प्रोपेगैंडा वेबसाइट द वायर ने हिंदू विरोधी खबर को अंजाम देने की जल्दबाजी में न केवल झूठी खबर को फैलाया, बल्कि अपराध को जातिगत एंगल देकर लोगों को भड़काने का भी काम किया।
क्या किसान आंदोलनों से आ रहीं किसानों की मौत की खबरें वास्तव में धरना-प्रदर्शन से जुड़ी हुई मौत हैं? नोटबंदी के दौरान भी '32 दिन में 100 मौत' का चलन देखने को मिला था।
HDFC के चेयरमैन दीपक पारेख इससे पहले केंद्र सरकार के बदलावों की सराहना कर चुके हैं। उन्होंने कृषि में बदलावों और श्रम कानून में आए बदलावों में भी सरकार का समर्थन किया था।
यही रवीश कुमार साल 2015 में इन किसानों की हालात पर चिंता जताते हुए बता चुके थे कि मंडियों में किसान आढ़ती के चंगुल में फँसा हुआ है, जहाँ उन्हें गुलाम बनाया जा रहा है।
वामपंथी पोर्टलों पर नैरेटिव बदलने की कोशिशें जारी हैं। वो यह सोच रहे हैं कि साल भर बाद हिन्दू समाज और रिसते घावों को चाटती दिल्ली भूल गए होंगे कि साल भर पहले उसके सीने पर छुरा मारने वाले, और कपड़ों पर आग लगाने वाले लोगों की पहचान क्या थी।