुद्ध बोलते रहे, "अब इस मायावती नामक जीव को ही देखो। जब तक एक जाति को दूसरे से लड़ा कर, भटका कर, झूठे वादों पर विश्वास दिला कर इनका काम निकलता रहा, तब तक ठीक था। नाम मेरा लेते हैं और आंदोलनों के नाम पर हिंसा और आगजनी से इनका इतिहास पटा पड़ा है।"
नागपुर की रैली में बसपा सुप्रीमो ने कहा कि देशव्यापी धर्म-परिवर्तन तभी संभव हो सकता है जब 'बाबा साहब के अनुयायी' उनके बताए रास्तों पर चलें। बता दें कि नागपुर की ही दीक्षा भूमि में भीमराव आंबेडकर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था।
मायावती को यह बात हज़म नहीं हो पा रही है कि राजस्थान में उनके सभी छ: विधायकों ने फिर से कॉन्ग्रेस का हाथ थाम लिया। उन्होंने 2009 में अशोक गहलोत की सरकार के दौरान भी ऐसा ही किया था। कल भी मायावती ने एक रैली में कॉन्ग्रेस पर दलित विरोधी होने का आरोप लगाया।
यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने कहा कि कॉन्ग्रेस डॉक्टर बाबासाहब भीमराव आंबेडकर और उनकी मानवतावादी परंपरा की सदा से विरोधी रही है। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस के कारण ही खुद उनको भी केंद्रीय क़ानून मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
विधायक राजेसंदर सिंह गुढ़ा ने कहा कि 10 साल पहले भी वे बसपा विधायक दल के नेता थे और तब भी उन्होंने राज्य में सांप्रदायिक सौहार्द बनाने के लिए क़दम उठाया था। उन्होंने कहा कि आज फिर हालात ऐसे ही हैं और इसीलिए फिर से वैसा क़दम उठाना पड़ा।
सिमरजीत सिंह बैंस लोक इंसाफ पार्टी के संस्थापक हैं। 2017 में विधानसभा चुनाव AAP के साथ गठबंधन कर लड़ा था। फिलहाल उनकी पार्टी पंजाब डेमोक्रेटिक अलायन्स का हिस्सा है, जिसमें मायावती की बसपा, वामपंथी सीपीआई और अन्य पार्टियाँ शामिल हैं।
"काशीराम की मौत स्वभाविक नहीं थी। उनकी मौत संदेहास्पद परिस्थितियों में हुई। वे मायावती की निगरानी में थे। काशीराम की बहन ने कहा था कि मायावती ने उनकी हत्या की है। मैं मुख्यमंत्री से इस मामले की सीबीआई जॉंच की गुजारिश करूंगा।"
मायावती ने आगे कहा कि इस स्थिति में, कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए कश्मीर जाना और स्थिति का राजनीतिकरण करने का प्रयास करना उचित नहीं था। उन्होंने आगे कहा कि पार्टियों को कश्मीर जाने से पहले थोड़ा इंतज़ार करना चाहिए।
"मैनेजर के पद के लिए बिना एमबीए डिग्री वाले उम्मीदवारों को चयन किया गया। इसी तरह श्रेणी-3 व श्रेणी-4 की नौकरियों में योग्यता स्तर को कम किया गया। 12वीं की बजाय 10वीं व 8वीं उत्तीर्ण उम्मीदवारों को नौकरियाँ उपहार के तौर पर दी गईं।"