मुख्य आरोपित के अनुसार, मृतक ने 'किसान आंदोलन' को लेकर कुछ गलत शब्दों का प्रयोग किया। फिर आरोपित गुस्सा गए और उन्होंने मिल कर मुकेश की हत्या की साजिश रची।
"आप हमें बताइए कि जनहित में आपका योगदान क्या है? आपने जिस मुद्दे को उठाया है, उसके हिसाब से आपने जमीन खोद कर कितने शवों को निकाला और उनका अंतिम संस्कार किया?"
"इस निर्दोष को प्यास ने नहीं... नकारा गहलोत सरकार ने मार डाला जिसने अपनी राजनीति से राज्य को भूख, प्यास, अपराध, बेरोजगारी और माफियाओं की जमीन में बदल दिया है।"
जिस वक्त मौलाना कारी मोहम्मद उस्मान मंसूरपुरी का जनाजा आता है उस दौराना हजारों की तादात में भीड़ इकट्ठी होती है। वीडियो में देखा जा सकता है कि सोशल डिस्टेंसिंग पूरी तरह से नदारद थी।
हिन्दू संगठनों से मृतका के पिता ने बताया कि उनकी बेटी 24-25 अप्रैल को सहेली के साथ दिल्ली गई थी। उसी दिन आरोपित सिकंदर को जमानत मिली। वो 28-29 अप्रैल को वहाँ से लौट आई थी।