86-वर्षीय डॉ. सिंह की पारंपरिक राज्यसभा सीट असम से थी। पिछले टर्म में जब मनमोहन सिंह राज्यसभा से विदा हुए तो इसे उनका रिटायरमेंट माना जा रहा था। लेकिन अब वह 3 अप्रैल, 2024 तक राज्यसभा सदस्य रहेंगे, और 92 की उम्र तक उनका कार्यकाल होगा।
पुलिस को चकमा दे स्वामी राज्यसभा में पहुँच चुके थे। सभापति बीडी जत्ती पिछले सत्र में मृत हुए सदस्यों की सूची पढ़ रहे थे। उनके खत्म करने से पहले ही स्वामी ने टोका, "सर, इस सूची में एक और नाम है। इन सत्रों के बीच लोकतंत्र भी मर गया है। इसलिए उसका नाम भी आपको शामिल करना चाहिए।"
पहले ही घर में नज़रबंद चल रहीं महबूबा मुफ़्ती को उनके घर से VIP गेस्ट हाउस हरि निवास ले जाया गया है। महबूबा मुफ़्ती ने 370/35A के न केवल पक्ष में बयान दिए थे, बल्कि उन्होंने देश-विरोधी और लोगों को भड़काने वालीं कई बातें ट्वीट भी की थी।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल राज्यसभा में पास हो गया है। जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बाँटने वाले इस बिल पर सदन में बिल के पक्ष में 125 वोट पड़े तो वहीं इसके विपक्ष में 61 वोट पड़े। जबकि एक सदस्य गैर हाजिर रहा। इससे पहले राज्यसभा से जम्मू कश्मीर आरक्षण दूसरा संशोधन बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
मोदी सरकार ने बड़ा फ़ैसला लेते हुए अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35-A हटा दिया, जिसपर राष्ट्रपति की मंज़ूरी भी मिल गई है। इसके अलावा लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर दिया गया है। साथ ही जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित राज्य घोषित कर दिया गया। अब जम्मू-कश्मीर अलग राज्य नहीं रहा।
मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले सपा नेता संजय सेठ ने पार्टी की सदस्यता के साथ-साथ संसद की सदस्यता से भी इस्तीफ़ा दे दिया है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के नीरज शेखर और सुरेंद्र नागर भी पार्टी से इस्तीफ़ा दे चुके हैं।
"यह न केवल एक मोटर व्हीकल एक्ट है, बल्कि यह एक सड़क सुरक्षा बिल है। मेरा मानना है कि इससे दुर्घटनाओं में कमी आएगी। इस विधेयक का पारित होना उन लोगों के लिए एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने दुर्घटनाओं में अपनी जान गँवाई।"
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पैगम्बर साहब ने हजारों साल पहले तीन तलाक़ को गलत बता दिया था लेकिन हम इस पर 2019 में बहस कर रहे हैं। विपक्ष के लोग 'लेकिन' के साथ तीन तलाक को गलत बता रहे हैं क्योंकि ये लोग इसे चलने देना चाहते हैं।
मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुप्रथा से मुक्ति दिलाने के मकसद से राज्यसभा में पेश विधेयक पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए विभिन्न दलों के सदस्यों ने इसे अपराध की श्रेणी में डालने के प्रावधान पर आपत्ति भी जताई और कहा कि इससे पूरा परिवार प्रभावित होगा।